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Friday, August 28, 2026, 10:15 am

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Lifestyle

नीलम व्यास स्वयंसिद्धा की मौलिक रचनाएं

(नीलम व्यास स्वयंसिद्धा जोधपुर की जानी मानीं कवयित्री हैं। आप पेशे से लेक्चरर हैं और आपकी कई पुस्तकें आ चुकी हैं। आप श्री जागृति संस्थान की वरिष्ठ सदस्य और समाजसेवा से जुड़ी हैं। आपकी रचनाओं में समाज के लिए और मानवता के लिए सकारात्मक संदेश मिलता है। प्रस्तुत है दो रचनाएं- सं.)

भेद मिटाओ

मिटाओ भेद दुनिया से ,खिले मन फूल से सारे।
बड़ी है जाति ना छोटी, बहे एक सा लहू प्यारे।
कहे रब एक ही मैंने, बनाया है सभी को तो।
पढ़ाओ प्रेम की भाषा गले लग के दुआ पा रे।

कहे फौजी मिटे हम तो सदा ही देश के खातिर।
लुटा दे जान वतन पे, करो ना भेद ओ शातिर।
नहीं हिंदू नहीं मुस्लिम बनें हम एक मिट्टी से ।
नहीं ऊंचा नहीं नीचा, नहीं पूजक नहीं काफिर।।

बनाओ विश्व गुरु भारत, मिली है ज्ञान की थाती।
रचो नव वेद गीता को, पढ़ें जग प्रेम की पाती।
करो तुम राज दुनिया पे, फले सम भाव हर मन में।
रहें मिल के सभी हम सब, बनें हम दीप ओ बाती।।

इरादे नेक हो मंजिल, मिले उनको सदा जग में।
मिटे मन पाप कलुषित तम, हरो मन भेद तुम मग में ।
करो इंसाफ रह सत पे, भलाई दीन की कर लो।
बहाओ प्रेम की गंगा, ज़माना ये झुके पग में।

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पुकार यथार्थ की सुन कवि

सुन ओ कवि नव समय पुकारे, अब तू कलम उठा लेना।
चट्टानों सी कुरीतियों को, मोड़ नया तुम दे देना ।

बहुत हो चुकी निज धर्म भरी, नीति ज्ञान की वो बातें ।
अब तो लोकेषणा पाल मन, तजो पलायन प्रति घाते।
सुध ले तू यथार्थ कठिन की, मनुज धर्म छवि भर नैना।
चट्टानों सी कुरीतियों को, मोड़ नया तुम दे देना….।

जाग कवि तू कल्पनाओं से, सत्य कठोर है पुकारे।
बहुत हुई परियों की बातें, बदलते वक्त की गा रे।
विषम जीवन की करुणा भरें, अब होने दे मृदु बैना ।
चट्टानों सी कुरीतियों को, मोड़ नया तुम दे देना…। 

सबसे पहला धर्म यही है, जग हित निज कलम चलाना।
भेद मिटे मन से जन के अब, आग उगल कर दिखलाना।
बनो आवाज गरीब की कवि, न्याय हक कभी छीनें ना।
चट्टानों सी कुरीतियों को, मोड़ नया तुम दे देना…। 

सुन ओ कवि नव समय पुकारे, अब तू कलम उठा लेना।
चट्टानों सी कुरीतियों को, मोड़ नया तुम दे देना।

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Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor