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Saturday, April 11, 2026, 10:23 pm

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पत्नी पूजा बोहरा ने हौसला बढ़ाया तो प्रमेंद्र बोहरा ने संकल्प लिया…स्वर्गाश्रम में फांवड़ा-झाड़ू चलाया, सोशल मीडिया पर ग्रुप बना राशि जुटाई, आज श्मशान स्वर्ग से कम नहीं नजर आता

मृत्युंजय सेवा संस्थान ने बदल दी सिवांची गेट श्मशान की सूरत…सर्व ब्राह्मण समाज ही नहीं छत्तीस कौम के लोगों को दाह संस्कार और दाह संस्कार के सामान की सुविधा उपलब्ध करवाई जाती है, आप स्वैच्छा से राशि जमा करवा सकते हैं, बंधन नहीं हैं…।
अस्थी बैंक, लकड़ी बैंक, बॉडी फ्रीज, अंतिम संस्कार की सामग्री, मृत्युशैय्या की सुविधा, सोलर लाइट, फव्वारा, गार्डन, बाल श्मशान, हैंडपंप, टांका,  कैशलैस भुगतान सुविधा से संस्थान ने अपनी जोधपुर में विशिष्ट पहचान बनाई…। 
प्रमेंद्र बोहरा पेशे से हाईकोर्ट में अधिवक्ता है…समाजसेवा का जुनून है…प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्व्च्छ भारत मिशन से प्रेरित होकर उन्होंने श्मशान की दशा और दिशा बदलने की ठानी। उनकी राह आसान नहीं थी, पत्नी ने टोका- या तो कदम बढ़ाओ मत, एक बार ठान लिया तो पीछे हटना मत…वो दिन और आज का दिन…बोहरा ने अपने संकल्प से सेवा का सपना सच कर दिखाया…। 

दिलीप कुमार पुरोहित. राखी पुरोहित. जोधपुर

9783414079 diliprakhai@gmail.com

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब स्वच्छ भारत मिशन का नारा दिया तो हाईकोर्ट में अधिवक्ता प्रमेंद्र बोहरा ने अपनी पत्नी पूजा बोहरा से कहा कि वे सिवांची गेट श्मशान के लिए कुछ करना चाहते हैं। पत्नी ने पूछा क्या?…प्रमेंद्र बोले- श्मशान में गड़ढ़े हैं, साफ-सफाई नहीं हैं, हरियाली नहीं हैं, सुविधाएं भी नहीं हैं…यह ऐसा स्थल है जहां अंतिम यात्रा के दौरान हर आम आदमी का यहां वास्ता पड़ता है…। मैं चाहता हूं कि सिवांची गेट श्मशान के लिए कुछ करूं…। पत्नी बोली- कैसे करोगे? प्रमेंद्र बोले- कुछ मित्रों को साथ लेकर हर रविवार को पहले सफाई अभियान चलाएंगे…फिर पैसे एकत्रित कर सुधार और सुविधाएं जुटाएंगे। पत्नी पूजा बोहरा को आइडिया पसंद आया पर उन्होंने कहा- एक बात ध्यान से सुन लो। या तो कदम बढ़ाना मत, एक बार कदम बढ़ाओ तो पीछे मत हटना। चाहे मित्रों और लोगों का सहयोग मिले या ना मिले, अपने संकल्प को तोड़ना मत। बस प्रमेंद्र ने ठान लिया उन्हें कुछ हटकर करना है। और वे फांवड़ा और झाडृू लेकर सफाई के लिए श्मशान पहुंच गए। अगली बार कुछ मित्र साथ आए। पर वे नियमित नहीं रह पाए। पर प्रमेंद्र ठान चुके थे और अकेले सेवा कार्य करते रहे। वे सफाई करते। गड्ढे भरते। जमीन समतल करते। फोटो साेशल मीडिया पर अपलोड करते और समाज के लोगों से अपील करते कि आर्थिक मदद करें। लोगों को उनका काम पसंद आने लगा।

आर्थिक मदद मिलती गई…सपनों को सच करने की राह निकलती गई…

प्रमेंद्र बताते हैं कि उनके कार्यों की समाज में चर्चा होने लगी। लोगों ने उनके जुनून काे सराहा। फेसबुक पेज बनाया। वाट्सअप ग्रुप बनाया। लोग आर्थिक मदद करने लगे। धीरे-धीरे अच्छी खासी राशि एकत्रित हो गई। 7 फरवरी 2015 को मृत्युंजस सेवा संस्थान बनाकर जो कार्य शुरू किया गया उसका 2019 में विधिवत पंजीयन हुआ।

ऐसे दिखाया जुनून…श्मशान में सौंदर्य-सुविधाएं जुटाकर अंतिम यात्रा की आसान

1-गार्डन : 1 गार्डन विकसित किए। 200 पेड लगाए।

2-कैमरे : 16 कैमरे लगाए।

3-गीता पाठ : दो साउंड लगाए गए हैं। नियमित रूप से गीता पाठ चलता रहता है।

4-अस्थी बैंक : श्मशान में अस्थी बैंक का कॉन्सेप्ट लाए। 68 अस्थियां रखने की सुविधा विकसित की। आधार कार्ड की प्रति लेकर दो चाबियां रखते हैं। एक संस्थान के पास और दूसरी मृतक के परिजनों के पास रहती है।

5-लकड़ी बैंक : संस्थान ने लकड़ी बैंक बनाया है। दाह संस्कार के लिए फ्री में लकड़ी उपलब्ध करवाते हैं। कोई स्वैच्छा से राशि देना चाहें तो दे सकते हैं।

6-मृत्युशैय्या की सुविधा : संस्थान की ओर से मृत्युशैय्या की सुविधा और दाह संस्कार के लिए सामग्री की सुविधा भी उपलब्ध करवाई जाती है।

7-टांका, हैंडपंप, सोलर लाइट, फंव्वारा, इनवर्टर, बाल श्मशान, बॉडी फ्रीज आदि सुविधा भी है।

8-कैशलैस भुगतान सुविधा उपलब्ध है।

कोरोना काल में की गई सेवा के लिए जिला, राज्य और समाजस्तर पर सम्मान : 

कोरोना काल में की गई सेवाओं और अब तक की गई सेवाओं के लिए प्रमेंद्र बोहरा और संस्थान के पदाधिकारियों का जिला, राज्य और समाज स्तर पर सम्मान किया जा चुका है।

मृत्युंजय सेवा संस्थान के सचिव प्रमेंद्र बोहरा और टीम जो ऊर्जा के साथ कार्यरत हैं : 

रमन बिस्सा : संरक्षक

रमेश कुमार जोशी : अध्यक्ष

उदय राज पुरोहित : वरिष्ठ उपाध्यक्ष

विमलेश कल्ला : वरिष्ठ उपाध्यक्ष

प्रमोद कल्ला : उपाध्यक्ष

एसपी हर्ष : उपाध्यक्ष 

संजय बोहरा : उपाध्यक्ष

दिलीप शर्मा : कोषाध्यक्ष

पुनीत छंगाणी : सह कोषाध्यक्ष

प्रमेंद्र बोहरा : सचिव

योगेश व्यास : सह सचिव

पंकज जोशी : सह सचिव

संस्थान को आर्थिक मदद इस प्रकार दे सकते हैं :

 

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor