डी के पुरोहित. जोधपुर
राजस्थान के अलवर जिले के तरुण आश्रम, भीकमपुरा में तरुण भारत संघ संस्थान के स्वर्ण जयंती के अवसर पर आयोजित “स्वर्ण जयंती उत्सव“ में सागर जिले के छोटे से गांव रजौला, तह. शाहगढ़ के निवासी पारस प्रताप सिंह को “प्रगति-श्री“ सम्मान से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हे विश्व के प्रख्यात पर्यावरणविद जलपुरुष राजेंद्र सिंह, महाराष्ट्र सकाल के पूर्व प्रधान संपादक डॉ श्रीराम पवार, जनार्दन राय नगर राजस्थान विद्यापीठ के कुलपति प्रो कर्नल शिव सिंह सारंगदेवोत , सर्वोदय कार्यकर्ता रामधीरज सिंह और तरुण भारत संघ के निदेशक मौलिक सिसोदिया द्वारा प्रदान किया गया।
यह सम्मान पारस प्रताप सिंह द्वारा किए जा रहे सामाजिक, पर्यावरणीय, जल साक्षरता, लेखकीय जनचेतना कार्यों के लिए प्रदान किया गया है। इस सम्मेलन में देश-विदेश में 500 से अधिक लोग शामिल हुए। यहां 110 लोगों को विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग सम्मानों से सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर पारस प्रताप सिंह ने बताया कि, प्रकृति की अनमोल देन पानी, पर्यावरण में रहने वाले सभी जीव जगत का साझा संसाधन और सबके जीवन का आधार है। समाज को प्रकृति से सतत् जोड़ने और कर्तव्यपरायण बनाने का जल-संरक्षण, जन चेतना से अच्छा कोई कार्य नहीं है। इसलिए मुझे बहुत गर्व के साथ प्रकृति-मानवता का कार्य करते हुए तभासं के 50 वर्ष पूरे होने पर बधाईंयां और शुभकामनाएं। भारत में तरुण भारत संघ एक मंत्र संस्थान है जो अपने मूल सिद्धांतों को शुरू से अभी तक पकड़े हुए है। इस ऐतिहासिक गौरवपूर्ण अवसर पर सम्मान पाकर गौरांवित महसूस कर रहा हूं। यह सिर्फ संगठन की यात्रा नही बल्कि ग्राम स्वराज, जल स्वराज और जन चेतना के अमृत आंदोलन है। तरुण भारत संघ ने हमे सिखाया है कि नदी सिर्फ पानी को धारा नही, वो सभ्यता और संस्कृति की आत्मा है। बापू जी(जलपुरुष) के साथ प्रत्यक्ष निजी सचिव के तौर पर कार्य करके, राष्ट्रीय युवा जल बिरादरी के राष्ट्रीय संयोजक, जल जन जोड़ो अभियान के सलाहकार जैसे बड़े अभियानों में अपनी भूमिका निभाकर गौरान्वित हूं।
पारस प्रताप सिंह लगभग 8 वर्षों से सामाजिक कार्यों में लगे हुए है। इन्होनें भारत के 21 राज्यों में जलपुरुष राजेन्द्र सिंह जी के साथ जल यात्राएं करके बहुत सारे बड़े मंचों, विश्वविद्यालय, स्कूल ,कॉलेज ,बैठकों और सम्मेलनों में सहभागिता करके चेतना कार्य किया है। इसके साथ – साथ जलपुरुष जी तभासं द्वारा लिखित पुस्तकों-.अविरल गंगा जल साक्षरता यात्रा 2019-20, तीर्थ बचाओ जुड़ाओ, जलपुरुष को जल यात्रा, बाढ़-सुखाड़ से मुक्ति, सामूदायिक विकेंद्रित प्राकृतिक प्रबंधन है युक्ति , सभ्यता की सूखती सरिता, जलपुरुष की जलयात्रा, जल स्वराज, विश्व शांति के प्रयास, साझा समाधान, शिक्षा और विद्या, पुनर्जीवित नदी नेहरो, पानी पंचायत जैसी पुस्तकों का संयोजन कार्य भी किया है। अभी भी पर्यावरणीय- सामाजिक चेतना के कार्य में लगे हुए है।










