मैं मजदूर हूं
सर्दी-गर्मी- पाला को भी सह कर ।
खदानों में जो हाड तोड़ काम कर ।।
मैं मजदुर हूं, अपना जीवन जिया ।।।
मैने झुग्गी- झोपड़ी में जीवन जी कर ।
फटी धोती-नंगे पैर में भी श्रम किया ।।
मै मजदूर हूं, मैने अपना धर्म किया ।।।
सड़क – बांध के किनारे भी सो कर ।
अपना सुख-दुःख न्योछावर कर ।।
मै मजदूर हूं, मैने ही ये काम किया।।।
गगन चुंबी अटालीका में श्रम कर ।
इन इमारतों में भी पसीना बहा कर ।।
मै मजदूर हूं, मैने भी फर्ज निभाया ।।।
सड़कों पर पिघलता सा ये कोलतार ।
रिक्शे को खींच ढोता रहता था भार।।
मैं मजदूर हूं, सेवा कर पैसा कमाया।।।
खेतों-खलिहानों में हर मौसम में मैंने ।
कड़ी मेहनत के फल से अन्न निपजाया।।
मै मजदूर हूं, मैने देश को अन्न खिलाया।।।
मैं शोषण की चक्की में सदा पिसता रहा।
अपने हकों की लड़ाई के लिए भी लडूंगा ।।
मजदूरों जागो आज मजदूर दिवस आया।।।
“नाचीज़” दुनियां के कोने कोने में जहां कहीं ।
मजदूर भाइयों ने ही सदा से पसीना बहाया ।।
मैं मजदूर हूं, देश के लिए सदा काम आया।।।
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मैं मजदूर मजबूर नहीं
मैं मजदूर हूँ, पर मजबूर नहीं हूँ ।
पापी पेट की खातिर मैं मजदूर हूँ ।।
ये आप ओर हम सब जानते ही हैं ।
पसीना बहा हक की कमाई खाता हूँ ।।
आप व हम सभी अच्छी तरह जानते हैं ।
इन बांध-नहरों के निर्माण में, मैं रहा हूँ ।।
मुझे नाज है मेरी किस्मत व बाजुओं पर ।
देश के निर्माण में नींव का पत्थर मैं ही हूँ ।।
मेरा शोषण तो कब व किसने नहीं किया ।
मैं तो खेत, सड़क, मिल में शोषित हुआ हूँ ।।
हक की कमाई ही मेरा ईमान-धर्म रहा है ।
हक के लिए घर से संसद तक बोल रहा हूँ ।।
हर वर्ष मजदूरों के लिए “मजदूर दिवस ” ।
मैं झंडे-डंडे ले प्रदर्शन करने को जाता हूँ ।।
दुनियाँ के मजदूरों एक हो का उद्घोष कर ।
फिर तगारी-फावड़ा-औजार ले निकलता हूँ ।।
सविंधान व सरकार ने जो कुछ भी किया ।
पर ,मैं मजदूर तो सदा से ही मजदूर हूँ ।।
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नाचीज़ बीकानेरी – 9680868028







