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Sunday, October 18, 2026, 8:25 am

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Lifestyle

घर बने मंदिर’ कार्यक्रम में दिया आध्यात्मिकता एवं पारिवारिक मूल्यों का संदेश

दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर

प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के नवदशकोत्सव के उपलक्ष्य में, युवा सेवा योजना के अंतर्गत चौपासनी हाउसिंग बोर्ड (सेक्टर-17) स्थित शिव वरदानी भवन में एक विशेष आध्यात्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। “उठो जगत के वास्ते” अभियान के तहत आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य विषय “घर बने मंदिर” रहा, जिसमें 150 से अधिक युवाओं और मातृशक्ति ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

​कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन एवं ईश्वरीय स्मृति के साथ हुआ। इस अवसर पर उड़ान फाउंडेशन के अध्यक्ष वरुण धनाडिया, सीएलजी सदस्य श्रीमती कौशल्या अग्रवाल एवं राजयोगिनी बीके शील दीदी सहित क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

​संस्कारों और आध्यात्मिक मूल्यों से ही घर बनता है मंदिर: बीके गीता दीदी

​मुख्य वक्ता के रूप में भीनमाल से पधारीं राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी गीता दीदी ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में भारतीय संस्कृति का उदाहरण देते हुए कहा: ​”घर केवल ईंट-पत्थरों का ढांचा नहीं होता, बल्कि परिवार के सदस्यों के आपसी प्रेम, विश्वास, सम्मान और सहयोग से वह वास्तविक अर्थों में मंदिर बनता है।” ​उन्होंने दैनिक जीवन को सुखमय बनाने और घर का वातावरण सकारात्मक रखने के लिए कुछ व्यावहारिक सूत्र (टिप्स) भी साझा किए:

​डिजिटल डिटॉक्स: दैनिक जीवन में मोबाइल का सीमित उपयोग करें।
​नकारात्मकता से दूरी: नकारात्मक टीवी सीरियल्स और विचारों से दूर रहें।
​व्यवहार में मधुरता: नियमित दिनचर्या अपनाएं, सभी के प्रति सम्मान रखें और मीठे बोल बोलें।
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गीता दीदी ने विशेष रूप से महिलाओं की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जब परिवार का हर सदस्य स्वयं में सकारात्मक बदलाव लाता है, तो उसका असर पूरे समाज पर दिखता है। राजयोग और आध्यात्मिकता को अपनाकर पारिवारिक कलह और तनाव को पूरी तरह समाप्त किया जा सकता है।

​संवाद और संस्कारों की पुनर्स्थापना आज की सबसे बड़ी जरूरत: बीके शील दीदी

​जोधपुर सेवाकेंद्र प्रभारी राजयोगिनी बीके शील दीदी ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि आज के दौर में परिवारों के भीतर प्रेम, आपसी संवाद और संस्कारों को फिर से जगाना समय की सबसे बड़ी मांग है। आध्यात्मिकता ही बिखरते परिवारों को जोड़कर उन्हें तनावमुक्त और सुखी बना सकती है।
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संकल्प के साथ हुआ समापन

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी प्रतिभागियों को राजयोग मेडिटेशन (ध्यान) का गहन अभ्यास कराया गया, जिससे सभी ने शांति और असीम आनंद की अनुभूति की। मंच का कुशल संचालन शुचि दीदी द्वारा किया गया। कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रतिभागियों ने अपने जीवन में पारिवारिक मूल्यों को उतारने और समाज में सद्भाव फैलाने का दृढ़ संकल्प लिया। अंत में संस्था की ओर से सभी अतिथियों एवं आगंतुकों का आभार व्यक्त किया गया।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor