लोगों की असली क्षमता उस समय और उभर कर आती है जब वे जीवन की चुनौतियों से परखे जाते हैं।” और ऐसा ही हुआ ब्रह्मलीन, युग मनीषी प्रोफेसर हिम्मत सिंह सिन्हा की विश्व ज्ञान – यात्रा के नौवें पड़ाव कुआलालम्पुर मलेशिया में। चुनौतियां हज़ार थीं मगर अंत में प्रो सिन्हा की ज्ञान – यात्रा का नौवां पड़ाव 29 मार्च को सफलता पूर्वक संपन्न हुआ।
दिलीप कुमार पुरोहित. कुआलालम्पुर (मलेशिया)
प्रार्थना में अपार अनंत शक्ति होती है। मन के अटल विश्वास प्रकट रूप में नजर आ जाते हैं। दाईसाकु इकेदा ने एक बार कहा था – “जीवन की प्रत्येक कठिनाई और विपरीत परिस्थिति हमें और अधिक शक्तिशाली और मज़बूत बनाने के लिए अवसर प्रदान करती है। लोगों की असली क्षमता उस समय और उभर कर आती है जब वे जीवन की चुनौतियों से परखे जाते हैं।” और ऐसा ही हुआ ब्रह्मलीन, युग मनीषी प्रोफेसर हिम्मत सिंह सिन्हा की विश्व ज्ञान – यात्रा के नौवें पड़ाव कुआलालम्पुर मलेशिया में। चुनौतियां हज़ार थीं मगर अंत में प्रो सिन्हा की ज्ञान – यात्रा का नौवां पड़ाव 29 मार्च को सफलता पूर्वक संपन्न हुआ।
दिनेश निगम जो कायस्थ वंश इंटरनेशनल, सिंगापुर के फाउंडर हैं और जिनकी 53 देशों में शाखाएं हैं उनके अथक प्रयासों से और आलोक कुमार सिन्हा, अमृता राज तथा राहुल भटनागर जो मलेशिया में रहते है उनके सहयोग से ये सम्भव हो पाया।
प्रो सिन्हा साहब के इस कार्यक्रम में पहली बार हमने कुरुक्षेत्र से डाॅ. जय भगवान सिंगला साहब को भी जूम पर लिया। वे 42 वर्षों से प्रो सिन्हा साहब के साथ रहे, उनका आशीर्वाद लिया और उनके बहुत सारे अपने व्यक्तिगत अनुभव भी बताए। उन्होंने एक अनुभव साझा किया कि तब के तत्कालीन महामहिम राष्ट्रपति प्रो अब्दुल कलाम साहब किसी कार्यक्रम में भाग लेने के लिए कुरुक्षेत्र आ रहे थे। प्रो कलाम साहब ने कहा कि क्या कोई ऐसा व्यक्ति है जो गीता पर मेरी शंकाए दूर कर सके ? सरकार हरकत में आ गई और सरकार ने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति को फ़ोन किया, कुलपति महोदय ने कहा कि एक व्यक्ति हैं जो कलाम साहेब के संशयों – शंकाओं को दूर कर सकते हैं तथा गीता समझा सकते है और वे हैं प्रो हिम्मत सिंह सिन्हा जी। तो फिर प्रो अब्दुल कलाम साहब की और प्रो हिम्मत सिंह सिन्हा जी की मुलाकात राष्ट्रपति भवन में आयोजित की गई और 30 मिनट तक चले उनके संवाद में डा कलाम साहब की एक एक कर सारी शंकाएँ दूर हो गई। उसके पश्चात उन्होंने अपने कई भाषणों में कहा कि – “मैं मूर्धन्य हो गया प्रो हिम्मत सिंह सिन्हा जी से मिलकर क्यों कि उन्होंने मेरी सभी शंकाओं का निवारण कर दिया।” ऐसे व्यक्तित्व थे ब्रह्मलीन, युग मनीषी प्रो हिम्मत सिंह सिन्हा जी।
प्रो सिन्हा के वीडियो यू ट्यूब पर उपलब्ध हैं और के बी व्यास ने बताया कि यू ट्यूब पर ही उनके वीडियो देखकर उन्होंने अपनी पुस्तक “ सहज अभिव्यक्ति – भाग ३” का रिव्यू लिखवाया, जो उन्होंने अपने ब्रह्मलीन होने से मात्र १० दिन पहले ही लिखा था। व्यास ने बताया कि यू ट्यूब पर उनके अथाह ज्ञान का केवल २०% ही हिस्सा आया है। बाक़ी का 80% उन लोगों से पता चलता है जो उनके साथ २५, ३० या ४० वर्षों से रह रहे थे। प्रो सिन्हा साहब ने २२ पुस्तकें लिखी, २२० शोध लेख लिखे, 70 लोगों को पीएचडी करवाई तथा वे २६ समाज सेवी संस्थाओं में सक्रिय रहे। वे सात भाषाओं के प्रकाण्ड ज्ञाता थे। ४२ वर्षों से प्रो सिन्हा साहब के सान्निध्य में रहे डा सिंगला साहब उनकी इस ज्ञान – यात्रा के अगले पड़ाव में भी व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होंगे जो 12 अप्रेल को जापान के ओसाका शहर में हो रही है।
प्रो सिन्हा साहब ने बुद्ध पर भी उनके जीवन और दर्शन पर एक पुस्तक लिखी है। व्यास ने बताया कि बुद्ध के लोटस सूत्र जो उन्होंने अपने जीवन के अंतिम 8 वर्षों में बताया था वो ही बुद्ध की समस्त शिक्षाओं का आधार है। इस संसार में कर्म ही मूल है, कर्म ही प्रधान हैं और मृत्यु के पश्चात कर्म ही हैं जो साथ चलते हैं। कर्मों के आधार पर ही मानव मानव बनता है या दानव बनता है।
इसके पश्चात विभिन्न लोगों ने अपनी कविताएँ सुनाई जिसमें प्रभात कुमार गुप्ता, विनोद सिंह, सत्यानन्द श्रीवास्तव, अमृता राज प्रमुख थी और अंत में मीनू सिंह ने एक ग़ज़ल को गा कर सुनाया और वाहवाही लूटी।











