गजसिंह, पूर्व नरेश, जोधपुर
567वें स्थापना दिवस पर संदेश
जब मैं जोधपुर के विशाल किले मेहरानगढ़ की प्राचीरों को निहारता हूं, जब नीली गलियों की ठंडी हवा मेरी आत्मा को छूती है, तब मैं गर्व से भर उठता हूं— गर्व अपने महान पूर्वजों पर, जिन्होंने मरुस्थल में इस स्वप्न-नगरी को बसाया और उसे दुनिया के मानचित्र पर विशिष्ट स्थान दिलाया।
आज जब हम जोधपुर की स्थापना का 567 वाँ पर्व मना रहे हैं, तो मैं श्रद्धा से अपने परम पूज्य पूर्वज राव जोधा जी को नमन करता हूं, जिन्होंने सन् 1459 में अपने अद्भुत दृष्टिकोण और अडिग संकल्प से इस नगर की नींव रखी। उनके बाद राव मालदेव, महाराजा जसवंत सिंह, महाराजा अजीत सिंह, महाराजा उम्मेद सिंह और मेरे पूज्य पिताश्री महाराजा हनवंत सिंह जी जैसे वीर, दूरदर्शी और कलाप्रेमी शासकों ने इस भूमि की गरिमा को निरंतर बढ़ाया। उनके अथक पुरुषार्थ से जोधपुर न केवल राजस्थान का, बल्कि पूरे विश्व का गौरव बना।
जोधपुर का स्थापत्य इसकी आत्मा है। मेहरानगढ़ के प्राचीरों से लेकर उम्मेद भवन पैलेस की भव्यता तक, हर पत्थर गाथाएं कहता है। नगर की जीवनशैली— सहज, गरिमापूर्ण और रंगों से भरी हुई— सच्चे राजस्थानी संस्कारों की परिचायक है। मिर्ची बड़ा और घेवर जैसे व्यंजनों से लेकर माखनिया लस्सी तक, यहां के खानपान ने स्वाद की दुनिया में अलग पहचान बनाई है। जोधपुरी साफा, बंदगला कोट और जोधपुरी पैंट-बिरजिस आज विश्वभर में फैशन का हिस्सा बन चुके हैं।
जोधपुर की कला, संस्कृति और साहित्य की परम्परा सदियों से समृद्ध रही है। मारवाड़ी भाषा की मिठास, अगणित रचनाकारों की साधना और लोकसंगीत की ऊंची तानों ने हमारी आत्मा को संवारा है। हमारी संगीत परम्परा ने अनेक स्वर-रत्नों को जन्म दिया, जिन्होंने जोधपुर की लोकधुनों को विश्वपटल पर पहुंचाया।
सैन्य दृष्टि से जोधपुर ने हमेशा वीरता के मानदंड स्थापित किए। हमारे रणबांकुरों ने विदेशी आक्रांताओं से लेकर आधुनिक युद्धों तक में अपना लोहा मनवाया। आज भी जोधपुर सैन्य प्रशिक्षण और रक्षा योगदान के लिए जाना जाता है।
अर्थव्यवस्था की बात करें तो व्यापार, हस्तशिल्प और पर्यटन ने जोधपुर को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया है। विधि और ज्योतिष के क्षेत्र में भी जोधपुर ने विद्वानों की एक समृद्ध परम्परा को संजोया है। राजनीतिक रूप से हमारे पूर्वजों ने न्यायप्रिय शासन की मिसाल पेश की, और आज भी जोधपुर लोकतांत्रिक चेतना का सशक्त केंद्र बना हुआ है।
खेलों में जोधपुर के सपूतों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाम रोशन किया है। पोलो जोधपुर की ही देन रही है। वहीं, सिनेमा और टेलीविजन की दुनिया में जोधपुर की धरती ने ऐसी पृष्ठभूमियां दी हैं, जिन्होंने सैकड़ों कहानियों को अमर बना दिया।
आज इस शुभ अवसर पर मैं सिर नवाकर अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करता हूं, जिन्होंने अपने स्वप्न, श्रम और तप से इस धरा को अमूल्य बनाया। मैं समस्त जोधपुरवासियों का भी आभार प्रकट करता हूं, जिनके परिश्रम, धैर्य और प्रेम ने जोधपुर को जीवंत और गौरवशाली बनाए रखा।
आइए, हम सब मिलकर अपने पूर्वजों के सपनों के अनुरूप जोधपुर को और भी उज्ज्वल, समृद्ध और गौरवशाली बनाएं। मेरी ओर से समस्त जोधपुरवासियों को स्थापना दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं और भविष्य के लिए मंगलकामनाएं।
(जैसा कि राइजिंग भास्कर के शिव वर्मा को बताया)




