अक्टूबर — दिसंबर 2025 तक चलने वाला यह अभियान, जिन अनक्लेम्ड राशियों का मालिकों को पता तक नहीं चलता, उन्हें उनके कानूनी उत्तराधिकारियों तक पहुंचाने का ऐतिहासिक प्रयास है।
पर इसमें कई खामियां भी है- जैसे यदि एक ही राशि पर एक से अधिक व्यक्ति दावा करें — कैसे होगा निपटारा?
अगर उत्तराधिकारी उचित कागजात नहीं पेश कर पाए — कैसे पता चले कि उनकी राशि अनक्लेम्ड पड़ी है?
कुछ मामलों में अनक्लेम्ड राशि पहले ही गलत व्यक्ति को दी जा चुकी हो तो — उनकी ऑडिट और ट्रैकिंग करना ज़रूरी होगा।
अनक्लेम्ड राशि से अलग, बहुत से लोग अचल संपत्ति (खेत, ज़मीन, हिस्सेदारी) में अपनी विरासत पा सकते हैं, जिनका कब्ज़ा भूमाफियाओं ने कर लिया हो। लेकिन इस अभियान का दायरा वित्तीय संपत्तियों तक सीमित है। सरकार भविष्य में भूमि / अचल संपत्ति के लिए “अंकुश संपत्ति अभियान” चलाने के बारे में विचार नहीं कर रही है, जबकि पूर्व में कई लोगों को जागीरदार में मिली भूमि, राजाओं द्वारा गांव के गांव दान में दिए गए जिनके उत्तराधिकारी अभी जीवित है, मगर उनकी भूमि पर भूमाफिया काबिज हो चुके हैं, ऐसे लोगों को जमीन दिलाने के बारे में सरकार निर्णय नहीं ले रही। यह भी संपत्ति एक प्रकार से अनक्लेम्ड ही होती है।
दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर
9783414079 diliprakhai@gmail.com
बहुत पहले नसीरुद्दीन शाह की एक फिल्म आई थी मालामाल… जिसमें उसके दादाजी 100 करोड़ की दौलत उनके नाम छोड़ गए थे, मगर दादाजी के उत्तराधिकारी का पता नहीं लग पा रहा था। फिर फिल्म में नसीरुद्दीन शाह के रूप में वित्तीय संस्थान काे उस बुजुर्ग के उत्तराधिकारी का पता लगता है और नसीरुद्दीन शाह की किस्मत चमक जाती है…यह तो हुई फिल्म की बात…मगर अब यह फिल्म साकार भी हो सकती है। क्योंकि सरकारी खजाने में 1.84 लाख करोड़ की राशि अनक्लेम्ड पड़ी है। देश में इस राशि के अनगिनत वारिस है मगर सरकार को पता नहीं है। अब सरकार अक्टूबर से दिसंबर 2025 तक एक कैंपेन चलाकर ऐसे उत्तराधिकारियों को मौका देगी कि वे अपने बुजुर्गों की राशि के लिए क्लेम करें।
देश भर में अक्टूबर — दिसंबर 2025 तक चलने वाला यह अभियान, जिन अनक्लेम्ड राशियों का मालिकों को पता तक नहीं चलता, उन्हें उनके कानूनी उत्तराधिकारियों तक पहुंचाने का ऐतिहासिक प्रयास है।
1. पृष्ठभूमि: कितनी राशि, कब से पड़ी है?
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केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यह जानकारी दी है कि देश में लगभग ₹1.84 लाख करोड़ की अनक्लेम्ड वित्तीय संपत्तियां विभिन्न बैंकों, बीमा कंपनियों, म्युचुअल फंड, पेंशन फंड और अन्य वित्तीय संस्थाओं के पास पड़ी हैं। The Economic Times+3The Times of India+3mint+3
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इनमें बैंक जमा खाते (सेविंग, चालू, सावधि जमा आदि), बीमा दावों (मृत्यु लाभ, maturity proceeds), डिविडेंड या शेयर लाभांश, म्युचुअल फंड बकाया, पेंशन बकाया आदि शामिल हैं। DD News+5mint+5DD News+5
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उदाहरण के लिए, केंद्रीय वित्त विभाग के डेटा अनुसार, अगस्त 2025 में ही ₹75,000 करोड़ से अधिक बैंक अनक्लेम्ड जमा राशि DEA Fund में स्थानांतरित हो चुकी थी। (बीमा प्राप्य ₹13,800 करोड़, म्युचुअल फंड बाकी) DD News
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इस प्रकार यह राशि आज अचानक नहीं पड़ी — यह कई वर्षों, दशकों से “उपेक्षित” रही है, क्योंकि खातों से लेन-देने नहीं हुए, दावों को नहीं भरा गया और लोग जानकारी या संसाधन न होने के कारण आगे कदम नहीं उठा पाए।
1.1 DEA Fund का इतिहास और नियम
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RBI ने वर्ष 2014 में “Depositor Education and Awareness (DEA) Fund Scheme” को अधिसूचित किया। Reserve Bank of India+3Reserve Bank of India+3Reserve Bank of India+3
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इस योजना के अंतर्गत, यदि किसी बैंक खाते (सेविंग, चालू, सावधि जमा आदि) में 10 वर्ष तक कोई गतिविधि न हुई हो (यानि वह “inoperative / inoperative + unclaimed” स्थिति में हो), तो वह राशि बैंक द्वारा DEA Fund को हस्तांतरित कर दी जाती है। lawrbit.com+5Reserve Bank of India+5Reserve Bank of India+5
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यह हस्तांतरण उस महीने के अंतिम कार्यदिवस पर किया जाता है जो उस खाते की 10 वर्ष की अवधि पूरी होने के अगले महीने आती है। Reserve Bank of India+2Reserve Bank of India+2
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महत्वपूर्ण — यह हस्तांतरण मूल राशि + उस पर जो ब्याज जमा हो चुका हो, वह सब शामिल होता है। pdicai.org+2Reserve Bank of India+2
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लेकिन यह बहुत जरूरी है: ये हस्तांतरित राशि गायब नहीं हो जाती, बल्कि RBI के नियंत्रण में सुरक्षित रखी जाती है। और दाता या उनके उत्तराधिकारी बाद में दावा कर सकते हैं। Reserve Bank of India+3Reserve Bank of India+3Business Standard+3
1.2 IEPF / Investor Education & Protection Fund का दायरा
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शेयर कंपनियाँ, म्युचुअल फंड्स, डिविडेंड, शेयर लाभांश और अन्य निवेशों में यदि पैसा सात (7) वर्षों तक दावा नहीं किया गया, तो वह Investor Education & Protection Fund (IEPF) को हस्तांतरित हो जाता है। Expertvuw+2mint+2
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निवेशक या उनके उत्तराधिकारी IEPF का दावा कर सकते हैं, बशर्तु वे ज़रूरी दस्तावेज़ और प्रक्रिया पूरी करें। mint+1
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उदाहरण के लिए, आर्थिक मीडिया रिपोर्ट है कि Reliance Industries के शेयरों में ₹11,000 करोड़ से अधिक राशि अभी IEPF में पड़ी हुई है, क्योंकि डिविडेंड या शेयर ट्रांसफर का दावा नहीं किया गया। The Economic Times
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इससे यह स्पष्ट होता है कि अनक्लेम्ड राशि सिर्फ बैंक जमा तक सीमित नहीं है — यह लगभग हर प्रकार के वित्तीय उत्पादों में हो सकती है, जहाँ दावों और लेन-देनों में सबलापन न रहा हो।
2. अब तक सरकार / RBI ने क्या किया — और क्यों उतना नहीं किया?
यह स्वाभाविक प्रश्न है: यदि यह राशि इतनी बड़ी है, तो अब तक कदम क्यों नहीं उठाए गए? आज क्यों यह खास अभियान?
2.1 अब तक की पहलों और उनकी सीमाएं
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RBI ने पहले से ही बैंक जमा की अनक्लेम्ड राशि के लिए DEA Fund को कानूनी आधार दिया, और इसे नियमित रूप से लागू किया। lawrbit.com+3Reserve Bank of India+3Reserve Bank of India+3
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बैंकों को निर्देश हैं कि खाते को “inoperative / dormant” घोषित होने पर उसे पुनः सक्रिय करने और आवश्यक KYC प्रक्रिया की सुविधा देनी चाहिए। (नए दिशानिर्देश 2025 में जारी किए गए) Sarthak Law+1
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RBI ने UDGAM portal (Unclaimed Deposits — Gateway to Access Information) शुरू किया है, ताकि व्यक्ति एक केंद्रीकृत पोर्टल पर अपने नाम से अनक्लेम्ड बैंक जमा की जांच कर सकें। CAalley+1
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मीडिया रिपोर्ट यह भी है कि अब RBI ने बैंकों को निर्देश दिए हैं कि अक्टूबर–दिसंबर 2025 की अवधि में विशेष रूप से अनक्लेम्ड जमा राशि वापस देने की प्रक्रिया तेज करें। The New Indian Express+1
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साथ ही, RBI एक नया “Scheme for Facilitating Accelerated Payout — Inoperative Accounts and Unclaimed Deposits” योजना लेकर भी आई है, ताकि खाते पुनर्जीवित किए जाएँ और दावों का निपटारा आसान हो। The Financial Express
2.2 लेकिन ये क्यों नाकाफी रहे?
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जागरूकता की गंभीर कमी: बहुत से लोग यह नहीं जानते कि उनके दादा-दादी या माता-पिता ने बैंक खाते या निवेश किए होंगे, या यदि थे, तो उनके दावों का क्या स्टेटस है।
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दस्तावेज़ी बाधाएँ: दावे के लिए मृत्यु प्रमाणपत्र, उत्तराधिकार प्रमाण, नाम हस्तांतरण, पहचान-पते का प्रमाण आदि चाहिए। कई परिवारों में दस्तावेज बिखरे या नष्ट हो चुके होते हैं।
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कानूनी और प्रशासनिक पेचिदगियाँ: यदि एक ही राशि पर कई लोग दावा करते हैं, विवाद हो जाता है। कार्यालयों में जांच, प्रमाण सत्यापन में समय लगता है।
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व्यापक दायरा: यह राशि केवल बैंकों में नहीं हैं — बीमा, म्युचुअल फंड, पेंशन, शेयर मालिकाना, डिविडेंड आदि में फैली है — इसके लिए अलग-अलग नोडल अधिकारी, अलग-अलग नियम, अलग-अलग दायित्व हैं।
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पूर्व में दावों की अनदेखी: ऐसे मामलों में, बैंक या निवेश कंपनियों ने कभी दावे दिलाने की पूरी पहल नहीं की।
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संसाधन और प्राथमिकता: अन्य वित्तीय नीतियाँ, नियामक दबाव, विभागीय संसाधन सीमित — ऐसी राशि को तुरंत वापस कराने पर पूर्व सरकारें शायद प्राथमिकता न दे सकीं।
इसलिए आज यह अभियान महत्वपूर्ण बिंदु है — जो वर्षों से पड़ी राशि को वापस लाने की दिशा में एक समन्वित प्रयास।
3. यदि एक ही राशि पर एक से अधिक व्यक्ति दावा करें — कैसे होगा निपटारा?
यह एक संवेदनशील मसला है, क्योंकि अक्सर परिवार में विभाजन, विवाद या अस्पष्टता होती है। इसे हम निम्न बिंदुओं में विचार सकते हैं:
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नामांकन (Nominee) / उत्तराधिकारों का पूर्व निर्धारण
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बैंक और वित्तीय उत्पादों में अक्सर “नामांकन” होता है — यानी अगर खाता धारक हिम्मतपूर्वक नामित व्यक्ति बताता है, तो मृत्यु की स्थिति में वह नामित व्यक्ति प्राथमिक दावेदार होता है।
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यदि नामांकन नहीं है या नामित व्यक्ति न हो, तो उत्तराधिकारी (legal heirs) दावे कर सकते हैं।
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उत्तराधिकारी प्रमाण और क्रम
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उत्तराधिकारी (बहुत बार वसीयत, उत्तराधिकार पत्र (Succession Certificate), परिवार प्रमाण पत्र, वारिस सूची आदि) की आवश्यकता होगी।
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यदि दो या अधिक लोग दावा करें — जैसे बेटे और बेटी — तो उन्हें सहमत होना होगा या कोर्ट / बैंक यह देखें कि कौन अधिक निकटतम कानूनी संबंधी है।
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बैंक/संस्था अपनी प्रक्रियाओं और कानूनों के अनुसार दावे की प्राथमिकता (जेंटरली कानूनी दस्तावेज, वारिसों की सूची) तय करेगी।
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विवाद और दावा अस्वीकृति
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यदि दावे में विवाद हो, बैंक/नियामक प्राधिकरण मामले को कानूनी या न्यायालयिक स्तर पर ले जा सकते हैं।
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यदि कोई व्यक्ति गलत दावा करता है या गलत दस्तावेज प्रस्तुत करता है, तो बैंक/संस्था सत्यापन प्रक्रिया के आधार पर दावा अस्वीकार कर सकती है।
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पिछले समय में वितरण हुआ हो — कैसे पता चले?
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यदि अनक्लेम्ड राशि पहले ही किसी व्यक्ति को वितरित हो चुकी हो — यह संभव है कि किसी गलत नामांकित व्यक्ति को राशि मिल गई हो — तो बैंक और प्राधिकरण को रिकॉर्ड (audit trail) का अग्नि परीक्षण करना चाहिए।
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यदि किसी को पहले दी गई राशि भ्रष्ट तरीके से दी गई हो, दावेदार उसे चुनौती दे सकते हैं, और बैंक/वित्तीय संस्थान को उसका जवाब देना होगा।
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इस पूरे अभियान के दौरान, असेट ट्रैकिंग और रिकॉर्ड मिलान की व्यवस्था की जा सकती है ताकि ऐसी गलत वितरण की पहचान हो सके।
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4. अगर उत्तराधिकारी उचित कागजात नहीं पेश कर पाए — कैसे पता चले कि उनकी राशि अनक्लेम्ड पड़ी है?
यह बहुत ही व्यावहारिक समस्या है। ऐसे मामलों में सरकार और वितीय संस्थाओं को विशेष सावधानी से काम करना होगा:
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UDGAM और अन्य पोर्टल खोज
जब व्यक्ति अपना नाम / PAN / आधार आदि विवरण UDGAM, बैंक पोर्टल या अन्य अनक्लेम्ड जमा सूची पर डालते हैं, वे यह देख सकते हैं कि किसी खाते में राशि पड़ी है। इस तरह उन्हें संकेत मिलता है कि उनके पूर्वजों की राशि कहीं पड़ी हो सकती है। CAalley+2mint+2 -
जागरूकता शिविर, जन सूचना अभियान
ग्राम स्तरीय, जिला स्तरीय अभियान आयोजित करने से लोग अपने पूर्वजों की वित्तीय जानकारी जाँच सकें। -
पता नहीं होने पर प्रक्रिया लचीलापन
यदि दावे करने वाले को मृतक की विस्तृत जानकारी न हो (खाता संख्या, शाखा आदि) — तो बैंक/संस्था को सहायक जांच करना चाहिए, जैसे बैंक रिकॉर्ड, पुराने पासबुक, बैंक शाखा आर्काइव, स्थानीय बैंक अधिकारी, पुराने पासबुक छाप आदि। -
मुकदमेबाजी से बचने के लिए अमन-वीर दस्तावेज
यदि ग्राहक मूल दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर पाए, तो बैंक/संस्था को बैकअप प्रमाणों (जैसे बैंक रिकॉर्ड, बैंक की शाखा प्रमाणित प्रमाणों, बैंक का internal audit trail) स्वीकार करने का लचीलापन देना चाहिए — बशर्तु मान्य सत्यापन हो सके। -
सरकारी हस्तक्षेप और वारंटी उपाय
इस अभियान के दौरान सरकार को यह निर्देश देना चाहिए कि जहां पूर्वजों की जानकारी कम हो, वहाँ भाषा सरल, कम दस्तावेज़ी बाधा प्रणाली अपनाई जाए।
5. अनक्लेम्ड राशि लौटाने की प्रक्रिया: कदम-दर-कदम
नीचे बैंक जमा राशि (DEA Fund) तथा निवेश / शेयर / IEPF से रिफंड प्रक्रिया का प्रस्तुतीकरण है:
5.1 बैंक / DEA Fund से दावा प्रक्रिया
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खातों की पहचान
– UDGAM पोर्टल या बैंक वेबसाइट/मोबाइल ऐप पर अपना नाम / PAN डालकर अनक्लेम्ड जमा देखें। CAalley+1
– बैंक शाखा में जाकर “unclaimed / inoperative accounts list” देखना। -
दावा पत्र / अनुरोध पत्र जमा करना
– बैंक की निर्धारित फॉर्म / आवेदन पत्र भरना।
– यदि मृतक हैं, तो उत्तराधिकारी / नामांकित व्यक्ति को मृतक का मृत्यु प्रमाणपत्र, उत्तराधिकार प्रमाण पत्र / वारिस सूची आदि जमा करना होगा। Reserve Bank of India+3State Bank of India+3Indian Bank+3 -
KYC दस्तावेज प्रस्तुत करना
– पहचान, पते, फोटो आदि।
– बैंक शाखा KYC सत्यापन करेगी। -
खाता पुनर्जीवित करना / राशि जारी करना
– बैंक खाते को चालू किया जाएगा।
– बैंक राशि + ब्याज (जह लागू हो) जारी करेगा। Reserve Bank of India+2Business Standard+2
– बैंक बाद में DEA Fund को उसी राशि का दावा करेगी। Business Standard+3Reserve Bank of India+3State Bank of India+3 -
विशेष स्थिति: बैंक अघटन
– यदि बैंक दिवालिया हो, तो दावे के लिए उसके Liquidator से संपर्क करना होगा और दी गई प्रक्रिया का पालन करना होगा। Reserve Bank of India+1
5.2 IEPF / निवेश से दावा प्रक्रिया
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IEPF जांच / खोज
– IEPF की वेबसाइट / कंपनियों की निवेश पोर्टल पर निवेशक नाम / PAN दर्ज करके यह देखें कि कोई बकाया राशि IEPF में पड़ी हो। mint+1 -
Form IEPF-5 और अभिकालीन प्रक्रिया
– IEPF-5 फॉर्म डाउनलोड करें और आवश्यक जानकारियाँ भरें। mint+1
– ओहदा बांड (Indemnity Bond), दावे का प्रमाण (जैसे शेयर प्रमाण पत्र, डिविडेंड वाउचर आदि) प्रस्तुत करें। mint+1 -
नोडल अधिकारी / RTA (Registrar & Transfer Agent) को जमा
– दावे और दस्तावेज कंपनी के नोडल अधिकारी या IEPF प्राधिकारी को भेजें। mint+1 -
प्रमाणीकरण और भुगतान
– IEPF अथॉरिटी जाँच करेगी और मान्यता मिलने पर धन राशि या शेयर रिफंड करेगी। Expertvuw+1
6. इस अभियान से अपेक्षित चुनौतियां और सवाल उठते हैं
नीचे उन महत्वपूर्ण शंकाओं और चुनौतियों का विवरण है जिनका सामना सरकार को करना पड़ सकता है:
6.1 दस्तावेजों का अभाव
कई मामलों में, उत्तराधिकारी मृतक के पासबुक, खाता नंबर, बीमा पॉलिसी दस्तावेज या निवेश प्रमाण पत्र नहीं पा सकते। इससे दावे विवादास्पद हो सकते हैं।
6.2 दावों की भीड़ और संसाधन दबाव
अक्टूबर — दिसंबर तक तीन माह में एक साथ लाखों दावों की प्रक्रिया करना बैंक, बीमा कंपनियों, IEPF सहित सभी संस्थाओं के लिए भारी दबाव लाएगा।
6.3 विवादित दावों की जटिलता
जब एक ही राशि पर कई दावे हों, परिवार अंतरविवाद हों, दस्तावेजों में विरोधाभास हों — तो न्यायालयिक दखल की ज़रूरत हो सकती है।
6.4 पहले की गलत वितरण की संभावना
कुछ मामलों में अनक्लेम्ड राशि पहले ही गलत व्यक्ति को दिए जा चुके हो सकते हैं — उनकी ऑडिट और ट्रैकिंग करना ज़रूरी होगा।
6.5 अभियान अवधि के बाद निष्क्रियता
यदि तीन महीने बाद भी दावों की मात्रा अधिक रह जाए तो क्या आगे की रणनीति होगी?
6.6 भू-संपत्ति (जमीन / जागीर / अन्य अचल संपत्ति) का मामला
आपने सही संकेत दिया — अनक्लेम्ड राशि से अलग, बहुत से लोग अचल संपत्ति (खेत, ज़मीन, हिस्सेदारी) में अपनी विरासत पा सकते हैं, जिनका कब्ज़ा भूमाफियाओं ने कर लिया हो।
लेकिन इस अभियान का दायरा वित्तीय संपत्तियों तक सीमित है।
सरकार को भविष्य में भूमि / अचल संपत्ति के लिए “अंकुश संपत्ति अभियान” चलाना चाहिए। खासकर-
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जागरूकता अभियान, पुराने रिकॉर्ड खोजना, पुराने खसरा / रजिस्ट्री रिकॉर्डों को डिजिटल करना,
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कब्जाधारियों के खिलाफ न्यायालयिक कार्रवाई,
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गांव स्तर पर दल बैठाना ताकि गांवों में यह जानकारी पहुंचे।
यह एक अगला स्तर हो सकता है, लेकिन फिलहाल केंद्रीय योजना वित्तीय अनक्लेम्ड संपत्तियों पर केन्द्रित है।
7. सरकार का संदेश : आपकी पूंजी, आपके अधिकार
इस अभियान का मूल मंत्र है — आपकी पूंजी, आपके अधिकार। बहुत से परिवारों में लोग अनजाने में अपनी (पूर्वजों की) जमा राशि और निवेशों के हक़दार हैं, मगर सूचना अभाव, दस्तावेज़ समस्या या जटिल प्रक्रिया की वजह से वे हक नहीं पा सके। यह तीन महीने का विशेष अभियान (अक्टूबर–दिसंबर 2025) एक सुनहरा अवसर है कि सरकार, RBI, बैंक, बीमा कंपनियां और अन्य संस्थाएँ मिलकर इस धन को सही मालिकों तक पहुंचाने का प्रयास करें। लेकिन सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि अभियान जमीन पर कैसे चले — चाहे वह ग्राम स्तर पर जागरूकता हो, बैंक शाखाओं की तत्परता हो, दावे स्वीकार्यता की लचीलापन हो या विवाद मामलों का त्वरित निपटान हो।









