अभी तक के इलाज जैसे कीमोथेरेपी और रेडिएशन न सिर्फ कैंसर सेल्स बल्कि हेल्दी सेल्स को भी नुकसान पहुंचाते हैं, इसे बार-बार उपयोग के लिए भी सुरक्षित माना गया है
राइजिंग भास्कर. मास्को
रूस के नेशनल मेडिकल रिसर्च रेडियोलॉजी सेंटर और एकेडमी ऑफ साइंस के एंगेलहार्ट इंस्टीट्यूट ऑफ मॉलिक्यूलर बायोलॉजी ने मिलकर ‘एन्ट्रोमिक्स’ वैक्सीन को विकसित किया है। कैंसर दुनिया भर में मौत के सबसे बड़े कारणों में से एक है। WHO के मुताबिक हर साल करीब 1 करोड़ लोग कैंसर से जान गंवाते हैं। अभी तक के इलाज जैसे कीमोथेरेपी और रेडिएशन न सिर्फ कैंसर सेल्स बल्कि हेल्दी सेल्स को भी नुकसान पहुंचाते हैं।
स्पुतनिक के मुताबिक, फेडरल मेडिकल एंड बायोलॉजिकल एजेंसी (FMBA) ने घोषणा की है कि यह mRNA आधारित वैक्सीन प्री-क्लिनिकल ट्रायल्स में सफल रही है। एजेंसी की प्रमुख वेरोनिका स्क्वोर्त्सोवा ने बताया कि इस वैक्सीन ने न केवल सुरक्षा बल्कि प्रभावशीलता भी दिखाई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस वैक्सीन ने ट्यूमर को छोटा करने और उनकी वृद्धि को धीमा करने में महत्वपूर्ण नतीजे दिए हैं। सबसे अहम बात यह है कि इसे बार-बार उपयोग के लिए भी सुरक्षित माना गया है। स्क्वोर्त्सोवा ने आगे बताया कि यह वैक्सीन हर मरीज के लिए अलग-अलग तरीके से तैयार की जाएगी और इसे उनके RNA प्रोफाइल के आधार पर कस्टमाइज किया जाएगा। इस वैक्सीन का पहला वैरियंट कोलोरेक्टल कैंसर के इलाज के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। इसके अलावा, दूसरा वैरियंट ग्लियोब्लास्टोमा (ब्रेन कैंसर) और कुछ खास प्रकार के मेलानोमा (स्किन कैंसर) के लिए विकसित किया जा रहा है।
रिपोर्ट्स में वैक्सीन की सफलता दर 100 प्रतिशत बताई गई है, लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह अभी सिर्फ शुरुआती नतीजे हैं। असली असर का पता बड़े पैमाने पर इंसानों पर ट्रायल के बाद ही लगेगा। इसलिए इसे कैंसर का “अंतिम इलाज” कहना अभी जल्दबाजी होगी। रूस सरकार ने कहा है कि ट्रायल सफल होने के बाद यह वैक्सीन नागरिकों को मुफ्त दी जाएगी।
रूस की नई mRNA कैंसर वैक्सीन Enteromix मेडिकल साइंस के लिए एक बड़ा बदलाव साबित हो सकती है. अगर इंसानों पर भी यह उतनी ही असरदार रहती है, तो यह कैंसर के इलाज में गेम-चेंजर बन सकती है।








