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Sunday, October 18, 2026, 6:48 am

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हिरोशिमा दिवस पर संगोष्ठी : अमेरिका, रूस, चीन आदि के बीच बढ़ते तनाव से दुनिया पर परमाणु युद्ध का खतरा आज भी मंडरा रहा

युद्ध विरोधी विचारों एवं प्रकृति-मानव केंद्रित विचारों को धारण करते हुए एवं युद्ध उन्माद को फैलने से रोकने में भागीदारी पर हुई चर्चा

राइजिंग भास्कर. जोधपुर

6 अगस्त को चौपासनी हाउसिंग बोर्ड जोधपुर के सेक्टर 19-ई पार्क में लालसिंह कॉलोनी मोहला विकास समिति एवं प्रकृति-मानव केंद्रित जन आंदोलन जोधपुर के संयुक्त तत्वावधान में हिरोशिमा दिवस के 80 वर्ष पूरे होने पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया।

द्वितीय विश्व युद्ध के दरमियान 6 अगस्त 1945 को अमेरिकी महाशक्ति की प्रभुत्ववादी व जन विरोधी कृत्य ने जापान के शहर हिरोशिमा पर पहला परमाणु बम गिराया, दूसरा परमाणु बम 9 अगस्त 1945 को जापान के ही शहर नागासाकी पर डाला गया। लाखों लोगों को मारने व रेडियोधर्मी विकिरणों से तड़पाने के साथ-साथ पृथ्वी के प्राकृतिक संसाधनों की बर्बादी आमतौर पर सारी दुनिया और खास तौर पर जापान के लोग आज भी नहीं भूल पाए हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध, इजराइल-फिलिस्तीन युद्ध और भारत-पाक युद्ध (और चार दिन बाद सीज-फायर) के अलावा अन्य देशों की सीमाओं पर टकराव एवं गृह-युद्ध से ग्रस्त लोगों की अमानवीय हालत हम सब देख रहे हैं। दुनिया की महाशक्तियों खासकर अमेरिका, रूस, चीन आदि के बीच बढ़ते तनाव से दुनिया पर परमाणु युद्ध का खतरा आज भी मंडरा रहा है।

दूसरी तरफ पृथ्वी पर कॉरपोरेट कंपनियों द्वारा प्राकृतिक संसाधनों के अति दोहन से पर्यावरण भी बिगड़ता जा रहा है। हजारों वैज्ञानिकों एवं समाजशास्त्रियों की चेतावनियों के बावजूद दुनिया की सरकारें एकतरफा विकास या पर्यावरण और मानवता विरोधी विकास मॉडल के कारण पृथ्वी का औसत तापमान लगातार बढ़ाते जा रहे हैं। जिससे जलवायु परिवर्तन की समस्या, जीवन व मौत के रूप में हमारे सामने पेश हो गई है। इस मौके पर युद्ध विरोधी विचारों एवं प्रकृति-मानव केंद्रित विचारों को धारण करते हुए एवं युद्ध उन्माद को फैलने से रोकने में भागीदारी पर घनश्याम चौहान, एमआर परमार, सीआर देपन, रमेश जोशी, लक्ष्मण लाल गुरु, प्रेम सिंह चौहान, महेश पवार, डॉ.हस्तीमल आर्य ने विचार प्रस्तुत किए। अंत में समिति के सचिव रमेशनाथ माथुर ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor