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Thursday, March 12, 2026, 10:19 am

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एक ही व्यक्ति में अनेक खूबियां : एनके मेहता अपने आप में एक संस्था थे

श्याम गुप्ता शांत. जोधपुर 

नरेन्द्र कुमार मेहता का जन्म 27.11.1933 को एवं निधन 11.06. 2025 को 92वें वर्ष की अवस्था में जोधपुर में हुआ।

बहुमुखी प्रतिभा के धनी मेहता अनेक खूबियों की खान थे। संक्षेप में उनकी उल्लेखनीय उपलब्धियां इस प्रकार हैं:- उनके कुल पांच काव्य-संग्रह प्रकाशित हुए। इसके अतिरिक्त युवाओं को अंग्रेजी सीखने के लिए प्रेरित करने हेतु उनकी अंग्रेजी की दो पुस्तकें भी प्रकाशित हो चुकी हैं। दस नाटकों की उनकी पुस्तक- “अभिशप्त” प्रकाशित व प्रशंसित हुई, जिसके नाटकों का सफल मंचन कई स्थानों पर हुआ।
EMRC Educational Media Research Centre के अन्तर्गत उन्होंने लगभग 100 डॉक्यूमेंटरी फिल्मों का निर्माण 1980 से 2000 के मध्य किया था, जिसकी पूरी Script भी स्वयं उन्होंने ही लिखी थी।
वे लगभग दो दशक तक प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्था: “नवोदय सबरंग साहित्य परिषद” के अध्यक्ष रहे, जिसके बैनर तले आज के कई स्थापित कवि एवं रचनाकारों ने अपनी काव्य-यात्रा प्रारंभ की थी। उक्त नवोदय संस्था में संगीत एवं साहित्य की मिली-जुली रागनियां उनके जीवन के अंतिम समय तक हर माह उनके आवास पर अनवरत चलतीं रहीं। एक ऐसी ही यादगार महफ़िल उनकी सदारत में गत् 06.5.2025 को उनके आवास पर सजी थी।
श्री मेहता “खुशदिलान-ए-जोधपुर” के भी लगभग बारह वर्ष तक अध्यक्ष रहे। इसी संस्था के तत्वावधान में उनके संपादन में हास्य-व्यंग्य की एक चर्चित पत्रिका “हास्य-लोक” का प्रकाशन हुआ, जिसने बेशुमार सुर्खियां बटोरीं।
वरिष्ठ रचनाकार श्री मेहता एक उम्दा गजल गायक, प्रखर कानूनवेत्ता, नामचीन शिक्षाविद्, नाट्य-लेखक, संगीत-साधक और निष्णात अनुवादक थे। उर्दू व हिंदी से English Translation में उनको महारत हासिल थी। वे स्व.जगमोहन, तलत महमूद, मुकेश व के.एल.सहगल साहब के मुरीद थे। सहगल सा.की पुण्य- तिथि पर उन्हें दूरदर्शन, दिल्ली द्वारा कार्यक्रम के लिए सम्मानपूर्वक आमंत्रित किया जाता था। दू.द.के ही कार्यक्रम “सुबह-सवेरे” में भी उन्होंने अपने हुनर का लोहा मनवाया था।
प्रसिद्ध संगीत निर्देशक खैय्याम साहब ने भी एक कार्यक्रम में उनकी गजल- गायकी की भूरि-भूरि प्रश॔सा की थी। इन विशेषताओं के अलावा वे सहज, जमीन से जुड़े हुए, हंसमुख, मिलनसार खुशमिज़ाज और हरदिलअजीज इंसान थे।
ऐसी शख्सियत के निधन से साहित्य एवं संगीत-जगत ने एक पुरोधा कला- मर्मज्ञ को खो दिया, जिसकी क्षति-पूर्ति निकट भविष्य में होना असंभव है।
ऐसे महामानव की आत्मा की शांति के लिए हम प्रभु से प्रार्थना करते हैं कि वे उन्हें मोक्ष प्रदान करें। शत शत नमन्।।

शोक-संतप्त “नवोदय सबरंग साहित्य परिषद परिवार” तथा समस्त कला-प्रेमी जगत।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor