मन की नहीं कोई वेदना समझते
दिल का सब धड़कना समझते
मन की नही कोई वेदना समझते।
दिल का धड़कना है तो जिंदा है
ना धड़के तो उसका मरना समझते।
इंसान है कि मन मसोसता रहता
दुनिया वाले हैं कि भेद ना समझते।
दिल किसी का करने पे नादानी
लोग है उसे याद रखना समझते।
“हंसा”करने पे अच्छा काम दुनिया में
इंसान है उसकी इज्ज़त करना समझते।
हंसराज”हंसा”
आदर्श बस्ती, मंडोर
जोधपुर (राजस्थान
भीड़ है कब बिफर जाए
भीड़ है कब बिफर जाए
फंस गए तो किधर जाएं।
सीख ले दौड़ना फिर तो
भीड़ मे हो निडर जाएं।
एक एक कर होती भीड़
रस्ता संकरा कैसे बाहर जाएं।
घर से बाहर जाना हो
जान हथेली पे लेकर जाएं।
प्रजातंत्र यानी नेता का भीड़तंत्र
नेता बचे जनता मर जाए।
भेड चाल चलती है दुनियां
बिरला है आलमे दिगर जाए।
भीड़ कहां नही मिलती”हंसा”
मुर्दाघर देख दिल सिहर जाए।
मायने
बिफर जाना=भड़क जाना
आलमे दिगर=बदली हुई स्थिति,दूसरी दुनियां
हंसराज “हंसा”
आदर्श बस्ती,मंडोर
जोधपुर (राजस्थान)









