Explore

Search

Monday, July 13, 2026, 8:11 am

Monday, July 13, 2026, 8:11 am

LATEST NEWS

The specified slider does not exist.

Lifestyle

लोग गर्मी से दम तोड़ रहे, सरकार बिजली कटौती का तमाशा बंद नहीं कर रही, ये मजबूरी नहीं, नाकामी है…

फिर एक युवक ने हीटवेव से दम तोड़ा…

राइजिंग भास्कर डॉट कॉम. जाेधपुर

बेरहम गर्मी ने सोमवार को फिर एक जान ले ली। इधर डिस्कॉम गैर जिम्मेदाराना बना हुआ है और भीषण गर्मी में जब जाए बिजली कटौती कर रहा है। गर्मी के कारण वैसे ही शहर परेशान है ऊपर से गर्मी में बिजली नहीं होने से लोगों की जान पर बन आ रही है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार 32 वर्षीय युवक संजय कुमार पुत्र राजूराम बनावड़िया कमठा मजदूरी का काम करता था। बनावड़ियों की ढाणी हनुमान जिम के सामने झालामंड चौराहा में रहने वाले संजय कुमार की बताया जाता है कि गर्मी से तबीयत बिगड़ गई। उसके रिश्तेदार पहले उसे किसी प्राइवेट हॉस्पिटल में ले गए। उसके बाद तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर मथुरादास माथुर अस्पताल ले गए। जहां उसका इलाज किया गया। मृतक के बड़े भाई मोहन प्रजापत के हवाले से बताया गया कि पुलिस थाना कुड़ी भगतासनी जोधपुर में अत्यधिक गर्मी एवं हीट वैव के कारण हुई मौत को लेकर प्राकृतिक आपदा एवं सहायता नियंत्रण प्रकोष्ठ में सूचना दर्ज करवाने को लेकर संजय कुमार का मर्ग दर्ज करवाया गया।

सरकार कुछ भी करो हमें बिजली चाहिए…आप हमारी मजबूरी नहीं समझते तो हम आपकी क्यों समझें?

-हाईकोर्ट सरकार को बिजली-पानी के लिए सीधे-सीधे आदेश क्यों नहीं देती?…

सीएम भजनलाल जी…आप गर्मी में सुधार के भजन कर रहे हैं, मगर भजनों से कुछ नहीं होने वाला। आपकी मजबूरियों को हम क्यों समझें, आप हमारी मजबूरी नहीं समझ रहे..। आपके पास सौ बहाने होंगे, मगर गर्मी बहाना बनाकर नहीं आ रही। वो सीधा हमला कर रही है। एक तो आप हीटवेव से मौतें होना स्वीकार नहीं कर रहे..इसके पीछे आपकी क्या मंशा है आप ही जानें…भला गर्मी में सारे लोग दूसरी बीमारियों से ही दम तोड़ रहे हैं…क्या दूसरी बीमारियों में गर्मी का असर नहीं हो सकता…डॉक्टर कहते हैँ अमुख मरीज की हीटवेव से मौत नहीं हुई उसे दूसरी बीमारियां थी…अरे दूसरी बीमारियां हो तो क्या गर्मी से हालत और ज्यादा नहीं बिगड़ जाती…गर्मी से बढ़कर क्या बीमारी होगी। जितनी भी मौतें हो रही है वो आम आदमी है। वो आम आदमी जिनके घरों में इनवर्टर तक नहीं होंगे। लाइट चली जाए तो घंटों हाथ पंखे परिजन थामे रहे। भला पसीने से तरबतर करने वाली झुलसाती गर्मी में दो से चार घंटे बिना बिजली पंखों के रहना मानवाधिकारों का उल्लंघन नहीं है। सरकार सीधे सीधे मानवाधिकारों का हनन कर रही है। यही नहीं सरकार संविधान प्रदत्त जीने के अधिकार का उल्लंघन कर रही है। हर आदमी को जीने का अधिकार है, मगर सरकार उनके जीने के अधिकार के लिए जो रास्ता है, जो सुविधा है, उसे भी उपलब्ध नहीं करवा रही। अदालतें क्या कर रही है…हाईकोर्ट इस भीषण गर्मी में प्रसंगज्ञान क्यों नहीं लेती। सरकार को सुविधाएं उपलब्ध करवाने के आदेश जारी क्यों नहीं करती? हम भी किससे कह रहे हैं। गर्मी में सबके दिमाग खराब हो चुके हैं।

गर्मी में बिजली-पानी मुख्य मुद्दा होना चाहिए। इस मुद्दे पर कोई नेता नहीं बोल रहा। अधिकारी खामोश है। रोज अखबारों में सरकारों के नुमाइंदों फोटो छपते हैं। सीएम साहब ऐसे छपते हैं जैसे राहत की सारी चिंता उन्हें हैं…सीएम साहब हमें अखबारों में आपके फोटो नहीं चाहिए, हमें हमारे घरों में पानी बिजली चाहिए…शहरों में बिजली कटौती के ये हाल है तो गांवों की स्थिति तो और भी बुरी है…जिनके पास पैसे हैं वे तो इनवर्टर और जनरेटर अफॉर्ड कर सकते हैं, मगर जो गरीब है, जो दिहाड़ी मजदूर है, आम आदमी है, उनकी मजबूरियों को आपकी सरकार क्यों नहीं समझ रही। आपने गहलोत सरकार को कटघरे में खड़े कर वोट मांगे थे। अब आपको काम कर दिखाने का मौका आया है तो जिम्मेदारी से पीछे क्यों हट रहे हो। लोकतंत्र की यही कमजोरी है। एक बार सरकार बनने के बाद जनता गौण हो जाती है। जनता पर तंत्र हावी हो जाता है। कसूर जनता का है। जनता यदि अपना अधिकार समझे और क्रांति का सूत्रपात करें तो सरकारों की क्या औकात जो उनके साथ अन्याय अत्याचार करें। मगर खामोश जनता को सरकारें नचाती रहती है। तो मरते रहो गर्मी से। हीटवेव से। सरकारें वहीं करेंगी जो उन्हें और उनकी सेहत के लिए अच्छा होगा। आपकी पीड़ा के साथ आप जीते रहो।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor