Explore

Search

Friday, August 28, 2026, 8:29 am

Friday, August 28, 2026, 8:29 am

LATEST NEWS
[wonderplugin_slider id=1]
Lifestyle

समाजसेवी करणसिंह राठौड़ की भीष्म प्रतिज्ञा, 25 साल घर से दूर रहे, 25 साल और दूर रहेंगे

-सात पीढ़ियों से राठौड़ के परिवार में परंपरा चली आ रही है कि सबसे छोटे बेटे को 25 साल तक घर-परिवार से दूर रहना पड़ता है, वह अपने घर नहीं आ सकता और न ही परिवार के किसी सदस्य से मिल सकता

-करणसिंह 25 साल परिवार से  दूर रहने का व्रत पालन कर चुके हैं, अभी उनकी उम्र 48 साल की है और अब 73 साल का होने के बाद ही घर जा सकेंगे, राठौड़ ने कहा-जिंदा रहा तो व्रत पालन के बाद घर जाऊंगा

डीके पुरोहित. जोधपुर

करणसिंह राठौड़ को कौन नहीं जानता? जोधपुर में इस युवा ने समाजसेवा को अपना जीवन समर्पित कर दिया। जब बात रक्तदान की होती है तो राठौड़ की सेवा की लोग मिसाल देते हैं। राठौड़ ने बाबा रामदेव समाज सेवा संस्थान का गठन किया और इस संस्थान के माध्यम से रक्तदान शिविर लगाकर पीड़ित लोगों की सेवा को अपना जीवन समर्पित कर दिया। पर राठौड़ के जीवन की एक सचाई से कई लोग परीचित नहीं है। दरअसल फलोदी जिले के उदट ठिकाना के करणसिंह राठौड़ के परिवार में सात पीढ़ियों से एक अनूठी परंपरा चली आ रही है। इस परंपरा के अनुसार घर के सबसे छोटे बेटे को 25 साल तक घर-परिवार से दूर रहना पड़ता है। इन 25 सालों में वह न तो घर में आ सकता है और न ही किसी परिवार के सदस्य से मिल सकता। करणसिंह जब छोटे थे तो उन्होंने यह भीष्म प्रतिज्ञा की थी और 25 साल तक घर-परिवार से दूर रहे। वे न तो घर गए और न ही परिवार के किसी सदस्य से मिले।

राठौड़ ने बताया कि अब उनके घर में फिर से किसी सदस्य को 25 साल तक घर-परिवार से दूर रहने और सदस्य से नहीं मिलने के व्रत का पालन करना था। मगर कोई सदस्य यह प्रतिज्ञा का व्रत पालन करने को तैयार नहीं हुआ तो एक बार फिर राठौड़ ने भीष्म प्रतिज्ञा की और व्रत का पालन करने का निर्णय किया। राठौड़ ने बताया कि अब वे फिर से 25 साल तक अपने घर नहीं जाएंगे और न ही किसी सदस्य से मिलेंगे। उन्होंने कहा कि वे 48 साल के हो गए हैं और 25 साल और इसमें जोड़ दें तो यानी 73 साल के होने तक घर नहीं जा सकेंगे। राठौड़ ने कहा कि जीवित रहे तो 73 साल की उम्र में ही घर जाएंगे और परिवार के सदस्यों से मिलेंगे।

संयम और सेवा की मिसाल है राठौड़

महाभारत काल में भीष्म ने ऐसी कठोर तपस्या की थी। कलियुग में बाबा रामदेव के भक्त करणसिंह राठौड़ ने यह भीष्म प्रतिज्ञा की है। 25 साल की अवधि कम नहीं होती। अब एक बार फिर 25 साल तक राठौड़ परिवार से दूर रहेंगे। इन 25 सालों का समय वे सेवा कार्य में गुजारेंगे। गौरतलब है कि राठौड़ ने अपना जीवन समाजसेवा को समर्पित कर दिया है। बाबा रामदेव में उनकी बड़ी आस्था है। इसीलिए उन्होंने बाबा के नाम से एनजीओ बनाया और रक्तदान, बाबा के जातरुओं की सेवा, भजन संध्या और कई सोशल एक्टिविटी के साथ पुरस्कार और सम्मान देने का कार्य किया है। फलोदी छोड़ने के बाद जोधपुर को राठौड़ ने अपनी कर्म स्थली बनाया है।

आसान नहीं है करणसिंह राठौड़ बनना

वाकई करणसिंह राठौड़ बनना आसान नहीं है। जब खेलने-कूदने की उम्र में कोई बच्चा घर-परिवार से दूर हो जाए और फिर 25 साल तक घर ही न जाए तो कैसा फील होता होगा? वाकई यह जज्बे और कड़ी प्रतिज्ञा की बात है। राठौड़ ने इस प्रतिज्ञा का पालन किया और एक बार फिर कठोर व्रत को स्वीकार किया है। करणसिंह ने बताया कि उनकी किस्मत में सेवा कार्य लिखा है। बाबा उनसे विशिष्ट कार्य करवाना चाहता है। यही वजह है कि एक बार फिर उन्होंने कठोर व्रत का पालन करने का निर्णय लिया है। देखा जाए तो करणसिंह का जीवन संत जीवन से कम नहीं है। सैनाचार्य अचलानंद गिरि महाराज की सेवा के साथ-साथ करणसिंह राठौड़ कई संतों के सान्निध्य में सेवा कार्य कर रहे हैं। उनकी दिनचर्या में संतों का आशीर्वाद लेना भी है। वे खुद दर्जनों बार रक्तदान कर चुके हैं और उनकी संस्था भी जोधपुर की बड़ी रक्तदाता संस्था है। उन्होंने अपनी संस्था के माध्यम से सैकड़ों जरूरतमंदों को रक्त उपलब्ध करवाकर उनकी जान बचाई है। वाकई ऐसा कार्य करना उनकी जीवटता काे दर्शाता है।

 

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor