मुट्ठी भर तावड़ो : सतसैया के दोहरे, ज्यों नावक के तीर। देखन में छोटे लगे, घाव करे गंभीर ।।
मुटठी भर तावड़ो : म्हारी नज़र में एनडी निंबावत “सागर”, एडवोकेट-वरिष्ठ कवि, साहित्यकार वरिष्ठ पत्रकार, कवि एवं संपादक दिलीप कुमार पुरोहित रौ मायड़ भासा राजस्थानी में बाल कवितावां रौ काव्य संग्रै मुट्ठी भर तावड़ो री सगळी कवितावां छोटी होती थकां आपरौ गैरो प्रभाव छोड़े है । आं कवितावां ने पढ़ता वगत ब्रज भासा रा चावा … Read more