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Thursday, April 30, 2026, 10:59 pm

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नकेल: युद्ध का बाई प्राडक्ट-भ्रमजाल

स्तम्भ : नकेल, हर रविवार

साथ दिए गए चित्रों से ज़ाहिर है कि युद्ध जैसे मुद्दे को भी मोदी ओरिएंटेड बना दिया गया। खुद मोदी जी अपने भाषण में एक जगह पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कहते हैं पाकिस्तान सुन ले। चुपचाप रोटी खानी है तो खा ले नहीं तो मोदी की गोली तो है ”
यहां मोदी स्वयं को लाइट दे रहे हैं।वे लड़ाई को व्यक्तिगत बना रहे हैं। उन्हें कहना चाहिए था,वरना हिंदुस्तान की फौज की गोलियां तो है ही।…

प्रमोद कुमार शर्मा. बीकानेर

आदरणीय प्रधानमंत्री मोदी जी ने देशनोक की पावन धरा से सिंदूर को अस्त्र की तरह दुश्मन पर फेंका , मगर वह देश के गलियारों में बहस के हत्थे चढ़ गया।यह हो रहा है। हफ़्ते दस दिन में मोदी के किसी ब्रह्म वाक्य पर जम कर बहस होती है। फिर मुद्दा बदल जाता है।यह देश को कैसी बहस में डाल दिया हमने?

हम देश का कार्य समय नष्ट कर रहे हैं। साथ दिए गए चित्रों से ज़ाहिर है कि युद्ध जैसे मुद्दे को भी मोदी ओरिएंटेड बना दिया गया। खुद मोदी जी अपने भाषण में एक जगह पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कहते हैं पाकिस्तान सुन ले। चुपचाप रोटी खानी है तो खा ले नहीं तो मोदी की गोली तो है ”
यहां मोदी स्वयं को लाइट दे रहे हैं। वे लड़ाई को व्यक्तिगत बना रहे हैं। उन्हें कहना चाहिए था,वरना हिंदुस्तान की फौज की गोलियां तो है ही।”फौज का हौंसला भी बढ़ता।मगर शायद पाकिस्तान को हराने से ज़्यादा मोदी लवर्स मोदी के आलोचकों को हराना चाहते हैं।तभी तो इस तरह के स्वांग भरी तस्वीर और कैप्शन दिन भर धड़ल्ले से चलते रहते हैं।कौन है इनके पीछे?ये लोग कौन हैं?इनके उद्देश्य क्या है? इनके फालोअर कौन है?ये सब लोग मिलकर देश को भ्रामक प्रचार में लगाए रखते हैं ।यह युद्ध काल में गंभीर बात हैं.।

निस्संदेह यह युद्ध कुछ और बन गया है। इस पूरे प्रकरण में गहरा पर्दा है कि क्या हुआ? अपने अपने दावे दोनों मुल्क कर रहे हैं।जीत के दावे।
यहां पर हम कह सकते हैं कि हमें भारतीय सेना के पराक्रम पर पूरा भरोसा है। पाकिस्तान खिसियानी बिल्ली की तरह खंभा नोच रहा है -पर राजनीतिक गलियारों में यह युद्ध क्या बन कर रह गया?
ऊपर से सुब्रमण्यम स्वामी का बयान तो सारी हदें ही पार कर जाता है।देश में नेताओं की भाषा का स्तर गिरता ही जा रहा है।वे असंयमित और अदूरदर्शी होते जा रहे हैं। कम-से-कम युद्ध जैसे समय में हमें धैर्य और गोपनीयता से काम लेना चाहिए।

इस सब में मीडिया की भाषा जिस तरह कराची फतेह और जनरल मुनीर को हिरासत में लेने जैसे झूठे और लफ्फाजी भरे समाचारों के कारण अविश्वसनीय हुई,वह अकथनीय है।

कुलमिलाकर मीडिया और नेताओं ने लोगों की मानसिकता को विभाजित कर उन्हें अपने माइंड सेट में ढालने की चरणबद्ध योजना बना रखी है। जिसमें वे कामयाब होते जा रहे हैं। भाषा के इस राजनीतिक संक्रमण ने देश की बौद्धिक संपदा को हैरानी में डाल दिया है।।

राम।।

 

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor