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Thursday, July 9, 2026, 1:07 am

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हाइड्रोलिक मशीन बनी गौसेवा का सहारा, बीमार और लाचार गायों को मिल रहा दर्द रहित उपचार


श्री पन्नालाल गौशाला मंडोर की अनूठी पहल बनी मानवता का उदाहरण

जोधपुर की प्रसिद्ध श्री पन्नालाल गौशाला, मंडोर इन दिनों अपनी अनूठी गौसेवा को लेकर चर्चा में है। यहां बीमार, घायल, लाचार और चलने-फिरने में असमर्थ गायों को उठाने के लिए आधुनिक हाइड्रोलिक मशीन का उपयोग किया जा रहा है। खास बात यह है कि इस प्रक्रिया में गायों को किसी प्रकार की पीड़ा या दर्द नहीं होता, जिससे उनकी सुरक्षित देखभाल और उपचार संभव हो पा रहा है।
दर्द रहित तरीके से उठाई जाती हैं गायें

अक्सर सड़क दुर्घटना, बीमारी या कमजोरी के कारण कई गायें खड़ी नहीं हो पातीं। पहले ऐसे मामलों में गायों को रस्सियों या पारंपरिक तरीकों से उठाने में काफी कठिनाई होती थी, जिससे उन्हें और अधिक दर्द सहना पड़ता था। लेकिन अब गौशाला प्रशासन ने इस समस्या का समाधान आधुनिक हाइड्रोलिक लिफ्ट मशीन के जरिए खोज लिया है।

यह मशीन गाय के शरीर को संतुलित सहारा देकर धीरे-धीरे ऊपर उठाती है, जिससे पशु को झटका नहीं लगता और उसकी हड्डियों तथा शरीर पर अतिरिक्त दबाव भी नहीं पड़ता। इसके माध्यम से घायल गायों को आसानी से उपचार स्थल तक पहुंचाया जा रहा है।

गौसेवा में तकनीक का उपयोग बना प्रेरणा

गौशाला से जुड़े लोगों का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल गायों को आश्रय देना नहीं, बल्कि उन्हें सम्मानजनक और संवेदनशील देखभाल उपलब्ध कराना भी है। हाइड्रोलिक मशीन के उपयोग से न केवल गायों को राहत मिल रही है, बल्कि कर्मचारियों और स्वयंसेवकों के लिए भी काम आसान हुआ है।
स्थानीय लोगों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक का ऐसा उपयोग समाज के लिए प्रेरणादायक है। कई सामाजिक संगठनों ने भी इसे “मानवता और गौसेवा का उत्कृष्ट उदाहरण” बताया है।

असहाय गायों को मिल रही नई जिंदगी

गौशाला में प्रतिदिन कई बीमार और बेसहारा गायों का उपचार किया जाता है। यहां उन्हें चिकित्सा, भोजन और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जाता है। हाइड्रोलिक मशीन के कारण अब गंभीर रूप से घायल गायों को संभालना पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान और सुरक्षित हो गया है।

समाज के सहयोग की अपील

गौशाला प्रबंधन ने आमजन से अपील की है कि वे गौसेवा के इस अभियान में सहयोग करें ताकि अधिक से अधिक असहाय और बीमार गायों को राहत पहुंचाई जा सके। उनका कहना है कि समाज और सेवा भाव के सहयोग से ही ऐसी व्यवस्थाएं लंबे समय तक सफल हो सकती हैं।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor