राखी पुरोहित. जयपुर
राजस्थान सरकार ने एक अहम निर्णय लेते हुए प्रदेश में गोशालाओं को चारागाह भूमि आवंटन के मामलों में स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। राज्य के राजस्व विभाग (ग्रुप-6) द्वारा 22 जुलाई 2025 को जारी इस परिपत्र के अनुसार अब किसी भी गांव में गोशाला हेतु चारागाह भूमि के आवंटन का आवेदन तभी स्वीकार किया जाएगा जब दो विशेष शर्तें पूरी हों —
- संबंधित गांव में गोशालाओं की स्थापना हेतु कोई उपयुक्त निजी या अन्य प्रकार की वैकल्पिक भूमि उपलब्ध न हो।
- गांव में पशुओं के चारे की व्यवस्था हेतु पर्याप्त मात्रा में पहले से ही चारागाह भूमि उपलब्ध हो।
पुराने आदेशों की समीक्षा और कानून का हवाला
इस परिपत्र में यह स्पष्ट किया गया है कि गोशाला हेतु भूमि आवंटन के मामले राजस्थान काश्तकारी अधिनियम 1955, राजस्थान गौशाला अधिनियम 1960, राजस्थान गौशाला नियम 1964 और ‘राजस्थान भू-राजस्व (गौशालाओं को भूमि आवंटन) नियम, 1957’ के अंतर्गत आने वाले नियमों विशेषतः नियम-6 द्वारा शासित होंगे।
अधिकारी के अनुसार, नियम 6 के अंतर्गत यदि किसी आवेदन में उपरोक्त दोनों परिस्थितियाँ मौजूद नहीं हैं, तो चारागाह भूमि का आवंटन संभव नहीं होगा। साथ ही, यह भी उल्लेख किया गया है कि कई मामलों में न्यायालयों द्वारा पारित आदेशों के आलोक में स्पष्ट दिशा-निर्देशों की आवश्यकता महसूस की गई थी, जिसे यह परिपत्र अब स्पष्ट करता है।
अधिसूचना के निहितार्थ
यह परिपत्र पूर्व में जारी परिपत्र क्रमांक प.6(174)/राज-3/2025 दिनांक 26.05.2025 में दिए गए निर्देशों के अतिरिक्त सीमा को स्पष्ट करता है। अब गोशालाओं के नाम पर अवैध या नियम विरुद्ध ढंग से की गई भूमि आवंटन की कोशिशों पर अंकुश लगेगा। परिपत्र के अनुसार, भूमि की मांग तभी मान्य होगी जब चारागाह भूमि की वास्तविक आवश्यकता और उसके लिए उपयुक्तता का ठोस प्रमाण उपलब्ध हो।
गोशालाओं को झटका, पारदर्शिता की ओर कदम
इस फैसले को लेकर राज्य में संचालित अनेक निजी और स्वयंसेवी संगठनों द्वारा चलाई जा रही गोशालाओं में हलचल मच गई है। कई गोशालाएं अब तक नियमों की ढील के आधार पर ग्राम पंचायतों से भूमि आवंटन की अपेक्षा कर रही थीं। अब इस निर्णय के बाद पारदर्शिता और नियमों के अनुपालन की दिशा में सख्ती आ गई है।
हालांकि, पशुपालन और ग्रामीण विकास से जुड़े विशेषज्ञ इस फैसले को सकारात्मक दृष्टिकोण से देख रहे हैं। उनका मानना है कि इससे चारागाह भूमि की अंधाधुंध बंदरबांट पर रोक लगेगी और वास्तविक जरूरतमंद गोशालाओं को ही लाभ मिलेगा।
उच्च स्तर पर भेजी गई प्रति
इस परिपत्र की प्रति राज्य सरकार के विभिन्न प्रमुख अधिकारियों को भी भेजी गई है, जिनमें माननीय राजस्व मंत्री, प्रमुख शासन सचिव, जयपुर एवं अजमेर संभाग के आयुक्त, सभी जिला कलक्टर, संबंधित विभागों के सचिव और मंडल स्तरीय अधिकारियों के नाम शामिल हैं।
पशुधन संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
राजस्थान सरकार का यह निर्णय राज्य में पशुधन संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इसके माध्यम से सरकार ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि अब किसी भी गोशाला को बिना उचित तथ्यों और परिस्थितियों के चारागाह भूमि नहीं दी जाएगी। यह परिपत्र राज्य में भूमि आवंटन प्रक्रिया को पारदर्शी और कानूनी दायरे में बनाए रखने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है।










