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Friday, May 1, 2026, 1:21 pm

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रक्त की हर बूंद पीड़ित मानवता के आए काम, यही आचार्य महाश्रमण का पैगाम : कैलाश जैन

ABTYP के स्थापना दिवस 17 सितंबर पर होगा मेगा ब्लड डोनेशन ड्राइव. ABTYP अपनी 362 परिषदों व 55000+ युवाओं के माध्यम से पूरे भारतवर्ष के साथ साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर करवाएगी रक्तदान शिविरों का आयोजन।
तेयुप सरदारपुरा के पूर्व अध्यक्ष और ABTYP के कार्यकारिणी सदस्य कैलाश जैन से एमबीडीडी की तैयारियों को लेकर राइजिंग भास्कर के ग्रुप एडिटर दिलीप कुमार पुरोहित और एडिटर इन चीफ राखी पुरोहित की विशेष भेंटवार्ता…।
8302316074 diliprakhai@gmail.com

हम राजदान मेंशन में हैं। तेयुप सरदारपुरा के पूर्व अध्यक्ष और ABTYP के कार्यकारिणी सदस्य कैलाश जैन हमारे साथ हैं। दोपहर 12:30 का समय दिया हुआ था और वे हमारा बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। जैसे ही हम पहुंचे, उन्होंने मेरा और मेरी वाइफ का तेयुप का दुपट्‌टा ओढ़ाकर सम्मान किया। वे बोले- आराम से बैठिए…अभी बातों का सिलसिला शुरू करते हैं। फिर एक के बाद एक सवाल और कैलाश जैन द्वारा तत्परता से जवाब… जैसे सारे आंकड़े और तथ्य उनकी टिप्स पर हों।

राइजिंग भास्कर : अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद के बारे में बताएं?

कैलाश जैन : अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद (ABTYP) युवाओं पर केंद्रित गैर-लाभकारी संगठन है जो पूज्य जैन मुनि और जैन श्वेतांबर तेरापंथ संप्रदाय के 11वें आचार्य श्री महाश्रमण जी के आध्यात्मिक मार्गदर्शन में कार्य करता है। उनका अहिंसा, करुणा और सेवा पर आधारित शिक्षण हमारे इस मिशन को प्रेरित करता है कि हम दुनिया को एक बेहतर स्थान बनाएं। यह 21 से 45 वर्ष की आयु के व्यक्तियों के लिए एक ऐसा मंच है जो सामाजिक सेवा और सामुदायिक सशक्तिकरण के लिए समर्पित है। हम युवाओं की ऊर्जा, सामूहिक क्रिया और सार्थक सेवा के माध्यम से समाज को रूपांतरित करने में विश्वास रखते हैं।

राइजिंग भास्कर : परिषद का कार्य क्या है? कुछ विस्तार से बताएं?

कैलाश जैन : राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की पहलों का संचालन करते हैं जैसे मेगा रक्तदान अभियान, नेत्रदान अभियान, और आपदा प्रबंधन के लिए तेरापंथ टास्क फोर्स (TTF)। सस्ती स्वास्थ्य सेवा के लिए आचार्य तुलसी डायग्नोस्टिक सेंटर्स, व्यक्तित्व विकास कार्यशाला , कॉन्फिडेंट पब्लिक स्पीकिंग जैसे प्रोजेक्ट्स का संचालन। प्रभावशाली अभियानों के लिए सरकार और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ सहयोग।

राइजिंग भास्कर : ABTYP समाज में परिवर्तन किस तरह लाना चाहती है?

कैलाश जैन :  “आध्यात्मिकता से प्रेरित, मानवता द्वारा संचालित – ABTYP एक परिवर्तन की लहर है।” हम राष्ट्रीय संत आचार्य श्री महाश्रमण जी के मूल मंत्र मानवता की सेवा से प्रेरित हैं। हिंसा मुक्त समाज के प्रवर्तक और लहू बहाने की बजाय रक्तदान कर जीवन बचाने में विश्वास रखते हैं। आचार्य श्री महाश्रमणजी भी मानते हैं कि आज दुनिया बारूद के ढेर पर खड़ी हैं और हम उसे प्रेम, स्नेह और मानवता के संस्कारों से सींचकर ही सुख-समृद्ध और शांतिपर्व की स्थापना कर सकते हैं। आचार्य श्री महाश्रमण का मूल मंत्र यही है व्यक्ति मानवता की एकता में विश्वास रखें। कभी भी सांप्रदायिक वैमनस्य, जातिवाद में न पड़े। ईमानदारी से जीवन बिताएं। नशा मुक्त समाज हों ।

राइजिंग भास्कर : मानवता के लिए बेहतर भविष्य का निर्माण किस प्रकार करना चाहते हैं?

कैलाश जैन : लाइव दान के लिए उत्कृष्टता केंद्र संचालित करते हैं। भारतभर में 24×7 खुले केंद्र जो रक्त, प्लाज़्मा और नेत्रदान, अंगदान जैसी आपातकालीन जीवन रक्षक सहायता प्रदान करते हैं। बल्ड बैंकों के माध्यम से ब्लड कलेक्शन बसों के माध्यम से मोबाइल ब्लड कलेक्शन यूनिट्स का अत्याधुनिक बेड़ा दूरदराज के क्षेत्रों और शहरी केंद्रों दोनों में पहुंच सुनिश्चित करता है। ब्लड बैंक की शृंखला के तहत रक्त की कमी को प्रभावी और शीघ्रता से पूरा करने के लिए पूरे भारत में उन्नत रक्त बैंकों का एक नेटवर्क स्थापित कर रहे हैं। हमारी प्रतिबद्धता सिर्फ आज जीवन बचाने की नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वस्थ भविष्य सुनिश्चित करने की भी है।

राइजिंग भास्कर : आपका कहना है कि आपके संगठन ने रक्तदान और सेवा की विरासत बनाई है, कैसे?

कैलाश जैन : वाकई हमने रक्तदान और विभिन्न सेवा कार्यों के माध्यम से विरासत बनाई है। इसे इस तरह समझ सकते हैं–

2012: भारत और नेपाल भर में एक ही दिन में 96,000+ रक्त इकाइयां एकत्र करते हुए मेगा रक्तदान अभियान की शुरुआत।

2014: गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया – भारत और विदेशों में एक ही दिन में 1,00,000 से अधिक रक्त इकाइयां एकत्रित की गईं।

2016: पूरे भारत में 365 दिन रक्तदान शिविर आयोजित किए गए, जिन्हें एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स द्वारा मान्यता प्राप्त हुई।

2020: कोविड-19 महामारी के दौरान, 55,000+ रक्त इकाइयां और 2,000 प्लाज़्मा डोनेशन 700+ शिविरों में जुटाए गए (ग्लोबल और एशिया पैसिफिक रिकॉर्ड्स)।

2022: भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय के सहयोग से 42 देशों में 6,149 शिविर आयोजित कर एक ही दिन में 2,50,000+ रक्त इकाइयां एकत्र की गईं (वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स)।

2023: भारत सरकार के सेवा पखवाड़ा के अंतर्गत एक सप्ताह का अभियान शुरू किया गया, जिसमें भारतभर में 3.75 लाख+ रक्त इकाइयां एकत्र की गईं।

2024: पूरे वर्ष मेगा रक्तदान अभियान चलाया गया और 1 अक्टूबर को स्वास्थ्य मंत्रालय के सहयोग से NGO सम्मेलन आयोजित किया गया (स्वैच्छिक रक्तदाता दिवस)। हमारी उपलब्धियां सामूहिक प्रयासों की शक्ति और मानवता की भावना को दर्शाती हैं।

राइजिंग भास्कर : 2025 के एमबीडीडी के बारे में बताएं? 17 सितंबर ही क्यों?

कैलाश जैन : 17 सितंबर इसलिए क्योंकि इस दिन अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद का स्थापना दिवस है जिसके उपलक्ष्य में ये रक्तदान महाकुंभ का आयोजन किया जा रहा है। और उस दिन एक मात्र संयोग है कि उसी दिन देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का जन्मदिन है। मोदीजी ने देश के प्रधानमंत्री के रूप में सेवा को अपना मिशन बनाया है। पूरी दुनिया में भारत को वैश्विक पहचान दिलाई है। हमारे संगठन से 50 हजार से अधिक सदस्य जुड़े हैं इस कार्य में आचार्य श्री महाश्रमणजी की प्रेरणा तो है ही, साथ ही साथ मुनि योगेश कुमार जो आध्यात्मिक पर्यवेक्षक हैं, राष्ट्रीय अध्यक्ष रमेश डागा, राष्ट्रीय महामंत्री अमित नाहटा, एमबीडीडी के राष्ट्रीय प्रभारी हितेश भांडिया, सह प्रभारी सौरभ पटावरी, कोलकाता से यशवंत रामपुरिया विदेशों के रक्तदान शिविर की कमान संभालेंगे। 60 देशों में हमारा प्रयास होगा कि रक्तदान शिविर लगाएं। इसके लिए कई देशों की स्वीकृति आ चुकी है। भारतीय एंबेंसी भी सपोर्ट कर रही है।

राइजिंग भास्कर : एमबीडीडी की तैयारियां कैसी चल रही हैं?

कैलाश जैन : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहनराव भागवत के कर कमलों से मेगा ब्लड डोनेशन ड्राइव के बैनर का विमोचन हो चुका है। कई राज्यों के राज्यपाल, मुख्यमंत्री के साथ बैनर का अनावरण किया गया है। जोधपुर में भारतीय क्रिकेटर रवि विश्नोई के साथ भी एमबीडीडी को लेकर चर्चा की गई। उन्होंने भी इस अभियान की सराहना की है। उसके अलावा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडवीया, व कई राजनैतिक, फिल्मी हस्तियों ने हमारे अभियान की सराहना की है। हमारी टीम तैयारियों में लगी है, तिलक, साफा, चाबी का छल्ला, बैंगल, टीशर्ट, दुपट्‌टा, राखी और कई सामग्री पर एमबीडीडी का लोगो लगाकर प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। अनेक संगठन हमारा सहयोग कर रहे हैं। यहां तक कि कई उत्पादों पर इस मेगा ब्लड डोनेशन ड्राइव का लोगो लगाया जा रहा है। भारत सरकार द्वारा भी 2022 में बैनर पर भारत सरकार का लोगो लगाने की स्वीकृति प्रदान की थी सरदारपुरा परिषद द्वारा 17 सितंबर को अध्यक्ष मनसुख संचेती, मंत्री देवीचंद तातेड, कोच महावीर चौपड़ा एवं संयोजक धीरज बैगानी की देख रेख में 25 कैंपों का आयोजन किया जा रहा है।

राइजिंग भास्कर : अब तक के एमबीडीडी को कैसा और किन हस्तियों का सपोर्ट मिला?

कैलाश जैन : करन जौहर, शिल्पा शेट्‌टी, राजकुमार राव, रविना टंडन, बोनी कपूर, संजयदत्त, गुरमीत चौधरी, कपिल शर्मा, वरुण शर्मा सहित कई फिल्मी हस्तियों ने 2022 के मेगा ब्लड डोनेशन ड्राइव की सराहना की थी। रामनाथ कोविंद, जगदीप धनखड़, वैंकेया नायडू, हामिद अंसारी, ओम बिड़ला, आनंदी बेन पटेल, गुलाबचंद कटारिया, मनोज सिन्हा, कंभपति हरि बाबू, मंगूभाई पटेल, अनुसूइया उइके, आचार्य देवव्रत, थावरचंद गहलोत, जगदीश मुखी, गणेशलाल, रविंद्रनारायण रवि, फगु चौहान, भगतसिंह खोशियारी, कलराज मिश्रा, योगी आदित्यनाथ, भजनलाल शर्मा, देवेंद्र फडनवीश, भूपेंद्र पटेल, भूपेंद्र पटेल, पेमा खांडू, पुष्करण सिंह धामी, रेखा गुप्ता, जयराम ठाकुर, रमन सिंह, बाबूलाल मरांडी, वसुंधरा राजे, अशोक गहलोत, मोहन भागवत, जगतप्रकाश नड्‌डा, राजनाथ सिंह, अश्विनी वैष्णव, मनसुख मांडविया, सुब्रह्मण्यम जयशंकर, शिवराज सिंह चौहान, सीआर पाटील, गजेंद्रसिंह शेखावत, अनुराग ठाकुर, किरण रिजीजू, अर्जुन मेघवाल, कैलाश विजयवर्गीय, अश्विनी चौबे, सुनील बंसल, तरुण चुग, विनोद तावड़े, संवित पात्रा, सुधांशु त्रिवेदी, स्मृति ईरानी, अर्जुन मुंडा, हर्ष सिंघवी, धर्मेंद्र प्रधान, तेजस्वी सूर्य, कानू भाई देसाई, किरण बेदी, कवि शैलेश लोढ़ा आदि अब तक के अभियान की सराहना कर चुके हैं।

राइजिंग भास्कर : जोधपुर के स्तर पर बात करें तो क्या रक्तदान जरूरत को पूरा कर रहा है?

कैलाश जैन : लोगों में जागरूकता आई है। कैंप खूब लग रहे हैं। मगर अभी भी जरूरत की तुलना में रक्त कम उपलब्ध हो पाता है। जोधपुर में करीब 10 ब्लड बैंक है। 640 के करीब थैलेसीमिया पीडित बच्चे हैं, जिन्हें रक्त की जरूरत रहती है। उम्मेद अस्पताल में 600 से 700 डिलीवरी में 1000 यूनिट रक्त की खपत हो जाती है। 60 से 100 हार्ट ऑपरेशन में रक्त की जरूरत रहती है। महात्मा गांधी अस्पताल, मथुरादास माथुर अस्पताल, एम्स अस्पताल और अन्य प्राइवेट अस्पतालों को भी रक्त की जरूरत पड़ती रहती है, उन्हें भी अनदेखा नहीं कर सकते। ऐसे में 6000 से 7000 यूनिट प्रति माह रक्त की जरूरत रहती है। इसकी तुलना में रक्तदान कम ही हो पाता है। हालांकि अब तो जोधपुर में रक्तवीरों का काफिला बढ़ गया है। लोगों में जागरूकता आई है। फिर भी अभी और प्रयास की जरूरत है।

राइजिंग भास्कर : कोई महत्वपूर्ण बात जो आप बताना चाहें?

कैलाश जैन : बॉम्बे ब्लड ग्रुप जिसे एचएच फेनोटाइप भी कहा जाता है, एक दुर्लभ रक्त समूह है जो 10000 में से लगभग एक व्यक्ति में पाया जाता है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हैल्थ (एनआईएच) के अनुसार यह 1952 में बॉम्बे में डॉ. वाईएम भेंडे द्वारा खोजा गया था। इस रक्त समूह में लाल रक्त कोशिकाओं पर एच एंजीटन की कमी होती है, जो ए और बी एंटीजन के लिए आधार है, इसका मतलब है कि बॉम्बे ब्लड ग्रुप वाले व्यक्ति किसी भी एबीओ रक्त समूह (यहां तक कि ओ समूह भी) से रक्त नहीं ले सकते, क्योंकि उनके शरीर में एच एंटीजन के खिलाफ एंटीबॉडी होती है, वे केवल उसी बॉम्बे ब्लड ग्रुप वाले व्यक्ति से रक्त प्राप्त कर सकते हैं। इस ब्लड ग्रुप के लोगों के खून में मौजूद प्लाज्मा के अंदर एंटीबॉडी ए, बी और एच होता है। किसे दें और किससे ले सकते हैं खून? इस ब्लड ग्रुप वाले व्यक्ति सिर्फ दूसरे बॉम्बे ब्लड ग्रुप वाले से सही ब्लड ले सकते हैं। इसलिए इस ब्लड ग्रुप का जो भी व्यक्ति ब्लड डोनेट करता है, उसे स्टोर कर लिया जाता है। अभी हाल में बैंगलुरु में एक और नए ब्लड ग्रुप CRIB की खोज की सूचना भी प्राप्त हुई है।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor