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Wednesday, April 29, 2026, 9:37 am

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एक देश–एक सेविंग अकाउंट की दिशा में बड़ा कदम! पंकज भाटिया के सुझावों पर RBI कर रहा गंभीर विचार

अकाउंट पोर्टेबिलिटी और एकल बचत खाता व्यवस्था लागू होने की संभावना, वित्तीय पारदर्शिता और डिजिटल अर्थव्यवस्था को मिल सकता है नया बल

दिलीप कुमार पुरोहित. जैसलमेर

राजस्थान के सीमावर्ती शहर जैसलमेर के एक जागरूक नागरिक पंकज भाटिया द्वारा देश की बैंकिंग व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए दिए गए सुझाव अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनते जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, देश की शीर्ष बैंकिंग संस्था भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने इन सुझावों पर गंभीरता से विचार शुरू कर दिया है और संभावना जताई जा रही है कि आने वाले समय में इन प्रस्तावों को नीति के रूप में लागू किया जा सकता है।

पंकज भाटिया ने अपने सुझावों में दो प्रमुख बिंदुओं को उठाया है—पहला, प्रत्येक नागरिक के लिए केवल एक सेविंग अकाउंट की व्यवस्था, और दूसरा, अकाउंट पोर्टेबिलिटी की सुविधा। इन दोनों प्रस्तावों को यदि लागू किया जाता है, तो भारत की बैंकिंग प्रणाली में एक बड़ा परिवर्तन देखने को मिल सकता है।

क्या हैं पंकज भाटिया के मुख्य सुझाव?

पंकज भाटिया ने अपने पत्र में स्पष्ट रूप से कहा है कि देश में प्रत्येक व्यक्ति के पास केवल एक ही सेविंग बैंक अकाउंट होना चाहिए। इसके लिए एक निश्चित समय सीमा तय की जाए और उस अवधि के भीतर नागरिकों को अपने अतिरिक्त खातों को बंद करने का निर्देश दिया जाए। उनका मानना है कि इससे व्यक्ति की सभी वित्तीय गतिविधियां एक ही खाते में दर्ज होंगी, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और निगरानी आसान होगी।

दूसरा महत्वपूर्ण सुझाव अकाउंट पोर्टेबिलिटी को लेकर है। भाटिया का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति अपना बैंक बदलना चाहता है, तो उसे नया खाता खोलने की बजाय अपने पुराने खाते को ही नए बैंक में स्थानांतरित करने की सुविधा मिलनी चाहिए। इसमें उसके सभी पुराने लेन-देन, रिकॉर्ड और खाता संख्या भी यथावत बनी रहे। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि इस पूरी व्यवस्था को आधार कार्ड या अन्य पहचान प्रणालियों से जोड़ा जाए, ताकि एक व्यक्ति की पहचान और उसके बैंकिंग रिकॉर्ड को एकीकृत किया जा सके।

RBI क्यों कर रहा है इन सुझावों पर विचार?

भारतीय रिजर्व बैंक इन सुझावों को वित्तीय प्रणाली में सुधार के एक संभावित उपाय के रूप में देख रहा है। वर्तमान समय में एक व्यक्ति के कई बैंक खाते होते हैं, जिससे न केवल ट्रैकिंग में कठिनाई होती है, बल्कि कई बार वित्तीय अनियमितताओं की संभावना भी बढ़ जाती है। यदि एक व्यक्ति–एक खाता प्रणाली लागू होती है, तो सरकार और बैंकिंग संस्थानों को वित्तीय गतिविधियों पर बेहतर नियंत्रण मिलेगा। इससे कर चोरी, मनी लॉन्ड्रिंग और फर्जी खातों पर भी अंकुश लगाया जा सकता है।

अकाउंट पोर्टेबिलिटी: बैंकिंग में क्रांति का कदम

अकाउंट पोर्टेबिलिटी का विचार भी कम महत्वपूर्ण नहीं है। वर्तमान में यदि कोई ग्राहक बैंक बदलना चाहता है, तो उसे नया खाता खोलना पड़ता है, जिससे उसकी पुरानी वित्तीय हिस्ट्री बिखर जाती है। यदि यह सुविधा लागू होती है, तो मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी की तरह ही बैंक अकाउंट भी एक बैंक से दूसरे बैंक में ट्रांसफर किया जा सकेगा। इससे ग्राहकों को बेहतर सेवाएं चुनने की स्वतंत्रता मिलेगी और बैंकों के बीच प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी।

आर्थिक पारदर्शिता और डिजिटल इंडिया को मिलेगा बढ़ावा

विशेषज्ञों का मानना है कि इन दोनों सुझावों के लागू होने से देश में आर्थिक पारदर्शिता को बढ़ावा मिलेगा। जब सभी लेन-देन एक ही खाते में दर्ज होंगे, तो आय और व्यय का स्पष्ट रिकॉर्ड सामने आएगा। यह पहल डिजिटल इंडिया जैसे अभियानों को भी मजबूती दे सकती है। डिजिटल भुगतान प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने में यह कदम सहायक साबित हो सकता है।

चुनौतियां भी कम नहीं

हालांकि, इस प्रस्ताव के सामने कई व्यावहारिक चुनौतियां भी हैं।

  • देश की विशाल जनसंख्या और विविध बैंकिंग जरूरतों को देखते हुए एकल खाता प्रणाली लागू करना आसान नहीं होगा।
  • कई लोग अलग-अलग उद्देश्यों के लिए अलग-अलग खाते रखते हैं, जैसे व्यापार, बचत, वेतन आदि।
  • तकनीकी स्तर पर सभी बैंकों के डेटा को एकीकृत करना भी एक बड़ा कार्य होगा।

इसके अलावा, गोपनीयता और डेटा सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ सकते हैं, क्योंकि एक ही खाते में सभी वित्तीय जानकारी केंद्रित होगी।

जनता और विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया

पंकज भाटिया के सुझावों को लेकर आमजन और विशेषज्ञों में मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ लोग इसे पारदर्शिता और सुविधा की दिशा में बड़ा कदम मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे व्यावहारिक रूप से कठिन बता रहे हैं। जैसलमेर सहित कई स्थानों पर लोगों का कहना है कि यदि सही तरीके से लागू किया जाए, तो यह व्यवस्था बैंकिंग प्रणाली को सरल और प्रभावी बना सकती है।

सरकार और RBI की अगली रणनीति

सूत्रों के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक इस विषय पर विभिन्न बैंकों, वित्तीय विशेषज्ञों और तकनीकी संस्थाओं के साथ चर्चा कर रहा है। यदि सभी पहलुओं पर सहमति बनती है, तो इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा सकता है। संभावना यह भी है कि पहले अकाउंट पोर्टेबिलिटी को लागू किया जाए और उसके बाद एकल खाता प्रणाली की दिशा में कदम बढ़ाया जाए।

एक नागरिक का सुझाव, देशव्यापी बदलाव की संभावना

पंकज भाटिया का यह प्रयास दर्शाता है कि एक जागरूक नागरिक भी देश की नीतियों को प्रभावित कर सकता है। उनके सुझावों पर यदि अमल होता है, तो यह भारत की बैंकिंग व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव साबित हो सकता है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि भारतीय रिजर्व बैंक इन प्रस्तावों को किस रूप में लागू करता है और यह देश की अर्थव्यवस्था तथा आम जनता के जीवन को किस प्रकार प्रभावित करता है। यह पहल न केवल वित्तीय प्रणाली को मजबूत कर सकती है, बल्कि भारत को एक अधिक पारदर्शी और संगठित अर्थव्यवस्था की दिशा में भी आगे बढ़ा सकती है।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor