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Sunday, October 18, 2026, 8:26 am

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Lifestyle

कविता : नीलम व्यास स्वयंसिद्धा

कौन हूँ मैं

अनंत नीलिमा के प्रसार तले बैठी,
भू की हरीतिमा के शृंगार को निहार बैठी,
कुछ अनमनी सी आज घर से दूर आ बैठी,
वयस पचास पार कर जिंदगी में ही पूछ बैठी?

कौन हूँ मैं? क्या लक्ष्य मेरे जीवन का है?
कब सुबह हुईं कब शाम ढली क्या जाना है?
अनगिनत मिले किरदार जीवन में सोचा है?
सबका अपना लेन देन कितना हिसाब बाकी है?

लगी झड़ी प्रश्नों की मन पर सावन की फुहारों सी।
कभी लगी कांटों की चुभन कभी मिली बहारों सी।
ये जिंदगी आयी रुप बदल मौसम के नजारों सी।
हर मौसम कहता आस मत कर सहारो की।

हर रिश्ता निभाया शिद्द्त से मैंने ऐ जिंदगी!
रखी लाज मायके ससुराल की खूब ऐ जिंदगी!
बेटी बहन पत्नी बहू मां में बँट गयी मैं ऐ जिंदगी!
इन सब के बीच भूल ही गयी खुद को ऐ जिंदगी!

किया साबित हर बार खुद को मन से।
घर नौकरी बच्चों को संभाला मन से।
की मदद भरसक दीन दलित की मदद मन से।
घर बगिया की फुलवारी को सींचा लहू से मन से।

आज पूछा बैठी खुद से न जाने क्यों कौन हूँ मैं?
क्या लक्ष्य था सोचा विधाता ने जीवन दे, कौन हूँ मैं?
बस.. घर परिवार नौकरी तक सीमित? कौन हूँ मैं?

आया जवाब अंतरतम की गहन घनेरी गुफा से,
तुम आई हो धरा पर एक विशिष्ट लक्ष्य से,
करो छंद साधना बनो सफल कर्म से,
कलम को बना हथियार लड़ो तुम अनाचार से।

हो कही भी गलत तुम उठाओ आवाज़ सदा,
हर आह पर दीन की तुम लिखो कल्याण सदा,
नारी की अस्मिता कायम रखने उगलो आग सदा,
हे कवयित्री तुम लिख प्रेरक सार्थक बनो सदा।

कोलाहल मचा था जो अब होने लगा शांत देखो।
उलझन में फंसा मन सुलझ गया कैसे देखो।
कौन हूँ मैं?.. ये प्रश्न हुआ तिरोहित यूँ देखो।
मिला लक्ष्य जीवन का मिटा कोहरा कैसे देखो।

कौन हूँ मैं-तुम हो सच्ची देश भक्त वीर नारी।
कौन हूँ मैं-तुम हो नारी शक्ति चेतना मतवारी।
कौन हूँ मैं-तुम हो गार्गी लोपा मुद्रा जो न हारी।
कौन हूँ मैं-ध्यान योग लेखन साध लो, कब हारी?

हुए शांत झंझावत मन के मिली दिशा नवीन।
नर नारी सम ना कोई अधिक न अधीन।
कर दो साबित खुद को निज कौशल ज्ञान प्रवीन।
ओज तेज पूर्ण दिव्य प्रभा तुम समझो ना हीन।।

गूँज उठा ये गगन हुईं पुलकित ये धरा।
तू है श्रेष्ठ वो नारी जिसे है ब्रह्माण्ड ने वरा।
शील संस्कार की थाती बन प्रेम जिससे है झरा।
है सृष्टि तू!है प्रकृति तू!
तुझसे यह संसार तरा।।

नीलम व्यास स्वयंसिद्धा

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor