लेखक शिव सिंह
9784092381
इस संसार में जब कोई बच्चा जन्म लेता है, तो वह भाषा नहीं जानता, वह शब्द नहीं पहचानता। वह जो सबसे पहली भाषा समझता है, वह है—स्पर्श। और उस स्पर्श में भी जो जादू ‘माँ’ के हाथों में होता है, वह किसी भी आधुनिक विज्ञान या चिकित्सा से परे है।
1. अनकहा मरहम: जब शब्द कम पड़ जाएं
जीवन की भागदौड़ में हम अक्सर थक जाते हैं, टूट जाते हैं या भीतर से बिखर जाते हैं। उस वक्त दुनिया की तमाम सलाहें और दवाइयां वो काम नहीं कर पातीं, जो माँ का एक बार सिर पर हाथ फेर देना कर देता है। माँ का स्पर्श एक ऐसी ‘इमोशनल हीलिंग’ है जो सीधे हृदय के घावों पर असर करती है।
2. विज्ञान और ममता का संगम
विज्ञान भी मानता है कि माँ के स्पर्श से शरीर में ‘ऑक्सीटोसिन’ (Oxytocin) जैसे ‘लव हार्मोन’ का संचार होता है, जो तनाव को कम करता है और सुरक्षा का अहसास कराता है। लेकिन एक संतान के लिए यह केवल हार्मोन का खेल नहीं है; यह वह सुरक्षा कवच है जो उसे विश्वास दिलाता है कि “सब ठीक हो जाएगा।”
3. पीड़ा से मुक्ति का मार्ग
* बचपन की चोट: याद कीजिए जब बचपन में गिरकर घुटना छिल जाता था, तो माँ की सिर्फ एक ‘फूंक’ और सहला देने भर से दर्द गायब हो जाता था।
* जवानी की उलझनें: आज भी जब हम असफल होते हैं या दुनिया हमें ठुकराती है, तो माँ का कंधा वह जगह है जहाँ सारा बोझ हल्का हो जाता है।
* अंतिम सुकून: माँ का स्पर्श उस ठंडी छाँव की तरह है जो तपती धूप जैसी जिंदगी की परेशानियों को सोख लेती है।
4. एक आध्यात्मिक ऊर्जा
मातृत्व का स्पर्श दरअसल निस्वार्थ प्रेम की पराकाष्ठा है। इसमें कोई स्वार्थ नहीं होता, कोई शर्त नहीं होती। यही कारण है कि यह स्पर्श हीलिंग (Healing) का सबसे शुद्ध रूप है। जब माँ अपने बच्चे को गले लगाती है, तो वह केवल शरीर को नहीं, बल्कि उसकी आत्मा को ऊर्जा दे रही होती है।
”दवाइयां सिर्फ बीमारी काटती हैं, पर माँ का स्पर्श उस इंसान को फिर से जीवित कर देता है जो अंदर से हार चुका होता है।”
माँ का हाथ जब माथे पर पड़ता है, तो मानो ईश्वर स्वयं आशीर्वाद दे रहे हों। यह स्पर्श हमें सिखाता है कि हीलिंग के लिए हमेशा महँगे इलाज की ज़रूरत नहीं होती, कभी-कभी बस ‘अपनापन’ ही काफी होता है।
स्वस्थ रहे सुरक्षित रहे आयुर्वेद अपनाये।







