Explore

Search

Saturday, April 11, 2026, 10:44 pm

Saturday, April 11, 2026, 10:44 pm

LATEST NEWS
Lifestyle

विश्व पर्यावरण स्वास्थ्य दिवस आज…सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य के लिए पर्यावरणीय चेतना आज की महत्ती जरूरत

स्वच्छ हवा, निर्मल जल, संतुलित जलवायु, हरित वृक्षों और जैव-विविधता से युक्त पर्यावरण ही मानव सभ्यता के अस्तित्व की गारंटी है…।

आलेख : दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर

विश्व पर्यावरण स्वास्थ्य दिवस प्रतिवर्ष 26 सितंबर को मनाया जाता है। यह दिन हमें यह याद दिलाने के लिए है कि मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। यदि पर्यावरण अस्वस्थ होगा तो मनुष्य चाहे कितनी भी आधुनिक चिकित्सा पद्धतियां अपना ले, उसका स्वास्थ्य स्थायी रूप से सुरक्षित नहीं रह सकता। स्वच्छ हवा, निर्मल जल, संतुलित जलवायु, हरित वृक्षों और जैव-विविधता से युक्त पर्यावरण ही मानव सभ्यता के अस्तित्व की गारंटी है।

आज जब दुनिया प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, कचरा प्रबंधन की चुनौतियों और बढ़ते स्वास्थ्य संकटों से जूझ रही है, तब इस दिवस की प्रासंगिकता और भी बढ़ जाती है।

विश्व पर्यावरण स्वास्थ्य दिवस का उद्देश्य

  1. पर्यावरण और स्वास्थ्य के गहरे संबंध को उजागर करना।

  2. पर्यावरणीय खतरों के प्रति जागरूकता फैलाना।

  3. सतत विकास और हरित जीवनशैली को बढ़ावा देना।

  4. वैश्विक स्तर पर नीतियों और क्रियान्वयन की ओर ध्यान आकर्षित करना।

इस दिन का संदेश स्पष्ट है — स्वस्थ पर्यावरण = स्वस्थ जीवन

भारत और पर्यावरण स्वास्थ्य की स्थिति

भारत विश्व की सबसे तेज़ी से विकसित होती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, लेकिन पर्यावरणीय चुनौतियाँ भी यहाँ सबसे गंभीर हैं।

  1. वायु प्रदूषण

    • दिल्ली, लखनऊ, कानपुर और पटना जैसे शहर दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में गिने जाते हैं।

    • WHO की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में वायु प्रदूषण से हर वर्ष लगभग 10 लाख से अधिक लोगों की समयपूर्व मृत्यु हो जाती है।

  2. जल प्रदूषण और संकट

    • गंगा और यमुना जैसी नदियाँ औद्योगिक अपशिष्ट, सीवेज और प्लास्टिक प्रदूषण की चपेट में हैं।

    • ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता चुनौती बनी हुई है।

  3. अपशिष्ट प्रबंधन

    • भारत हर दिन लगभग 1.5 लाख टन ठोस कचरा उत्पन्न करता है, लेकिन उसका केवल 30-35% ही सही तरीके से पुनर्चक्रित या निपटाया जाता है।

    • प्लास्टिक प्रदूषण एक गंभीर खतरा है।

  4. जलवायु परिवर्तन का प्रभाव

    • असामान्य बारिश, सूखा, बाढ़ और चक्रवात अब सामान्य घटनाएँ बनते जा रहे हैं।

    • किसानों की आजीविका और खाद्य सुरक्षा पर इसका सीधा असर है।

विश्व दृष्टिकोण : पर्यावरण और स्वास्थ्य की वैश्विक चुनौतियाँ

  1. ग्लोबल वॉर्मिंग और जलवायु परिवर्तन

    • धरती का तापमान पिछले 100 वर्षों में लगभग 1.2 डिग्री सेल्सियस बढ़ चुका है।

    • ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन ने ग्लेशियरों के पिघलने और समुद्र-स्तर बढ़ने की समस्या को जन्म दिया है।

  2. हवा की गुणवत्ता

    • दुनिया की लगभग 90% आबादी प्रदूषित हवा में सांस ले रही है।

    • इससे श्वसन रोग, हृदय रोग और कैंसर जैसी बीमारियाँ बढ़ रही हैं।

  3. जल संकट

    • अफ्रीका और एशिया के कई हिस्सों में साफ पीने का पानी आज भी दुर्लभ है।

    • UNICEF के अनुसार, 2030 तक वैश्विक जल मांग आपूर्ति से 40% अधिक हो जाएगी।

  4. वन्यजीव और पारिस्थितिकी तंत्र पर खतरा

    • हर साल हजारों प्रजातियाँ विलुप्त हो रही हैं।

    • पर्यावरणीय असंतुलन महामारी जैसी आपदाओं को जन्म देता है (कोविड-19 इसका एक उदाहरण माना जाता है)।

पर्यावरणीय खतरों का स्वास्थ्य पर प्रभाव

  1. श्वसन रोग – दमा, ब्रोंकाइटिस, फेफड़ों का कैंसर।

  2. जलजनित रोग – हैजा, डायरिया, टाइफाइड।

  3. गर्मी और मानसिक तनाव – बढ़ता तापमान मानसिक स्वास्थ्य और शारीरिक थकान को प्रभावित करता है।

  4. कुपोषण – जलवायु परिवर्तन के कारण कृषि उत्पादन प्रभावित होता है।

  5. महामारी का खतरा – असंतुलित पारिस्थितिकी तंत्र नए-नए वायरस और बैक्टीरिया को जन्म देता है।

भारत में पर्यावरण स्वास्थ्य के लिए उठाए गए कदम

  1. स्वच्छ भारत मिशन – स्वच्छता और खुले में शौच से मुक्ति।

  2. राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) – 2024 तक 102 शहरों में वायु प्रदूषण को 20-30% तक कम करने का लक्ष्य।

  3. नमामि गंगे परियोजना – गंगा नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने का अभियान।

  4. प्लास्टिक प्रतिबंध – सिंगल यूज़ प्लास्टिक पर रोक लगाने की पहल।

  5. नवीकरणीय ऊर्जा – सौर और पवन ऊर्जा को बढ़ावा देना।

वैश्विक स्तर पर पहल

  1. पेरिस समझौता :  ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को सीमित करना।

  2. UN सतत विकास लक्ष्य (SDGs) – 2030 तक सभी देशों में पर्यावरणीय संतुलन और स्वास्थ्य को बढ़ावा देना।

  3. WHO का ‘हेल्दी एनवायरनमेंट’ कार्यक्रम – वायु, जल और मिट्टी प्रदूषण को नियंत्रित करने पर जोर।

  4. प्लास्टिक संधि (Global Plastics Treaty) – 2024 तक एक वैश्विक समझौते की दिशा में प्रयास।

हमें क्या करना चाहिए?

  1. व्यक्तिगत स्तर पर

    • सिंगल यूज़ प्लास्टिक का उपयोग बंद करें।

    • पौधे लगाएं और जल संरक्षण करें।

    • सार्वजनिक परिवहन, साइकिल या पैदल यात्रा को प्राथमिकता दें।

    • कचरे को अलग-अलग करके निपटान करें।

  2. समुदाय और संस्थागत स्तर पर

    • स्कूल और कॉलेजों में पर्यावरण शिक्षा को बढ़ावा देना।

    • उद्योगों को प्रदूषण नियंत्रण उपकरण लगाने के लिए बाध्य करना।

    • स्थानीय स्तर पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग और कचरा प्रबंधन को बढ़ावा देना।

  3. सरकारी और नीति स्तर पर

    • प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर कड़ी निगरानी।

    • हरित ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहन।

    • शहरी नियोजन में पर्यावरणीय मानकों का पालन।

स्वस्थ जीवन चिकित्सा सुविधाओं से ही नहीं संतुलित पर्यावरण से संभव

विश्व पर्यावरण स्वास्थ्य दिवस हमें चेतावनी देता है कि स्वस्थ जीवन केवल चिकित्सा सुविधाओं से संभव नहीं है, बल्कि स्वच्छ और संतुलित पर्यावरण से ही संभव है। भारत और विश्व को यह समझना होगा कि पर्यावरण की सुरक्षा में किया गया हर निवेश, स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था दोनों की सुरक्षा है।

यदि हम अभी से ठोस कदम उठाएँ — प्रदूषण नियंत्रण, स्वच्छता, वृक्षारोपण, नवीकरणीय ऊर्जा और जल संरक्षण — तो हम आने वाली पीढ़ियों को एक सुरक्षित, स्वच्छ और स्वस्थ पृथ्वी दे सकते हैं।

इसलिए आइए, 26 सितंबर को हम सब मिलकर यह संकल्प लें —

“स्वस्थ पर्यावरण, स्वस्थ जीवन — यही हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।”

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor