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Friday, July 10, 2026, 5:42 am

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एमजीएच में मानवता की रसोई शुरू; राष्ट्र संत चंदप्रभ सागर बोले- रोटी खुद के लिए बने तो स्वाद, दूसरो के लिए बने तो परमार्थ की होगी

निर्मल गहलोत चैरिटेबल फाउंडेशन और अदम्य चेतना ट्रस्ट की ओर से शुक्रवार सुबह 11:30 बजे राष्ट्र संत चंद्रप्रभ सागर ने रिबन खोलकर किया उद्घाटन। मंत्रोच्चार और नारियल फोड़कर अन्नदेवता का किया आह्वान। एमजीएच करेगा लाइट-पानी की व्यवस्था।
निर्मल गहलोत की ओर से दी गई 11 लाख रुपए की सहयोग राशि। उद्घाटन समारोह में अदम्य चेतना ट्रस्ट की अध्यक्ष डॉ. तेजस्विनी अनंत कुमार, केबिनेट मंत्री जोगाराम पटेल, एमजीएच अधीक्षक डॉ. फतेहसिंह भाटी, राजेंद्र राठी, मधु विश्नोई, तरुण गहलोत, डॉ. निर्मल गहलोत के पिताजी और चाचाजी सहित कई गणमान्य लोग मौजूद थे।   

दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर

9783414079 diliprakhai@gmail.com

राष्ट्र संत चंद्रप्रभ सागर महाराज ने शुक्रवार को सुबह 11:30 बजे महात्मा गांधी अस्पताल में मानवता की रसोई कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह में कहा कि आज का यह दिव्य कार्यक्रम मानवता की रसोई का शुभारंभ करते हुए प्रसन्नता हो रही है। आप सभी ऐसे दिव्य कार्य के साक्षी और सक्रिय सहयोगी बन रहे हैं जिससे इंसानीयत की सेवा संपन्न हो पाएगी। अभी आप जिस स्थान पर बैठे हैं वह मानवता का चलायमान मंदिर है। अन्य मंदिर में लिंग भेद हो सकता है है। हो सकता है जाति-पंथ व परंपरा को महत्व दिया जाता हो मगर मानवता की रसोई में न पंथ पूछा जाएगा, न जाति-धर्म पूछा जाएगा। केवल भूखा पेट ही पूछा जाएगा। पूजा सेवा के रूप में होगी। जो समर्पण होगा वह हमारे द्वारा दिया जाने वाला प्रेम, दया, करुणा, समानता और वह तत्व होगा, जिसके जरिए हम कह सकते हैं कि माधव व महावीर ही नहीं यह मानवता की सेवा की है। मानवता की सेवा का अर्थ है मानव सेवा। मंदिर बनाना हिंदुओं, जैनियों, मस्जिद बनाना मुसलमान, गिरजा बनाना ईसाइयों का काम है, गुरुद्वारे बनाना सिखों का काम है मगर मानव होकर मानव के काम आना यह हर मानव का काम है। मानवता की पहली सीढ़ी अन्नदान से प्रारंभ होती है। आप और हम मानवता की सेवा कर रहे हैं। जोधपुर वह धरती है जहां का हर इंसान हो चाहे कायलाना की तरफ जाकर या भीम भड़क जाकर बंदर, श्वान, गायों की सेवा करता है, यह मारवाड़ और जोधपुर को ही इसका श्रेय जाता है।

घर का दीप घर को रोशन करता है, बाहर का दीप राहगीरों को राह दिखाता है :

संत चंदप्रभ सागर ने कहा कि जब वे बालक थे तो संत बनने से पहले दीपावली पर थाली में दीप सजाते थे। मां कहती थी कि दो दीप घर के बाहर भी धर देना। मैं कहता मां दीप तो हम लक्ष्मी पूजा के लिए जलाते हैं। लक्ष्मी घर के अंदर आती है। फिर बाहर दीप क्यों? मां कहती बेटा अंदर दीप अपने लिए और बाहर दीप हम राहगीरों के लिए जलाते हैं। बचपन में जब मां खाना बनाती थी तो पहली दो रोटी गाय की और अंतिम दो रोटी श्वान के लिए बनाती थी। यह जन्म के संस्कार हैं। आज शहरों में गायें नहीं हैं। मगर मानवता की रसोइयां खोलकर हम सेवा की कमी पूरी कर सकते हैं। आज अगर अमीर भाई गरीब का पेट भरता है तो यह बहुत बड़ी सेवा है। अमीर अगर दूसरों की गरीबी को दूर करता है तो भारत के विकास में मदद हो सकती है। अन्नदान बड़ा ही पवित्र काम है। अन्नदान से सुकून मिलता है। अंतरमन को शांति मिलती है। संत ने कहा कि खुद के लिए रोटी बनाओगे तो स्वाद कहलाएगा और दूसरों के लिए बनाओगे तो परमार्थ कहलाएगा।

सोना कितना ही इकट्‌ठा कर लो भूख रोटी से मिटती है :

संत ने कहा कि सोना कितना ही इकट्‌ठा कर लो लेकिन आदमी खाता तो रोटी ही है। भूख तो अन्न से मिटती है। भूख से बढ़कर कोई दर्द नहीं होता। सेवा से बढ़कर कोई कर्म नहीं होता है और भूखे को खाना खिलाने से बढ़कर कोई धर्म नहीं होता।

रवींद्रनाथ टैगोर की कहानी का सार बताया :

संत ने कहा कि रवींद्रनाथ टैगोर की एक कहानी है-एक राजा ने ज्योतिष से पूछा-मेरी मंशा कब पूरी होगी। ज्योतिष ने कहा आज जब महल से निकलो तो पहला आदमी जो मिले उससे कुछ मांग लेना। अगर वो अपनी मर्जी से कुछ देता है तो तुम्हारी मंशा पूरी हो जाएगी। राजा महल से निकला रथ पर सवार होकर यह सोचकर कि कोई पहला आदमी मिलेगा उससे मांगूंगा। उधर एक भिखारी भी घर से निकला। भिखारी के सामने राजा की सवारी आ रही थी और राजा के सामने भिखारी आ रहा था। राजा सोच रहा था भिखारी से कुछ मांगूंगा और भिखारी खुश था कि आज राजाजी उन्हें काफी कुछ देंगे। मगर राजा ने भिखारी को कुछ देने की बजाय उलटा भिखारी से भिक्षा मांग ली। बड़े ही उखड़े मूड से भिखारी ने चार दाने चावल के राजा को भीख में दे दिए। इस तरह भिखारी इधर-उधर से भीख मांग कर कुछ चावल भीख में लाकर घर आकर अपनी पत्नी को देता है। पत्नी जब उन चावलों को पात्र में इकट्‌ठे करती है तो चार दाने चावल सोने के बन जाते हैं। भिखारी की पत्नी जब भिखारी को बताती है तो भिखारी की समझ में आता है कि राजा को जो उसने चार दाने भीख में दिए थे वह सोने के बन गए हैं। उसे पछतावा होता है कि उसने कंजूसी क्यों कि, सारे दाने राजा को भीख में क्यों नहीं दिए? ऐसा करता तो उसके सारे चावल सोने के बन जाते। इस कहानी का सार यह है कि आप किसी को अन्न के चार दाने भी देते हैं तो कई गुना होकर फल मिलता है। अगर आप बंदूक से गोली दागोगे तो हजारों फीट जाएगी। तोप से गोला दागोगे तो 5 हजार फीट जाएगा। और अगर भूखे को खाना खिलाओगे तो बैकुंठ तक आपको ले जाएगा।

आपका स्नेह मुझे ऊर्जा देती है, मानवता की रसोई पुण्य का काम है : डॉ. तेजस्विनी अनंत कुमार 

अदम्य चेतना ट्रस्ट की अध्यक्ष डॉ. तेजस्विनी अनंत कुमार ने कहा कि आपका स्नेह मुझे ऊर्जा देती है। बीस साल से मेरा जोधपुर आना चल रहा है। भारत के मैप में जोधपुर के बारे में सुना था। यहां आकर वाकई सुकून मिला और अच्छा लगा। जोधपुर में रसोई बनाने की अनंत कुमार जी ने वर्षों पहले स्वीकृति दी थी। आपका स्नेह मिलने लगा है। 20 सालों से  219 स्कूलों में 42 हजार बच्चों को खाना दे रहे हैं। बहुत सारे लोग जुड़े हुए हैं। 23 साल से बैंगलुरु में भी योजना चल रही है। वहां ग्रीन कॉन्सेप्ट चल रहा है। जीरो वेस्ट से काम चल रहा है। कंपोस्ट भी बनती है। चावल धोते हैं उसका पानी उपयोग कर हर संडे पौधे लगाते हैं। अनंत कुमार जी ने ही यह कार्यक्रम शुरू किया था। वर्कशॉप सेमिनार चलते रहते हैं। हमें स्वच्छ भारत बनाना है। अनंत प्लेट बैंक भी चलता है। आज का यह कार्यक्रम मानवता का विशेष संदेश देने के लिए है। मानवता की रसोई से मरीजों और उनके परिजनों को निशुल्क भोजन मिल सकेगा। यह मानवता की सच्ची सेवा होगी।

सांसारिक जीवन में संतों का आशीर्वाद जरूरी है : मंत्री जोगाराम पटेल

राजस्थान सरकार के कैबिनेट मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि राष्ट्र संत चंद्रप्रभ महाराज का हमेशा आशीर्वाद मिलता है। कलियुग में संतों का आशीर्वाद जरूरी है। वर्तमान सांसारिक जीवन में हम कहां जा रहे हैं यह सोचनीय है। 2006 में जब अनंत कुमार जी विराजते थे। राजस्थान में वसुंधरा राजे की सरकार थी। मिड डे मिल योजना शुरू की। मैं लूणी विधायक था। वसुंधरा राजे की अनंत जी से वार्ता हुई। राजेंद्र जी हमारे नजदीक थे। तय हुआ राजस्थान में भी अदम्य चेतना की शाखा शुरू की जाए। पाल गांव व चौखा के बीच में अदम्य चेतना ने रसोई शुरू की। उन्होंने कहा कि मानवता की रसोई में मरीजों और परिजनों को निशुल्क भोजन मिल सकेगा, यह वाकई सच्ची सेवा होगी। भूख से मुक्ति मिलेगी और मरीजों और उनके परिजनों को घर जैसा खाना मिलेगा। जब किसी का परिजन भर्ती होता है तो उसे परेशानी होती है। वह सोचता है कि नजदीक में खाना कहां मिलेगा? लेकिन जब यहां निशुल्क भोजन और सात्विवक भोजन मिलेगा तो उसके मन को प्रसन्नता होगी। इसके लिए निर्मल जी गहलोत की जितनी प्रशंसा की जाए कम है।

डॉ. निर्मल गहलोत ने अतिथियों का परिचय करवाया : 

आरंभ में कार्यक्रम का संचालन करते हुए डॉ. निर्मल गहलोत ने अतिथियों का परिचय करवाया। उन्होंने राष्ट्र संत संत चंद्रप्रभ सागर, अदम्य चेतना ट्रस्ट की राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. तेजस्वनी अनंत कुमार, केबिनेट मंत्री जोगाराम पटेल, महात्मा गांधी अस्पताल के अधीक्षक डॉ. फतेहसिंह भाटी, मधु विश्नोई, राजेंद्रसिंह राठी, डॉ. निर्मल गहलोत के पिताजी व चाचाजी तथा छोटे भाई तरुण गहलोत के साथ सभागार में मौजूद डॉक्टरों, प्रबुद्ध नागरिकों, नर्सिंग स्टाफ, शहर के गणमान्य लोगों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि उम्मेद अस्पताल में निशुल्क रसोई की सेवा तीन माह पहले शुरू की थी। अच्छा आयोजन रहा। मरीजों-परिजनों को सेवा का लाभ मिल रहा है। 365 दिन मरीज और परिजन सेवा का लाभ उठा रहे हैं।  लोग जुड़े हैं। प्रकल्प से लोगों का जुड़ाव रहा है। अदम्य चेतना ट्रस्ट ने उम्मेद क्लब के पास सामूहिक किचन में भोजन बनाना शुरू किया है।  अंनंत कुमार जी के निर्देशन में 20 साल पहले स्कूलों में मिड डे मील शुरू हुआ था। यह निशुल्क दूसरी रसोई है। मानवता की रसोई में जन्म दिन, पुण्य तिथि, शादी की साल गिरह आदि पर 51000 एक दिन की राशि जमा करवा कर भोजन करवाया जा सकता है। कुछ लोग हर महीने राशि देकर सेवा दे सकते हैं। अब यह योजना आत्मनिर्भर बन गई है। अदम्य चेतना ट्रस्ट के जोधपुर स्टाफ और जनता का भरपूर सहयोग मिल रहा है।

शुद्ध सात्विक भोजन : 350-400 लोग होंगे लाभान्वित

एमजीएच स्थित किचन के पास बनी मानवता की रसोई में प्रतिदिन दोपहर 2 बजे 350 से 400 लोगों को भोजन करवाया जाएगा। इसमें मरीज और उसके परिजन शामिल होंगे। भोजन निशुल्क करवाया जाएगा। भोजन पूरी तरह  सात्विक होगा। निर्मल गहलोत चैरिटेबल ट्रस्ट और अदम्य चेतना ट्रस्ट की ओर से सामाजिक सरोकार के रूप में यह पहल की गई है। इसके लिए निर्मल गहलोत ने 11 लाख रुपए का सहयोग किया है। ट्रस्ट के निर्मल गहलोत ने बताया कि दूर-दराज से आने वाले मरीजों के परिजनों को शुद्ध सात्विक भोजन उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से यह मानवता की रसोई शुरू की गई  है।। संख्या अधिक हुई तो उनके भोजन की व्यवस्था की जा सकती है।

ये होगा मैन्यू : सप्ताह में दो दिन मिठाई भी मिलेगी

एक सब्जी, दाल या कढ़ी, चावल या खिचड़ी और रोटी की सेवा की जाएगी। भोजन अदम्य चेतना की रसोई में बनकर तैयार होगा। सप्ताह में दो दिन मिष्ठान भी दिया जाएगा। एमजीएच के अधीक्षक फतेहसिंह भाटी ने बताया कि ट्रस्ट की इस पहल का हम स्वागत करते हैं। अस्पताल प्रशासन की ओर से जगह के साथ लाइट और पानी की व्यवस्था की जाएगी।

हाथों हाथ कई लोगों ने सहयोग की घोषणा की : 

राष्ट संत चंद्रप्रभ सागर ने घोषणा की कि संबोधि धाम की ओर से पहली आहूति दी जा रही है और संबोधि धाम साल भर के लिए राशि उपलब्ध करवाएगा। इसी तरह संत के आह्वान पर सहयोग करने वालों की झड़ी लग गई। एचडी सलूजा, राजेश सांखला, सुरेश गोयल, देवेंद्र विश्नोई, राकेश दवे, वरुण धनाडिया, विक्रमसिंह गहलोत, राजेंद्र राठी, डॉ. विभा भूत, शिखर भंडारी, रामस्वरूप अग्रवाल, सांवलसिंह सांखला, नरपतसिंह सांखला, दीपक सांखला, विनोद वैष्णव, तेज कंवर सांखला, मनोहर टाक, रविंद्रसिंह राजपुरोहित, परिणति विश्नोई, हेल्पिंग पीपल ट्रस्ट, गीता लालवानी, रजत गौड़ लाल बूंद जिंदगी, कुसुम कच्छवाह, देविकान विशन, मदन लोहिया, स्वरूप सोलंकी, पूनम पोहानी, प्रदीप ओझा, सिद्धार्थ अग्रवाल, छगन प्रजापत, अशोक शर्मा, प्रकाश गहलोत, रमेश सारस्वत, अश्विनी, पुखराज, मेड़तिया स्वीट, जयसिंह गहलोत, बाबूजी मिठाई वाला, बद्रीनारायण हर्ष, उमेश लीला, जियो और जीने दो के महावीर कांकरिया, सुरेश गोयल, सुरेश व्यास, मनीष बोरडिया, राधेश्याम रंगा सहित अन्य लोगों ने सेवा के इस काम में हाथ बंटाने का संकल्प लिया।

डॉ. निर्मल गहलोत को “समाज रत्न” की उपाधि दी

इस मौके पर राष्ट्र संत ने सबकी सहमति से घोषणा की कि डॉ. निर्मल गहलोत को समाज रत्न की उपाधि से विभूषित किया जाता है। उन्होंने कहा कि वे चाहते हैं कि मानवता की सेवा करने वाले निर्मल भाई को गले लगाएं। संत ने कहा कि निर्मल गहलोत ने शिक्षा का उजास फैलाने के साथ ही धर्म और राम के काम के साथ-साथ-साथ चिकित्सा, सेवा और मानवता की बड़ी सेवा की है। आगामी 13 दिसंबर को एक वार्ड के गोद लेने का कार्यक्रम है।

 

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor