आपका जीवन पथ हजार आशाओं का दीप…
आज के इस पावन दिन पर,
जब समय की धारा वर्षों की सीढ़ियां चढ़कर
आप दोनों को फिर से एक नए मुकाम पर खड़ा करके मुस्कुरा रही है,
मैं एक कविता नहीं—
एक जीवन-गाथा लिख रहा हूं।
क्योंकि भाईसाहब सुरेशजी राठी और भाभीजी श्रीमती शशिजी राठी का साथ
सिर्फ वैवाहिक बंधन नहीं,
मानव-जीवन के श्रेष्ठ आदर्शों की दीप्त यात्रा है।
संघर्ष से उठती एक रोशनी
कहते हैं, भाग्य उसे ऊपर उठाता है
जो स्वयं का मूल्य पहचानता है ।
और सुरेश राठी जी—
आपने अपने जीवन से इस सत्य को सिद्ध किया।
संघर्ष की धूप में तपकर,
कठिनाई की रातों में जागकर,
जिम्मेदारियों की चट्टानों पर चढ़कर
आपने अपने आत्मबल की ज्योति जगाई।
आपको जन्म देने वाली
स्वर्गीय माता गोदावरीजी देवी…
जिनके आशीर्वचनों की सुगंध अब भी
आपकी हर सफलता में महकती है।
और पिता स्व. नंदकिशोरजी राठी…
जिनकी सीखें आपके स्वभाव में
ईमानदारी और दृढ़ता के दीप की तरह जलती रहती हैं।
यही कारण है कि संघर्ष आपके लिए
कभी बोझ नहीं बना—
वह तो आपका गुरुकुल था।
वही संस्कार, वही अनुशासन, वही तप—
जिनसे आज आप कर्मयोगी सुरेश जी राठी बने।
कर्मदाता—वह हाथ जिन्होंने आकार दिया
जीवन में कुछ रिश्ते रक्त के साथ-साथ,
कर्म से भी जन्म लेते हैं।
आपके बड़े भाई श्री आनंद जी राठी—
केवल भाई नहीं, मार्गदर्शक, संरक्षक, सहारा।
और भाभीजी स्व. सुमनजी राठी—
जिनकी ममता और प्रेरणा
आपके व्यक्तित्व में चुपचाप रची-बसी है।
इन दोनों ने आपके जीवन में
जब भी पथ कठिन हुआ—
अपने कंधे, अपनी सीखें, अपना स्नेह दिया।
वे सिर्फ रिश्ते नहीं,
एक कर्मदाता ऊर्जा हैं
जिन्होंने आपको हर बार
गिरने से पहले थाम लिया,
और उठने के बाद आगे बढ़ना सिखाया।
अन्नदाता—सहयोग की वह धारा जो थमती नहीं
आज आपका व्यवसाय विशाल है,
समृद्ध है, सुव्यवस्थित है।
पर आप कभी भूलते नहीं
उन हाथों को जो आपको प्रतिदिन ऊर्जा देते हैं—
आपके व्यावसायिक साझेदार
और आपके समस्त स्टाफ।
वे ही आपके “अन्नदाता” हैं—
क्योंकि व्यवसाय पेट भी भरता है
और सपने भी।
और आपने हर सहयोग को
सम्मान, समानता और संवेदना से सजाया।
भविष्यदाता—नई पीढ़ी की खिलती हुई कलियां
जीवन की सबसे मीठी शाखाएं
हमेशा अगली पीढ़ियों में खिलती हैं।
और आपके जीवन के ये भविष्यदाता—
सौरभ, वर्षा, अनायशा, अयांश राठी,
सुरभि, रोहित, समर्थ, वियांश मोहता—
ये सिर्फ परिवार के नाम नहीं,
आपकी आशाओं, प्रयासों, संवेदनाओं
और संस्कारों की जीवित प्रतिमाएं हैं।
आपने उन्हें वही दिया
जो आप स्वयं बने—
संस्कारों के धनी,
कर्म के ध्वजवाहक,
दया के धारक,
और ईश्वरीय आश्रय में जीने वाले संतुलित मानव।
मार्गदर्शक—धर्म, ज्ञान और प्रेम के पथप्रदर्शक
जीवन की यात्रा में
जो हमें सोचने, समझने और सजने का अवसर दें—
वे ही मार्गदर्शक होते हैं।
डॉ. फूलकौर जी–स्व. श्री कुशालचंद जी मूंदड़ा,
स्व. पुष्पा जी–श्री मदनलाल जी मूंदड़ा,
तारा जी–श्री रवि मंत्री जी,
(आपकी बहन-बहनोई)
इन सभी ने आपका जीवन समृद्ध किया—
कभी प्रेरणा से,
कभी सलाह से,
कभी अपने आत्मीय स्नेह से।
आपके जीवन को इनका स्पर्श
एक पवित्र सौहार्द देता है—
और यह कविता उसी का विस्तार है।
श्री सुरेश जी राठी—एक चार्टर्ड अकाउंटेंट, एक उद्यमी, एक दानदाता
आपका पेशा—
चार्टर्ड अकाउंटेंसी,
जहां जिम्मेदारी का हर सूत्र
ईमानदारी की डोरी से बंधता है।
और यह डोरी आपके हाथों में
किसी मंत्र की तरह पवित्र है।
आज आपका व्यवसाय विस्तृत है,
लेकिन उससे अधिक विस्तृत
आपका हृदय है—
क्योंकि आप केवल सफल नहीं,
आप दानदाता भी हैं।
दान—धन से नहीं,
मन से होता है।
और आपने दोनों से दिया।
आपकी सोच ईश्वर की एक रेखा की तरह है—
जो हर दुख में सांत्वना,
हर जरूरत में सहायता,
और हर अभाव में भरपूरता देती है।
गुरु—संत कबीर की वाणी का प्रकाश
जीवन के मार्ग पर
आपने संत कबीर को अपना गुरु माना।
कबीर की सीखें—
सादगी, सत्य, संतोष—
आपके व्यक्तित्व में ऐसे बस गईं
जैसे दीपक में बाती।
आपके हर निर्णय में
कबीर का एक दोहा छिपा मिलता है।
आपके हर कर्म में
कबीर की एक झलक दिखती है।
आपकी हर सफलता में
कबीर की करुणा सुनाई देती है।
दाता—भगवान श्रीकृष्ण
जीवन में दाता आपने
श्रीकृष्ण को माना—
जिन पर आपकी भक्ति
और विश्वास
जैसे किसी शांत नदी का प्रवाह।
कृष्ण की मुरली की धुन
आपके विचारों में गूंजती है—
और उसी धुन में
आप जीवन का संतुलन रचते हैं।
आपकी रुचियां — यात्रा, साहित्य और सत्संग
आपको घूमना पसंद है—
क्योंकि आपको लगता है
कि दुनिया सिर्फ जगहों से नहीं,
विचारों से भी बनी है।
अच्छा साहित्य पढ़ना और सुनना
आपकी आत्मा का भोजन है।
और सत्संग—
वह तो आपके लिए
परमआनंद की अनुभूति है।
जीवन का उद्देश्य — संतुलन, सेवा और स्वाध्याय
आपका दृष्टिकोण साधारण नहीं।
आप कहते हैं—
“मनुष्य को अपने व्यक्तिगत, पारिवारिक,
सामाजिक और व्यावसायिक जीवन में
संतुलन बनाकर जीना चाहिए।”
और आपका जीवन इस विचार की
सजती हुई मूर्ति है।
और इस सबके बीच—शशि जी राठी
शशि जी—
आप वह धरती हैं
जिस पर यह पूरा जीवन-वृक्ष खड़ा है।
आपकी मौन शक्ति,
आपकी सहजता,
आपका स्नेह,
आपका साथ—
इनसे ही यह यात्रा पूर्ण होती है।
आप वह मुस्कान हैं
जिससे हर संघर्ष आसान हो जाता है।
आप वह धैर्य हैं
जिससे प्रत्येक निर्णय सही बन जाता है।
आप वह प्रकाश हैं
जिससे घर, परिवार और संबंधों में
सौहार्द का सूर्योदय होता है।
दोनों का मिलन—जीवन का संयमित संगीत
आप दोनों की शादी
दो आत्माओं का मिलन ही नहीं,
दो संस्कृतियों,
दो दृष्टिकोणों,
दो सपनों,
और दो जीवन-दर्शन का ऐसा संगम है
जिसने वर्षों से एक उदाहरण गढ़ा है।
आपका साथ—
एक वृंदावनी राग की तरह मधुर,
एक छाया की तरह शांतिदायी,
और एक दीपक की तरह मार्गदर्शक है।
समर्पण
आज आपकी शादी की यह वर्षगांठ
केवल एक तारीख नहीं—
यह उस तप, त्याग, प्रेम, संतुलन,
भक्ति और संबंधों की यात्रा का उत्सव है
जिसे आपने मिलकर पूर्णता दी।
आप दोनों को—
इस दिव्य बंधन,
इस स्नेह-यात्रा,
इस आलोकमय जीवन
और इस संतुलित परिवार के लिए
असीम शुभकामनाएं।
आपका संग,
आपका प्रेम,
आपका त्याग—
यूं ही युगों-युगों तक
प्रकाश देता रहे।





