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Sunday, August 23, 2026, 7:18 am

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याद दिलावण गणतन्त्र री : कविता-नाचीज़

याद दिलावण गणतन्त्र री

लो ,फेर आ ‘ गी – छब्बीस जनवरी
याद दिलावण नै देस रै संविधान री
आओ घणै उच्छब सूं उडावां अबीर…

एक भाषा एक विधान, फेर क्यूं उठै
जात- पांत अर प्रांत – धर्म री बातां
बैर बिरोध रै कारणै क्यूं खींचो लकीर…

आजादी रै आंगणै खेले राम अर रहीम
आपस मे कदैई ‘अ ‘तो नां चुड़भूडै ला
राज चावणीया धर्म री खींचै है लकीर…

भुखै रो भेद आज भी लोग क्यूं करै है
हिन्दू-मुस्लिम रो ज़हर घोळण री बातां
माड़ी सोच ओ’माँगणियो साधु या फकीर..

धोळै ग़ाभां मांई अ भाषण देवणियां नेता
खुरसी री खातर एकता रा गीत घणा गावै
टिकटआळै बख्त जात-धरम री देवै नजीर

मतलब गांठण सारू सविंधान नै राखै परै
राम रुखाळी राखै लो इ ‘गण’अर ‘तंत्र’ री
आओ बचावां देस रै सविंधान री तस्वीर…

सविधान बचावण री मुल्क में आवाज उठै
देस रा एक सौ तीस करोड़ लोग जागरय्या
आओअबै भाईचारे री बधावां बड़ी लकीर.

आई छब्बीस जनवरी भेळा होय मनावां
हिन्दूमुस्लिम सगळा मिळ मोत्यां सूं बधारां
भारत रै सविंधान री राखां संसार में.

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor