राजस्थान की सबसे बड़ी भर्ती पर बड़ा सवाल — लाखों खर्च, लाखों अभ्यर्थी, फिर भी हजारों पद खाली होने का खतरा
दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर
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राजस्थान में 53,750 पदों पर चल रही फोर्थ ग्रेड कर्मचारी भर्ती अब केवल एक भर्ती नहीं, बल्कि लाखों बेरोजगार युवाओं की उम्मीद, संघर्ष और भविष्य का प्रतीक बन चुकी है। लगभग 24 लाख आवेदन, 21 लाख 17 हजार 198 अभ्यर्थियों की परीक्षा उपस्थिति, 1 लाख 41 हजार अभ्यर्थियों का दस्तावेज सत्यापन और अब PH अभ्यर्थियों की मेडिकल जांच — यह पूरी प्रक्रिया अपने आप में राजस्थान के इतिहास की सबसे बड़ी भर्ती व्यवस्थाओं में से एक मानी जा रही है।
लेकिन इसी भर्ती को लेकर अब एक बड़ा विवाद और चिंता सामने आ रही है — आखिर जब 4 जून 2026 को राजस्थान सरकार के कार्मिक विभाग ने नया “वेटिंग नियम” लागू कर दिया है, तो फिर इसे फोर्थ ग्रेड भर्ती में क्यों लागू नहीं किया जा रहा?
यही सवाल अब बेरोजगार युवाओं, शिक्षाविदों, सामाजिक संगठनों और कई संपादकीय मंचों पर जोर पकड़ रहा है।
क्या है पूरा मामला?
फोर्थ ग्रेड भर्ती का अंतिम परिणाम अभी जारी नहीं हुआ है। PH अभ्यर्थियों की मेडिकल प्रक्रिया जारी है। ऐसे में तकनीकी रूप से भर्ती अभी प्रक्रियाधीन मानी जा रही है।
इसी बीच 4 जून 2026 को राजस्थान सरकार ने नया “वेटिंग नियम” जारी किया, जिसका उद्देश्य था कि यदि चयनित अभ्यर्थी नियुक्ति के बाद नौकरी छोड़ दे, तो रिक्त हुए पदों पर प्रतीक्षा सूची (Waiting List) से योग्य अभ्यर्थियों को मौका दिया जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस नियम का सबसे अधिक प्रभाव और लाभ यदि किसी भर्ती में हो सकता है, तो वह यही 53,750 पदों वाली फोर्थ ग्रेड भर्ती है।
क्यों खाली हो सकते हैं 15 से 20 हजार पद?
यह प्रश्न केवल अनुमान नहीं, बल्कि वर्तमान भर्ती परिस्थितियों पर आधारित एक मजबूत संभावना मानी जा रही है।
दरअसल वर्तमान में राजस्थान में अनेक बड़ी भर्तियों के परिणाम लंबित हैं —
- थर्ड ग्रेड शिक्षक भर्ती 2025 — लगभग 9000 पद
- वाहन चालक भर्ती 2024 — 2756 पद
- परिचालक भर्ती 2024 — 500 पद
- वीडियो भर्ती 2025 — 850 पद
- कृषि पर्यवेक्षक भर्ती — 1100 पद
- प्रयोगशाला सहायक भर्ती — 804 पद
- पशु चिकित्सा अधिकारी भर्ती — 1100 पद
- उप निरीक्षक एवं प्लाटून कमांडर भर्ती — 1015 पद
- प्राध्यापक एवं कोच भर्ती — 3225 पद
- प्राध्यापक कृषि भर्ती — 500 पद
इसके अलावा आगामी महीनों में भी कई बड़ी भर्तियाँ प्रक्रियाधीन हैं —
- वरिष्ठ अध्यापक भर्ती — 7000 पद
- LDC भर्ती — 10,644 पद
- पुलिस कांस्टेबल भर्ती — लगभग 6000 पद
- RAS भर्ती — 607 पद
- वनपाल, वनरक्षक एवं सर्वेयर भर्ती — 785 पद
ऐसे में बड़ी संख्या में प्रतिभाशाली अभ्यर्थी, जिनका चयन फोर्थ ग्रेड भर्ती में हुआ है, उनका चयन अन्य उच्च पदों वाली भर्तियों में भी होना लगभग तय माना जा रहा है।
पुराना नियम बना सबसे बड़ी समस्या
वर्तमान व्यवस्था की सबसे बड़ी विसंगति यही है कि यदि कोई अभ्यर्थी फोर्थ ग्रेड पद पर एक दिन के लिए भी जॉइन कर लेता है, तो उस पद को स्थायी रूप से “भरा हुआ” मान लिया जाता है।
अब यदि वही अभ्यर्थी 6 महीने या 1 साल बाद किसी दूसरी भर्ती में चयनित होकर फोर्थ ग्रेड की नौकरी छोड़ देता है, तो वह पद रिक्त तो हो जाता है, लेकिन उस भर्ती की प्रतीक्षा सूची से किसी अन्य बेरोजगार को अवसर नहीं मिलता।
यही कारण है कि विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगले 1 वर्ष में फोर्थ ग्रेड भर्ती के 15 से 20 हजार पद खाली हो सकते हैं।
सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब योग्य अभ्यर्थी उपलब्ध हैं, तब भी हजारों पद खाली क्यों रहें?
करोड़ों रुपये खर्च, फिर भी अधूरी भर्ती?
इस भर्ती के आयोजन में सरकार और अभ्यर्थियों दोनों ने भारी आर्थिक बोझ उठाया है।
- परीक्षा आयोजन
- कर्मचारी ड्यूटी
- सुरक्षा व्यवस्था
- प्रिंटिंग शुल्क
- स्टांप शुल्क
- दस्तावेज सत्यापन
- मेडिकल जांच
इन सब प्रक्रियाओं पर करोड़ों रुपये खर्च हुए हैं।
दूसरी ओर लाखों बेरोजगार युवाओं ने कोचिंग, यात्रा, फॉर्म फीस, किराया और अध्ययन सामग्री पर अपनी सामर्थ्य से अधिक खर्च किया।
यदि इसके बावजूद हजारों पद खाली रह जाएँ, तो यह केवल प्रशासनिक त्रुटि नहीं बल्कि व्यवस्था की गंभीर विफलता मानी जाएगी।
बेरोजगार युवाओं में बढ़ती निराशा
राजस्थान में हर साल लाखों युवा सरकारी नौकरी की तैयारी करते हैं। कई अभ्यर्थी वर्षों तक सामाजिक और आर्थिक संघर्ष झेलते हुए प्रतियोगी परीक्षाओं में भाग लेते हैं।
उनकी सबसे बड़ी उम्मीद यही होती है कि जब बड़ी भर्ती आएगी, तो उन्हें रोजगार मिलेगा।
लेकिन यदि भर्ती पूरी होने के बाद भी हजारों पद खाली रह जाएँ और प्रतीक्षा सूची नहीं चलाई जाए, तो यह बेरोजगारों के जले पर नमक छिड़कने जैसा माना जा रहा है।
कई युवाओं का कहना है कि सरकार यदि समय रहते वेटिंग नियम लागू नहीं करती, तो यह लाखों मेहनती अभ्यर्थियों के साथ अन्याय होगा।
क्या कह रहे हैं शिक्षाविद और सामाजिक विश्लेषक?
शिक्षाविदों और प्रशासनिक मामलों के जानकारों का मानना है कि वर्तमान भर्ती परिस्थितियों में “वेटिंग लिस्ट” अब विकल्प नहीं बल्कि आवश्यकता बन चुकी है।
विशेषज्ञों के अनुसार —
“इतनी बड़ी भर्ती में मल्टी-सिलेक्शन होना स्वाभाविक है। यदि वेटिंग सूची नहीं होगी तो हजारों पद रिक्त रहेंगे और भविष्य में सरकार को पुनः भर्ती प्रक्रिया करनी पड़ेगी, जिससे समय और धन दोनों की बर्बादी होगी।”
कुछ संपादकीय विश्लेषकों का कहना है कि यदि सरकार इस भर्ती में नया नियम लागू कर देती है, तो यह बेरोजगारों के हित में ऐतिहासिक निर्णय माना जाएगा।
सरकार के लिए महत्वपूर्ण सुझाव
1. फोर्थ ग्रेड भर्ती में नया वेटिंग नियम तुरंत लागू किया जाए
चूंकि अंतिम परिणाम अभी जारी नहीं हुआ है, इसलिए सरकार प्रशासनिक आदेश द्वारा इस भर्ती को नए नियम के दायरे में ला सकती है।
2. कम से कम 1 वर्ष की वैध प्रतीक्षा सूची बनाई जाए
यदि कोई चयनित अभ्यर्थी नौकरी छोड़ता है, अनुपस्थित रहता है या जॉइन नहीं करता है, तो प्रतीक्षा सूची से तुरंत नियुक्ति दी जाए।
3. मल्टी-सिलेक्शन डेटा का डिजिटल विश्लेषण किया जाए
सरकार विभिन्न भर्तियों में चयनित समान अभ्यर्थियों की पहचान कर सकती है और संभावित रिक्तियों का अनुमान पहले से तैयार कर सकती है।
4. रिक्त पदों पर स्वतः प्रतिस्थापन प्रणाली लागू हो
यदि कोई पद खाली होता है, तो संबंधित विभाग को अलग से अनुमति लेने की बजाय प्रतीक्षा सूची से स्वतः नियुक्ति देने का अधिकार हो।
5. भर्ती प्रक्रिया को “रोजगार केंद्रित” बनाया जाए
भर्ती का उद्देश्य केवल परीक्षा कराना नहीं, बल्कि अधिकतम योग्य बेरोजगारों को वास्तविक रोजगार देना होना चाहिए।
सबसे बड़ा सवाल
यदि लाखों अभ्यर्थियों की परीक्षा लेकर, करोड़ों रुपये खर्च करके और योग्य अभ्यर्थियों के उपलब्ध होने के बावजूद हजारों पद खाली रह जाएँ, तो क्या यह प्रशासनिक संवेदनहीनता नहीं कहलाएगी?
राजस्थान के बेरोजगार अब केवल भर्ती नहीं, बल्कि न्यायपूर्ण भर्ती व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।
सरकार के पास अभी भी अवसर है कि वह फोर्थ ग्रेड भर्ती में नया वेटिंग नियम लागू करके हजारों युवाओं को रोजगार दे और भर्ती व्यवस्था पर उठ रहे सवालों का जवाब दे।
क्योंकि बेरोजगारी केवल आर्थिक समस्या नहीं, बल्कि सामाजिक असंतोष और मानसिक तनाव का भी सबसे बड़ा कारण बन चुकी है।
और यदि व्यवस्था समय रहते संवेदनशील नहीं बनी, तो आने वाले समय में यह मुद्दा केवल भर्ती विवाद नहीं बल्कि जनआंदोलन का रूप भी ले सकता है।




