Explore

Search

Monday, July 13, 2026, 5:00 am

Monday, July 13, 2026, 5:00 am

LATEST NEWS

The specified slider does not exist.

Lifestyle

शिक्षा और तकनीक में बच्चों के भविष्य की दिशा तय करनी होगी : डॉ. पद्मजा शर्मा

-डॉ. नीलम व्यास स्वयंसिद्धा की चार पुस्तकों के लोकार्पण समारोह में बच्चों के गंभीर मुद्दों को उठाया, साहित्यकारों ने शब्दों को अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम बताया

डीके पुरोहित. जोधपुर

वरिष्ठ साहित्यकार एवं आलोक डॉ. पद्मजा शर्मा ने कहा कि बच्चों के सामने आज बड़ा संकट है। मोबाइल तकनीक जहां सुविधाजनक है वहीं हमें यह तय करना होगा कि बच्चों को इससे किस हद तक जुड़ाव रखना होगा। पिछले दिनों बच्चों द्वारा मोबाइल पर अवांछित फोटो अपलोड करने का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने कहा कि आज बच्चों को साहित्य के माध्यम से शिक्षित करने की जरूरत है। बच्चों के लिए लिखने की जरूरत है। उन्हें समझाने की जरूरत है तो उसका हल भी बताना होगा। उन्होंने नीलम व्यास स्वयंसिद्धा की चार पुस्तकों के लोकार्पण समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में ये विचार व्यक्त किए। प्रीत की रागिनी, बाल मन की उड़ान, छंद नील प्रभा और व्यष्टि से समष्टि की ओर पुस्तकों का लोकार्पण किया गया।

अध्यात्म और साहित्य से ही संतुष्टि संभव : कृपलानी

विशिष्ट अतिथि आध्यात्मिक चिंतक लीला कृपलानी ने कहा कि साहित्य और अध्यात्म ही हमें जीवन में संतुष्टि प्रदान कर सकता है। साहित्य के बगैर जीवन अधूरा है और अध्यात्म के बगैर जीवन की यात्रा संपूर्ण नहीं हो सकती। विशिष्ट अतिथि डॉ. उषा माहेश्वरी पुंगलिया ने कहा कि स्वयंसिद्धा अपने नाम के अनुरूप शब्दों की साधना कर रही है। उन्होंने अपने नीलम व्यास से जुड़ाव और उनके साहित्य की विवेचना करते हुए छंदों को महत्वपूर्ण बताया। विशिष्ट अतिथि चांदकौर जोशी ने कहा कि नीलम की चारों पुस्तकों में जीवन के हर पहलुओं को उजागर किया गया है। नीलम व्यास ने अपने जन्मदिन पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान केक काटा और अपनी साहित्यिक यात्रा पर प्रकाश डाला।

कविता में लय जरूरी : संवितेंद्र

इस मौके पर अध्यक्षीय उद्बोधन में वरिष्ठ साहित्यकार सत्यदेव संवितेंद्र ने कहा कि कविता में लय जरूरी है। उन्होंने नीलम व्यास के साहित्य के विभिन्न पहलुओं और छंदों की व्याख्या करते हुए कहा कि जब तक कविता में लय नहीं होगी, कविता अर्थहीन होगी। इस मौके पर एनडी निंबावत, संजय व्यास, ओमप्रकाश व्यास, महेश पंवार, वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र बोड़ा, हर्षदसिंह भाटी, पंकज जांगिड़, राखी पुरोहित, तृप्ती गोस्वामी, सीमा जोशी मूथा, अशफाक अहमद फौजदार, श्याम गुप्ता शांत, ओमप्रकाश वर्मा, हरिप्रकाश राठी, हबीब कैफी, विनोद गहलोत, वीणा अचतानी, प्रमोद वैष्णव, भीमराज सैन, विजयलक्ष्मी बोहरा, अन्नपूर्णा, मनीषा डागा, डाॅ. हरीदास व्यास, हंसराज बारासा, मनशाह नायक, समीम खान, सुनीता शेखावत, संजीदा खानम, दीपिका मोयल, सरला सोनी, सुशीला भंडारी, वीना अचतानी, दीपिका मनवानी, अनिता सुथार, स्नेलहता सुथार, गोल्डी बिस्सा, अर्चना त्यागी, अंजना चौधरी सहित 80 से अधिक साहित्यकार मौजूद थे। संस्था के अध्यक्ष राजेश भैरवानी ने आभार जताया। संचालन डीके पुरोहित ने किया। कार्यक्रम के आरंभ में राखी पुरोहित ने सरस्वती वंदना और स्वागत गीत प्रस्तुत किया।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor