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Thursday, April 30, 2026, 3:43 pm

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डॉ. हस्तीमल आर्य ‘हस्ती’ के बाल काव्य संग्रह ‘देश के परिवेश में’ का लोकार्पण 21 मार्च को

जोधपुर में साहित्यकारों की उपस्थिति में होगा भव्य आयोजन, बाल साहित्य और राष्ट्रभावना पर होगी विशेष चर्चा

दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर

भारतीय साहित्य विकास न्यास राजस्थान एवं श्री जागृति संस्थान की जोधपुर शाखा के संयुक्त तत्वावधान में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. हस्तीमल आर्य ‘हस्ती’ के बाल काव्य संग्रह ‘देश के परिवेश में’ का लोकार्पण समारोह 21 मार्च को आयोजित किया जाएगा। यह साहित्यिक कार्यक्रम सुबह 11 बजे डॉ. सावित्री मदन डागा साहित्य भवन नेहरू पार्क, जोधपुर में आयोजित होगा।

इस अवसर पर साहित्य, शिक्षा और संस्कृति से जुड़े अनेक विद्वान, साहित्यकार और साहित्य प्रेमी उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम में बाल साहित्य की वर्तमान स्थिति, उसके महत्व तथा नई पीढ़ी में साहित्यिक संस्कार विकसित करने की आवश्यकता पर भी विस्तार से चर्चा की जाएगी।

बाल साहित्य को समर्पित महत्वपूर्ण कृति

डॉ. हस्तीमल आर्य ‘हस्ती’ का नया बाल काव्य संग्रह ‘देश के परिवेश में’ बच्चों के लिए लिखी गई ऐसी रचनाओं का संकलन है, जिनमें राष्ट्रभावना, नैतिक मूल्य, प्रकृति प्रेम और सामाजिक संवेदनाओं का समावेश किया गया है। आज के समय में जब बच्चों का झुकाव डिजिटल माध्यमों की ओर अधिक हो रहा है, ऐसे में बाल साहित्य की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। इस संग्रह की कविताओं के माध्यम से बच्चों को न केवल भाषा की सुंदरता से परिचित कराया गया है, बल्कि उन्हें अपने देश, समाज और संस्कृति के प्रति जागरूक बनाने का भी प्रयास किया गया है।

साहित्यकारों का मानना है कि बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में साहित्य का बहुत बड़ा योगदान होता है। यदि बचपन में उन्हें अच्छे साहित्य से जोड़ दिया जाए तो उनमें संवेदनशीलता, कल्पनाशीलता और सकारात्मक सोच का विकास होता है।

साहित्यकारों की उपस्थिति में होगा लोकार्पण

कार्यक्रम के आयोजकों ने बताया कि इस समारोह में देश और प्रदेश के कई प्रतिष्ठित साहित्यकार उपस्थित रहेंगे। समारोह के मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार और आईआरएस अधिकारी डॉ. दिनेश सारंग (दिल्ली) होंगे। वे लंबे समय से साहित्य और प्रशासन दोनों क्षेत्रों में सक्रिय रहे हैं तथा हिंदी साहित्य के विकास में उनका महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता वरिष्ठ साहित्यकार एवं अधिवक्ता डॉ. घनश्याम नाथ कच्छावा होंगे। वे अपने विचारों के माध्यम से बाल साहित्य की परंपरा, उसके महत्व और वर्तमान समय में उसकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डालेंगे। समारोह की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि एवं गीतकार सत्यदेव संवितेंद्र करेंगे। वे लंबे समय से हिंदी काव्य जगत में सक्रिय हैं और उनकी रचनाएं साहित्य प्रेमियों के बीच काफी लोकप्रिय रही हैं। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में राजस्थान संगीत नाटक अकादमी के पूर्व सचिव महेश कुमार पंवार उपस्थित रहेंगे। वे साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं और कला-संस्कृति के संरक्षण के लिए उनके प्रयास सराहनीय रहे हैं।

मंच संचालन करेंगे युवा गजलकार

कार्यक्रम का संचालन युवा साहित्यकार एवं गजलकार मनशाह नायक करेंगे। वे अपनी साहित्यिक अभिव्यक्ति और मंच संचालन की शैली के लिए जाने जाते हैं। कार्यक्रम के दौरान वे विभिन्न वक्ताओं को आमंत्रित करने के साथ-साथ साहित्यिक माहौल को जीवंत बनाए रखेंगे।

आयोजकों ने दी जानकारी

श्री जागृति संस्थान के अध्यक्ष राजेश भैरवानी तथा समारोह संयोजक श्रीमती रमा आर्य ने बताया कि यह कार्यक्रम केवल एक पुस्तक लोकार्पण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसके माध्यम से बाल साहित्य की महत्ता को भी रेखांकित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आज के समय में बच्चों को अच्छे साहित्य से जोड़ना बेहद जरूरी है। बाल साहित्य बच्चों के मन में संवेदनशीलता, कल्पना और नैतिक मूल्यों का विकास करता है। इसलिए समाज के सभी वर्गों को इस दिशा में प्रयास करना चाहिए। आयोजकों ने यह भी बताया कि कार्यक्रम में साहित्यकारों द्वारा बाल साहित्य की वर्तमान स्थिति और भविष्य की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया जाएगा। इसके साथ ही डॉ. हस्तीमल आर्य ‘हस्ती’ की साहित्यिक यात्रा और उनके योगदान पर भी प्रकाश डाला जाएगा।

साहित्यिक परंपरा को आगे बढ़ाने का प्रयास

जोधपुर लंबे समय से साहित्य और संस्कृति की समृद्ध परंपरा का केंद्र रहा है। यहां समय-समय पर आयोजित होने वाले साहित्यिक कार्यक्रम न केवल रचनाकारों को मंच प्रदान करते हैं, बल्कि पाठकों और साहित्य प्रेमियों को भी नई रचनाओं से परिचित कराते हैं।डॉ. हस्तीमल आर्य ‘हस्ती’ का यह बाल काव्य संग्रह भी इसी परंपरा को आगे बढ़ाने का प्रयास माना जा रहा है। उनकी रचनाओं में सरल भाषा, सहज भाव और बाल मन की संवेदनाओं का सुंदर चित्रण मिलता है। साहित्यकारों का मानना है कि बच्चों के लिए लिखना सबसे कठिन कार्य होता है, क्योंकि इसमें भाषा की सरलता के साथ-साथ विचारों की गहराई भी बनाए रखना पड़ता है। डॉ. आर्य ने अपनी रचनाओं में इस संतुलन को बखूबी निभाया है।

साहित्य प्रेमियों से सहभागिता की अपील

आयोजकों ने जोधपुर के साहित्य प्रेमियों, शिक्षाविदों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों से इस कार्यक्रम में अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर इसे सफल बनाने की अपील की है। उनका कहना है कि ऐसे कार्यक्रम साहित्यिक वातावरण को मजबूत करते हैं और नई पीढ़ी को साहित्य से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor