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Sunday, October 25, 2026, 2:15 pm

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मुट्‌ठी भर तावड़ो : सतसैया के दोहरे, ज्यों नावक के तीर। देखन में छोटे लगे, घाव करे गंभीर ।।

मुटठी भर तावड़ो : म्हारी नज़र में

एनडी निंबावत “सागर”, एडवोकेट-वरिष्ठ कवि, साहित्यकार

वरिष्ठ पत्रकार, कवि एवं संपादक दिलीप कुमार पुरोहित रौ मायड़ भासा राजस्थानी में बाल कवितावां रौ काव्य संग्रै मुट्‌ठी भर तावड़ो री सगळी कवितावां छोटी होती थकां आपरौ गैरो प्रभाव छोड़े है । आं कवितावां ने पढ़ता वगत ब्रज भासा रा चावा कवि बिहारी लाल चौबे रौ ओ दूहो जो घणो चावो है,
सतसैया के दोहरे, ज्यों नावक के तीर ।
देखन में छोटे लगे, घाव करे गंभीर ।।
याद आग्यो । दिलीप जी री ए टाबरां सारू लिखियोड़ी कवितावां थोड़ा सबदां में गैरी बात कै देवे । 40 कवितावां रै इण काव्य संग्रै री पैलोड़ी कविता ही इण काव्य संग्रै रै शीर्षक मुटठी भर तावड़ो सुं सुरु व्ही है । इण काव्य संग्रै री ऐक ऐक कविता अलगे-अलगे विषयां रै माध्यम सूं लूंठो संदेस देवै है, जिणमें सामाजिक परिवेस, देस भगति, परियावरण संरक्षण, अर हिम्मत बधावण वाळी कवितावां तो घणी हांतरी है । आज जेठे मायड़ भासा नै मान्यता सारू परयास लगो लग व्है रिया है उणमें श्री दिलीप कुमार पुरोहित रो औ मायड़ भासा में रचियोडी कवीतावां रौ संग्रै मुट्ठी भर तावड़ो बोत ही महताऊ पौथी साबित व्हैला ऐड़ो म्हारौ विसवास है । मैं छोटो भाई दिलीप कुमार पुरोहित नै घणा मानसुं बधाई देवुं ।

एनडी निम्बावत “सागर”
लेखक, कवि, शायर, गीतकार
जोधपुर (राज.)

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor