कविता : नीलम व्यास स्वयंसिद्धा
कौन हूँ मैं अनंत नीलिमा के प्रसार तले बैठी, भू की हरीतिमा के शृंगार को निहार बैठी, कुछ अनमनी सी आज घर से दूर आ बैठी, वयस पचास पार कर जिंदगी में ही पूछ बैठी? कौन हूँ मैं? क्या लक्ष्य मेरे जीवन का है? कब सुबह हुईं कब शाम ढली क्या जाना है? अनगिनत मिले … Read more