Explore

Search

Thursday, July 9, 2026, 1:56 am

Thursday, July 9, 2026, 1:56 am

LATEST NEWS

The specified slider does not exist.

Lifestyle

संदीपनी महाराज की बात… इस रक्षा बंधन पर एक संकल्प लें — जैसे बहन भाई से कहती है ‘मेरी रक्षा करो’, वैसे ही भाई से कहें — गौ माता की भी रक्षा करो।”

जहां गौ सुखी होगी, वहां बहनें खुश होंगी। जहां बैल दुखी होंगे, वहां भाई और बुजुर्ग पीड़ित होंगे। गाय का सम्मान, माताओं के सम्मान का प्रतीक है : संदीपनी महाराज

दिलीप कुमार पुरोहित. जाजीवाल गहलोतां

8302316074 diliprakhai@gmail.com

हल्की ठंडी हवा, गौशाला के आंगन में अलौकिक शांति। इस शांति को तोड़ती दूर से आती गायों की घंटियों की आवाज़… इसी माहौल में ओम श्री श्री महर्षि संदीपनी राम महाराज खाट पर बैठे थे। उनके सामने कैमरा, लेकिन निगाहें गोदी में सिमटी एक नन्ही बछड़ी पर। पतली, हल्की-सी चादर में लिपटी बछड़ी उनकी गोद में इस तरह लेटी थी जैसे सृष्टि की सारी सुरक्षा उसे यहीं मिल गई हो।

महर्षि ने मुस्कुराकर चादर का कोना उठाया, और कैमरे के लेंस में झांकते हुए बोले —
“यह बछड़ी काफी देर से मेरी गोदी में सो रही है। कल रक्षा बंधन है, और आज यह मेरी गोद में आराम कर रही है।”
फिर उन्होंने हल्के से बछड़ी के माथे पर हाथ फेरा और कहा,
“अगर कपड़ा हटाने से यह जाग सकती है… तो क्या आप मेरा संदेश सुनकर नहीं जाग सकते?”

भीतर फैली शांति में महर्षि का स्वर गूंजा —
“मेरी धरती की जितनी भी बहनें हैं, जितनी भी माताएं हैं, सभी को प्रणाम। इस रक्षा बंधन पर एक संकल्प लें — जैसे बहन भाई से कहती है ‘मेरी रक्षा करो’, वैसे ही भाई से कहें — गौ माता की भी रक्षा करो।”

महर्षि की बातों में गूढ़ आध्यात्मिकता और धरातल की सच्चाई दोनों थीं। उन्होंने समझाया —
“जहां गौ सुखी होगी, वहां बहनें खुश होंगी। जहां बैल दुखी होंगे, वहां भाई और बुजुर्ग पीड़ित होंगे। गाय का सम्मान, माताओं के सम्मान का प्रतीक है।”

बछड़ी का सिर उनके हाथ पर टिका था। महर्षि ने उसकी ओर देखते हुए कहा —
“देखो, यह बछड़ी आपसे मिठाई नहीं मांगती, कपड़े या आभूषण नहीं मांगती… यह सिर्फ प्रेम चाहती है। प्रेम दोगे तो प्रेम पाओगे। गौ माता की रक्षा करोगे तो राष्ट्र की रक्षा करोगे, और राष्ट्र की रक्षा करोगे तो अपनी ही रक्षा करोगे।”

आंगन में मौजूद भक्त चुपचाप सुन रहे थे। हवा में घुली गौ माता की नैसर्गिक खुशबू और दूर गौशाला के कोने से कुछ गाएं और मशीनों की चलने की आवाजें दृश्य को और जीवंत बना रही थी।

वीडियो के अंत में महर्षि ने कैमरे की ओर देश के भाई-बहनों के नाम संकल्प रूप में संदेश प्रसारित करते हुए कहा —
“जय गौ माता… जय श्री कृष्ण… रक्षा बंधन की सभी भाई-बहनों को शुभकामनाएं।”

बनाड़ और जाजीवाल गहलोतां की उनकी गौशालाओं से निकला यह संदेश केवल धार्मिक नहीं, बल्कि एक सामाजिक संकल्प भी है — कि राखी का धागा सिर्फ रिश्तों को नहीं, बल्कि राष्ट्र और गौ माता की सुरक्षा को भी बांधे।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor