नियमित अध्ययन, परिवार के सहयोग और गुरुजनों के मार्गदर्शन से हासिल की सफलता, प्रशासनिक अधिकारी बनने का लक्ष्य
राखी पुरोहित. जैसलमेर
राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) की 10वीं परीक्षा में मीनाक्षी व्यास ने 80 प्रतिशत अंक प्राप्त कर उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। इस उपलब्धि से न केवल उनके परिवार बल्कि स्कूल और पूरे क्षेत्र में खुशी और गर्व का माहौल है। मीनाक्षी की यह सफलता उनकी मेहनत, अनुशासन और सकारात्मक सोच का परिणाम है।
मीनाक्षी व्यास जैसलमेर स्थित चाणक्य विद्या पीठ स्कूल की छात्रा हैं। उन्होंने अपनी पढ़ाई के दौरान निरंतरता और समय प्रबंधन को प्राथमिकता दी। मीनाक्षी प्रतिदिन लगभग चार से पांच घंटे नियमित अध्ययन करती थीं और प्रत्येक विषय को समझकर पढ़ने पर विशेष ध्यान देती थीं। यही कारण है कि उन्होंने संतुलित प्रदर्शन करते हुए अच्छे अंक प्राप्त किए।
विषयवार अंकों की बात करें तो मीनाक्षी ने हिंदी में 72 प्रतिशत, अंग्रेजी में 92 प्रतिशत, विज्ञान (साइंस) में 85 प्रतिशत, सामाजिक विज्ञान में 80 प्रतिशत, गणित में 72 प्रतिशत और संस्कृत में 79 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं। अंग्रेजी और विज्ञान जैसे विषयों में उनके अच्छे अंक उनकी समझ और मेहनत को दर्शाते हैं, जबकि अन्य विषयों में भी उन्होंने संतुलित प्रदर्शन किया है।
मीनाक्षी का लक्ष्य आगे चलकर प्रशासनिक अधिकारी बनना है। वह देश और समाज के लिए कुछ बेहतर करना चाहती हैं और इसी उद्देश्य को लेकर वह अपनी आगे की पढ़ाई में भी पूरी मेहनत और समर्पण के साथ जुटने की योजना बना रही हैं। उनका मानना है कि स्पष्ट लक्ष्य और निरंतर प्रयास से किसी भी मुकाम को हासिल किया जा सकता है। अपनी सफलता का श्रेय मीनाक्षी व्यास ने अपने गुरुजनों के विशेष मार्गदर्शन, बुजुर्गों के आशीर्वाद और परिवार के सहयोग को दिया है। उन्होंने खासतौर पर अपनी माता मेनका व्यास की तपस्या और त्याग को अपनी सफलता का सबसे बड़ा आधार बताया। मीनाक्षी के अनुसार उनकी मां ने हर परिस्थिति में उन्हें प्रेरित किया और पढ़ाई के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराया।
इसके अलावा उन्होंने अपनी सबसे बड़ी बहन आयुषी व्यास की शुभकामनाओं, बड़ी बहन जाह्नवी व्यास के मार्गदर्शन और बड़े भाई अंशुल व्यास के स्नेह, सहयोग और गाइडेंस को भी अपनी सफलता का महत्वपूर्ण कारण बताया। परिवार के सभी सदस्यों ने उन्हें हर कदम पर प्रोत्साहित किया, जिससे उनका आत्मविश्वास मजबूत बना रहा। मीनाक्षी व्यास की दादी लीला व्यास और नाना बालकिशन पुरोहित और नानी लीला पुरोहित ने आशीर्वाद दिया है। पोलजी व्यास परिवार ने मीनाक्षी व्यास को ढेर सारा प्यार और आशीर्वाद दिया है। इसी तरह ननिहाल पक्ष कंवराधारा श्रीपत पुरोहित के सभी सदस्यों ने ढेरों आशीर्वाद व शुभकामनाएं दीं।
स्वर्गीय जितेन्द्र व्यास की पुत्री मीनाक्षी ने अपनी इस उपलब्धि के माध्यम से यह भी साबित किया है कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद यदि मन में दृढ़ संकल्प और मेहनत करने की इच्छा हो, तो सफलता जरूर मिलती है। उन्होंने अपने पिता के सपनों को साकार करने की दिशा में एक मजबूत कदम बढ़ाया है। मीनाक्षी की इस सफलता से उनके स्कूल चाणक्य विद्या पीठ स्कूल के शिक्षक भी बेहद खुश हैं। शिक्षकों का कहना है कि मीनाक्षी एक मेहनती, अनुशासित और जिज्ञासु छात्रा रही हैं, जो हमेशा सीखने के लिए उत्साहित रहती थीं। उनका यह प्रदर्शन अन्य विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगा। मीनाक्षी ने स्कूल में पढ़ाई के अलावा सेल्फ स्टडी की और किसी प्रकार की कोचिंग नहीं की। समाज के विभिन्न वर्गों और क्षेत्रवासियों ने मीनाक्षी को इस उपलब्धि पर शुभकामनाएं दी हैं और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। सभी का मानना है कि मीनाक्षी आने वाले समय में अपने लक्ष्य को जरूर हासिल करेंगी और अपने क्षेत्र का नाम और ऊंचा करेंगी। अंततः मीनाक्षी व्यास की यह सफलता यह संदेश देती है कि मेहनत, अनुशासन और परिवार के सहयोग से हर लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। उनकी कहानी उन सभी विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा है, जो अपने सपनों को साकार करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।








