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Sunday, April 19, 2026, 5:13 pm

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एजुकेट गर्ल्स ने पाली में दीक्षांत समारोह में प्रगति शिक्षार्थियों का सम्मान किया

समारोह में सामुदायिक नेता, सरकारी प्रतिनिधि, साझेदार, स्वयंसेवक और शिक्षार्थी एकत्र हुए, ताकि ग्रामीण और शैक्षिक रूप से वंचित समुदायों में लड़कियों की शिक्षा को आगे बढ़ाने के लगभग दो दशकों का उत्सव मनाया जा सके।

राखी पुरोहित. पाली 

रेमन मैगसेसे पुरस्कार (2025) प्राप्त करने वाली पहली पहली भारतीय संस्था, एजुकेट गर्ल्स, ने पाली में एक दीक्षांत समारोह आयोजित किया, जिसमें प्रगति, अपने द्वितीय-अवसर शिक्षा पहल के माध्यम से कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षाएँ सफलतापूर्वक उत्तीर्ण करने वाले शिक्षार्थियों का सम्मान किया गया। इस समारोह में सामुदायिक नेता, सरकारी प्रतिनिधि, साझेदार, स्वयंसेवक और शिक्षार्थी एकत्र हुए, ताकि ग्रामीण और शैक्षिक रूप से वंचित समुदायों में लड़कियों की शिक्षा को आगे बढ़ाने के लगभग दो दशकों का उत्सव मनाया जा सके। स्नातक विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए और संवादात्मक सत्रों ने शिक्षार्थियों, सामुदायिक मेंटर प्रेरक और जमीनी स्तर के टीम बालिका स्वयंसेवकों को दृढ़ता, सामुदायिक सहभागिता और परिवर्तन की प्रभावशाली कहानियाँ साझा करने के लिए एक मंच प्रदान किया।

कार्यक्रम की शोभा मुख्य अतिथि के रूप में कैलाश चंद्र राठौड़, जिला साक्षरता एवं सतत शिक्षा अधिकारी, पाली ने बढ़ाई, जिन्होंने पिछले 18 वर्षों में एजुकेट गर्ल्स के निरंतर प्रभाव की सराहना की। सभा को संबोधित करते हुए, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षा एक सतत यात्रा है और प्रगति शिक्षार्थियों की प्रशंसा की, जिन्होंने अपनी आकांक्षाओं को प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण बाधाओं को पार किया। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि कैसे संगठन ने स्कूल से बाहर रह चुकी लड़कियों को आत्मविश्वास और स्वतंत्रता के साथ आगे बढ़ने में सक्षम बनाया है।

उन्होंने आगे अपनी आकांक्षा व्यक्त की कि एजुकेट गर्ल्स अपने प्रभाव को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाए। साथ ही उन्होंने यह साझा किया कि उनकी इच्छा है कि संगठन न केवल अपनी पहुँच 1 करोड़ शिक्षार्थियों तक पहुँचे, बल्कि उसे दोगुना भी करे। उन्होंने लड़कियों की शिक्षा को आगे बढ़ाने के लिए अपने विभाग के समर्थन की भी पुष्टि की। साथ ही यह उल्लेख किया कि एक लड़की को शिक्षित करना पूरे परिवार को सशक्त बनाता है। इस कार्यक्रम में महिला सशक्तिकरण जिला हब की जेंडर विशेषज्ञ राजश्री भी उपस्थित थीं।

प्रगति के माध्यम से द्वितीय-अवसर की सफलता का उत्सव

कार्यक्रम में, 13 किशोरियों और युवा महिलाओं को राजस्थान स्टेट ओपन स्कूल की कक्षा 10 परीक्षाओं में 70 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने के लिए टॉपर्स के रूप में सम्मानित किया गया। ये शिक्षार्थी एजुकेट गर्ल्स के प्रगति कार्यक्रम का हिस्सा हैं, जो 15-29 वर्ष आयु वर्ग की उन युवा महिलाओं का समर्थन करता है, जो अधिक आयु की हैं, शैक्षणिक रूप से पीछे हैं या औपचारिक शिक्षा से बाहर होने के जोखिम में हैं। अब तक, 10,210 से अधिक शिक्षार्थियों ने लंबे अंतराल के बाद इस कार्यक्रम के माध्यम से अपनी शिक्षा फिर से शुरू की है और सफलतापूर्वक कक्षा 10 पूर्ण की है। प्रगति केवल शैक्षणिक शिक्षा पर ही नहीं, बल्कि जीवन कौशल, आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता के निर्माण पर भी ध्यान केंद्रित करता है, जिससे युवा महिलाएँ अपने भविष्य को आकार दे सकें। इस कार्यक्रम में 750 से अधिक शिक्षार्थियों, 86 प्रेरकों और टीम बालिका के स्वयंसेवकों, साथ ही साझेदारों, सरकारी प्रतिनिधियों और एजुकेट गर्ल्स की टीम के सदस्यों ने भाग लिया। सम्मानित की गई कई युवा महिलाओं ने प्रतिबंधात्मक लैंगिक मानदंडों, घरेलू जिम्मेदारियों और स्कूल से वर्षों की दूरी जैसी चुनौतियों को पार किया है। कई लोगों के लिए, यह उनका पहला सार्वजनिक कार्यक्रम था। यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो व्यक्तिगत दृढ़ संकल्प और मजबूत सामुदायिक समर्थन दोनों को दर्शाता है। उनकी उपलब्धियों ने उन्हें अपने समुदायों में आदर्श के रूप में स्थापित किया है। समारोह की एक प्रमुख झलक इन 13 टॉपर्स का सम्मान था, जिन्होंने प्रेरणादायक दृढ़ता की कहानियाँ साझा कीं। इसमें घरेलू जिम्मेदारियों का संतुलन, सामाजिक बाधाओं को चुनौती देना और अपने सपनों को पूरा करने के लिए अपनी शिक्षा को फिर से शुरू करना शामिल है। उनकी यात्राओं ने द्वितीय-अवसर के अवसरों की परिवर्तनकारी शक्ति को सुदृढ़ किया। टीम बालिका के स्वयंसेवकों ने भी यह बताते हुए अपने अनुभव साझा किए, कि “मेरा गाँव, मेरी समस्या, मैं ही समाधान हूँ” दृष्टिकोण के माध्यम से वे हर लड़की के लिए शिक्षा सुनिश्चित करने का कार्य कैसे करते हैं। प्रेरकों ने घर-घर संपर्क के माध्यम से समुदायों को संगठित करने में अपनी भूमिका के बारे में बताया, परिवारों को लड़कियों का नामांकन कराने और उनकी शिक्षा जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor