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Saturday, January 24, 2026, 1:13 am

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‘स्वदेशी संकल्प दौड़’ का आयोजन 12 जनवरी को

स्वामी विवेकानंद की जयंती राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाएगा

शिव वर्मा. जोधपुर
स्वामी विवेकानंद की जयंती, जिसे 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है, भारत के लिए गहरे राष्ट्रीय और सभ्यतागत महत्व का दिन है। यह उन विचारों का पुनः स्मरण है, जो भारत के युवाओं को राष्ट्र-निर्माण, चरित्र-निर्माण और आत्मनिर्भर विकास की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान कर सकते हैं। स्वामी विवेकानंद युवाओं को राष्ट्र के पुनर्निर्माण की सबसे बड़ी शक्ति मानते थे। उनका प्रेरक आह्वान— “उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाए”—आज भी भारतीय युवाओं में आत्मविश्वास, साहस और स्व बोध का संचार करता है। उनकी जयंती यह विश्वास दृढ़ करती है कि भारत का भविष्य अनुशासित, निर्भीक और समाज के प्रति समर्पित युवाओं के हाथों में है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विभिन्न अवसरों पर स्वदेशी की भावना पर निरंतर बल दिया है। राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर देशभर में स्वदेशी के प्रति विशेष उत्साह और जागरूकता का वातावरण बन रहा है। 12 जनवरी 2026 को स्वामी विवेकानंद जयंती के अवसर पर स्वदेशी जागरण मंच देशभर में ‘रन फॉर स्वदेशी’ अथवा ‘स्वदेशी संकल्प दौड़’ का आयोजन कर रहा है। डॉ. अश्विनी महाजन राष्ट्रीय सह-संयोजक स्वदेशी जागरण मंच ने बताया कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी ) ने देश की सभी विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों एवं अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों से ‘रन फॉर स्वदेशी’ आयोजित करने का आग्रह करते हुए एक परिपत्र जारी किया है। भारत सरकार के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की परीक्षा पर चर्चा पहल से जोड़ते हुए, देशभर के विद्यालयों में इस प्रकार के कार्यक्रम आयोजित करने हेतु पत्र जारी किया है।
इसके अतिरिक्त, देशभर में हजारों विद्यालय संचालित करने वाली संस्था विद्या भारती ने भी ‘रन फॉर स्वदेशी’ के आयोजन का आह्वान किया है। कई राज्य सरकारों की शिक्षा संबंधी संस्थाओं ने भी ‘रन फॉर स्वदेशी’ अथवा ‘स्वदेशी संकल्प दौड़’ के आयोजन हेतु पहल की है। विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति भी इस अभियान को सफल बनाने के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं।
स्वामी विवेकानंद जयंती के पावन अवसर पर स्वदेशी जागरण मंच देशवासियों—युवाओं, महिलाओं, विद्यार्थियों, श्रमिकों, किसानों, व्यापारियों, उद्योगपतियों, पेशेवरों तथा समाज के सभी वर्गों—से आह्वान करता है कि वे स्वदेशी के मार्ग पर चलकर एक विकसित भारत के निर्माण के अपने सामूहिक संकल्प को पुनः जागृत करें। स्वामी विवेकानंद ने हमें आत्मविश्वास, राष्ट्रीय स्वाभिमान और अपनी अंतर्निहित शक्ति पर विश्वास करना सिखाया। उन्होंने ऐसे भारत की कल्पना की थी जो अपने पैरों पर खड़ा हो, अपने संसाधनों, कौशल और मूल्यों से पोषित हो, और साथ ही मानवता के कल्याण में सक्रिय योगदान दे।
आज, जब भारत विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की ओर अग्रसर है, स्वदेशी केवल अतीत का नारा नहीं, बल्कि भविष्य की अनिवार्य आवश्यकता है। सच्चा और टिकाऊ विकास अत्यधिक बाहरी निर्भरता के सहारे संभव नहीं है। स्वदेशी जागरण मंच इस ऐतिहासिक अवसर पर देशवासियों से बड़ी संख्या में इस अभियान से जुड़ने की अपील करता है। मंच का दृढ़ विश्वास है कि भारत केवल स्वदेशी के मार्ग पर चलते हुए ही वर्ष 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बन सकता है।
वर्तमान वैश्विक परिदृश्य—जिसमें युद्ध, संघर्ष, व्यापार युद्ध, टैरिफ विवाद, आपूर्ति शृंखलाओं में बाधाएँ, वैश्विक मूल्य शृंखलाओं का विखंडन, महत्वपूर्ण खनिजों तथा भुगतान प्रणालियों का हथियारीकरण शामिल है—स्वदेशी की आवश्यकता को पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक बना देता है।
स्वदेशी का अर्थ है—
•भारतीय उद्योगों, एमएसएमई, किसानों, कारीगरों और स्टार्टअप्स को सशक्त बनाना
•स्थानीय उत्पादन, स्थानीय नवाचार और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देना
•उपभोक्ता के रूप में विवेकपूर्ण ढंग से भारतीय वस्तुओं और सेवाओं को प्राथमिकता देना
•यह सुनिश्चित करना कि आर्थिक विकास समावेशी, टिकाऊ और भारतीय आवश्यकताओं पर आधारित हो
युवाओं के लिए स्वदेशी का संदेश केवल उपभोग तक सीमित न रहकर सृजन की ओर बढ़ने का आह्वान है—रोजगार देने वाले उद्यमी, नवाचारकर्ता, वैज्ञानिक, इंजीनियर, शिक्षक और देश की आवश्यकताओं को पूरा करने वाले निर्माता बनने का आह्वान। नीति-निर्माताओं और संस्थानों के लिए यह स्मरण है कि आत्मनिर्भरता को व्यापार, प्रौद्योगिकी, शिक्षा और औद्योगिक नीतियों का मार्गदर्शक सिद्धांत बनाया जाना चाहिए। समाज के लिए, स्वदेशी अल्पकालिक सुविधाओं से ऊपर उठकर राष्ट्रीय हित के प्रति एक नैतिक प्रतिबद्धता है।
एक विकसित भारत केवल उच्च आय वाली अर्थव्यवस्था नहीं होता; वह एक आत्मविश्वासी राष्ट्र होता है, जिसमें सांस्कृतिक स्वाभिमान, सामाजिक समरसता और आर्थिक संप्रभुता निहित होती है। स्वदेशी के मार्ग पर चलकर हम स्वामी विवेकानंद को केवल शब्दों से नहीं, बल्कि कर्मों से भी सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।
इस स्वामी विवेकानंद जयंती पर, आइए हम संकल्प लें—
भारतीय सोचें, भारतीय उत्पादन करें, भारतीय उपभोग करें—और एक सशक्त, आत्मनिर्भर तथा मानवीय भारत का निर्माण करें।
Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor