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Thursday, April 30, 2026, 6:52 am

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अमृता देवी की आंखें भी भर आई होंगी… वृक्षों की कटाई को रोकने के लिए कानून पर्याप्त नहीं…पर्यावरण प्रेमी बोले- जुर्माना 1 लाख और सख्त सजा का प्रावधान हो

राइजिंग भास्कर मुद्दा : नौकरशाह बंद कमरों में बनाते हैं कानून…सरकार आंख मूंद कर बिल लाती है…पर्यावरण और पेड़ों की सरकार को कोई चिंता नहीं…विकास के नाम पर पर्यावरण पर सरकार ने चला दी आरी…अब विश्नोई समाज फिर पहल करे

राइजिंग भास्कर. जोधपुर 

अमृता देवी सहित 363 पर्यावरण प्रेमियों ने पेड़ों को कटने से बचाने के लिए बलिदान दे दिया…पर उस राज्य में वृक्षों को काटने से रोकने के लिए सख्त कानून नहीं है…। पर्यावरण प्रेमियों ने शुक्रवार को कानून संशोधन को लेकर नाराजगी जताई और जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर कानून में सख्त प्रावधान करने और सख्त सजा के साथ जुर्माना 1 लाख रुपए करने की मांग की, ताकि वृक्षों की मनमानी कटाई को रोका जा सके।

श्री गुरु जंभेश्वर वन्य जीव सेवा एवं पर्यावरण विकास संस्थान, अखिल भारतीय बि श्नोई कमांडो फोर्स के तत्वावधान में जिला कलेक्टर जोधपुर को ज्ञापन सौंपा गया। संस्थान के प्रदेश अध्यक्ष पुखराज खेड़ी ने बताया कि राजस्थान सरकार द्वारा दो दिवस पूर्व किए गए कानून संशोधन मे वृक्षों की कटाई को लेकर के 1955 से लागू कानून जो ₹100 जुर्माना था, उसको बढा करके एक हजार रुपए किया गया है।

इससे सभी पर्यावरण प्रेमियों में व बिश्नोई समाज में और आमजन मै आक्रोश है। लोगों का कहना है कि इस नए कानून से हम संतुष्ट नहीं हैं। यह 1000 की नाम मात्र की जुर्माना राशि पर्याप्त नहीं है । इससे कम से कम ₹100000 या उससे अधिक जुर्माना व साथ मे सजा का प्रावधान भी होना चाहिए, यह नया कानून सरकार ने सोलर कंपनियों वालों के लिए और सरल कर दिया है। इसे हर कोई कंपनी वाला मात्र हजार रुपए देकर के कोई भी कंपनी वाला जुर्माना भर के खेजडियों और वृक्षों की कटिंग करने काम करेंगे इससे पर्यावरण को और ज्यादा नुकसान होगा, सरकार से मांग करते हैं कि समय रहते कानून में संशोधन करे, अन्यथा पर्यावरण प्रेमी आन्दोलन करेंगे। ज्ञापन देते समय एडवोकेट विजय शर्मा, किशन ऐकल खोरी, हिम्मताराम भादु, श्रवण गोदारा जिला अध्यक्ष नागोर एडवोकेट शारदा बिश्नोई, श्री रामसोऊ, जगदीश, इंद्रजीत गिला, दिनेश सेडिया, निरमा खीचड़, खुशबु, पूनम बाबल, मनीष, मूमल, पारीक, हितेशसिह राजपुरोहित, अनिता खीचड, भावना टांक, रामनिवास सोऊ, राजवीर संदीप, ओमप्रकाश बाबल, संतुसिह मेड़तिया आदि मौजूद थे।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor