डॉ. खादर वली के अनुसार : दूध एनिमल प्रोटीन है। यह इंसानों या उनके बच्चों के लिए नहीं। यह आपके कॉफी पीने के लिए नहीं बना है। दूध प्रकृति में एनिमल के बछड़ों के लिए बना है।
बतौर डॉ. खादर वली- दूध “एनिमल प्रोटीन” है, जिसे मानव शरीर सही ढंग से पचा नहीं पाता। दूध पीने से ऑटोइम्यून बीमारियां और हार्मोनल असंतुलन हो सकता है। अगर लोग दूध छोड़ दें, तो बीमारियां कम होंगी और अस्पतालों की जरूरत घट जाएगी। वे यहां तक कहते हैं कि दूध का सेवन आधुनिक बीमारियों की एक बड़ी वजह है।
दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर
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दूध को भारतीय संस्कृति, खान-पान और धार्मिक परंपराओं में एक महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। बचपन से ही हमें सिखाया जाता है कि दूध “संपूर्ण आहार” है और यह हड्डियों, दिमाग और शरीर के विकास के लिए जरूरी है। लेकिन इस रिपोर्ट को पढ़ने के बाद हो सकता है आप अपनी धारणा बदल लें। विख्यात फूड साइंटिस्ट डॉ. खादर वली के वीडियो देखने के बाद आप सोचने पर विवश हो जाएंगे। वे एक इंटरव्यू में साफ-साफ कहते हैं कि दूध पीना सेहत के लिए ठीक नहीं है। क्योंकि दूध इंसानों के लिए बना ही नहीं हैं। प्रकृति में दूध एनिमल प्रोटीन है। प्रकृति में गाय का दूध उसके बच्चों के लिए बना है, न कि इंसानों के बच्चों के लिए। गाय का दूध इंसानों के कॉफी पीने के लिए नहीं बना है। डॉ. खादर वली ने कई सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने अपने एक इंटरव्यू में यहां तक कह दिया कि “अगर लोग दूध पीना छोड़ दें तो 50 प्रतिशत अस्पताल बंद हो जाएंगे।”
डॉ. खादर वली के वीडियो में चार दावे :
- गाय का दूध इंसानों के लिए नहीं, बल्कि बछड़ों के लिए होता है
- दूध “एनिमल प्रोटीन” है, जिसे मानव शरीर सही ढंग से पचा नहीं पाता
- दूध पीने से ऑटोइम्यून बीमारियां और हार्मोनल असंतुलन हो सकता है
- अगर लोग दूध छोड़ दें, तो बीमारियां कम होंगी और अस्पतालों की जरूरत घट जाएगी
वे यहां तक कहते हैं कि दूध का सेवन आधुनिक बीमारियों की एक बड़ी वजह है। डॉ. खादर वली ने यह कहकर कि “दूध केवल बछड़ों के लिए है” देश और दुनिया में बहस छेड़ दी है। उनका कहना है कि प्रकृति में हर प्रजाति का दूध उसके शिशु के लिए बना होता है। लेकिन यह भी सच है कि मनुष्य एकमात्र ऐसा जीव है जिसने हजारों वर्षों से पशु दूध को अपने आहार में शामिल किया है। मानव सभ्यता में डेयरी का उपयोग लगभग 8–10 हजार वर्षों से हो रहा है, खासकर कृषि समाजों में। डॉ. खादर वली का कहना है कि मनुष्यों में लैक्टोज असहिष्णु (lactose intolerant) होती है, यानी वे दूध को ठीक से पचा नहीं पाते। कुछ मामलों में दूध समस्याएं भी पैदा कर सकता है:
- लैक्टोज इनटॉलरेंस: पेट दर्द, गैस, डायरिया
- एलर्जी: खासकर बच्चों में
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हार्मोन और एंटीबायोटिक अवशेष। सच है कि दूध में प्राकृतिक हार्मोन होते हैं, क्योंकि यह एक जीवित प्राणी से आता है।
ऑक्सीटोसिन के सवाल पर क्या बोले डॉ. वली :
कई डेयरी फार्मों में दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए ऑक्सीटोसिन का गलत इस्तेमाल किया जाता है। जब डॉ. खादर वली से पूछा गया कि क्या इस वजह से दूध छोड़ देना चाहिए? इस पर वे बोले- हां, यह एक वजह है, मगर यह दूसरी है। वे तो मूलत: दूध के ही खिलाफ हैं। क्योंकि दूध एनिमल प्रोटीन है। उन्होंने कहा कि ऑक्सीटोसिन के इस्तेमाल से-
- पशु के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है
- दूध की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है
डॉ. खादर वली दूध को नॉनवेज कहते हैं :
डॉ. खादर वली दूध को “नॉनवेज” बताते हैं क्योंकि यह पशु से प्राप्त होता है। वैज्ञानिक रूप से दूध एक “एनिमल-डेराइव्ड फूड” है, लेकिन इसे नॉनवेज की श्रेणी में रखना सांस्कृतिक बहस का विषय है। इस पर डॉ. खादर वली कहते हैं कि वे रिलीजन की चर्चा नहीं करते, मगर साइंस कहता है कि दूध नॉनवेज है।
दही, छाछ और मक्खन: क्यों माने जाते हैं बेहतर?
डॉ. खादर वली का कहना है कि किण्वन (fermentation) के बाद:
- दूध के कुछ घटक बदल जाते हैं
- Lactobacillus जैसे अच्छे बैक्टीरिया बनते हैं
दही, छाछ और मक्खन के फायदे:
- पाचन में सहायक
- आंतों के लिए फायदेमंद
- लैक्टोज कम हो जाता है
प्लांट-बेस्ड दूध: एक विकल्प
आजकल कई लोग प्लांट-बेस्ड विकल्प अपना रहे हैं:
- नारियल दूध
- मूंगफली दूध
- बादाम दूध
- सोया दूध
- तिल का दूध
इनमें:
- लैक्टोज नहीं होता
- कुछ में प्रोटीन अच्छा होता है (जैसे सोया)
- कुछ में कैल्शियम फोर्टिफाइड किया जाता है
देशी घी का उपयोग कर सकते हैं, डब्बा बंद वाला नहीं होना चाहिए :
डॉ. खादर वली से जब पूछा गया कि क्या देशी घी का उपयोग किया जा सकता है? तो वे कहते हैं कि-हां। पर वो डब्बा बंद वाला नहीं होना चाहिए। बाजार में डब्बा बंद जो देशी घी मिलता है वो सेहत के लिए घातक हो सकता है।
दूध बंध तो दुनिया में 50% अस्पताल भी बंद
डॉ. खादर वली का दावा है कि यदि दूध छोड़ दिया जाए तो दुनिया में 50 प्रतिशत अस्पताल बंद हो जाएंगे। हालांकि कुछ लोग इसे अतिशयोक्ति मानते हैं। लेकिन कई लोग अब मानने लगे हैं कि दूध वाकई इंसानी शरीर के लिए बना ही नहीं है। एनिमल प्रोटीन होने की वजह से दूध इंसानों के लिए बीमारी का घर है। कई लोग अब दूध छोड़ने लगे हैं। अभी इस विचारधारा को फैलने में वक्त लगेगा, लेकिन दूध के दुष्प्रभावों से लोग जागरूक होने लगे हैं।
तो क्या हमें दूध छोड़ देना चाहिए?
- जिन्हें लैक्टोज इनटॉलरेंस है
- जिन्हें डेयरी एलर्जी है
- जिनको पाचन संबंधी समस्या होती है, उन्हें तुरंत दूध छोड़ देना चाहिए।
कन्हैया माखन चोर-दही चोर था, दूध चोर नहीं : डॉ. खादर वली
डॉ. खादर वली से जब कहा गया कि रिलीजन में दूध को लेकर कॉन्ट्रोवर्सी हैं। तो वे बोले- कि वे कॉन्ट्रोवर्सी में नहीं जाना चाहते। वे तो विज्ञानसम्मत बात कह रहे हैं। दूध इंसानों के लिए बना ही नहीं है। वे कहते हैं कि कन्हैया को माखन चोर और दही चोर कहा जाता है, दूध चोर नहीं। डॉ. खादर वली ने अपने वीडियो में कहा कि जब वे कुछ साल पहले गुजरात और राजस्थान दौरे पर आए थे तो दुकानों पर बोर्ड देखे- दाल-बाटी और छाछ। इस तरह डॉ. खादर वली दूध को इंसानों की सेहत के लिए नुकसानदायी बताते हुए इसको छोड़ने पर जोर देते हैं।








