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Tuesday, August 25, 2026, 12:25 pm

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आरक्षण में कैरिफॉर्वर्ड नियम बना दुखदाई…एक योग्य कैंडिडेंट की योग्यता की हुई हत्या, रवि जांगिड़ के साथ हुआ अन्याय, ऐसे हजारों योग्य उम्मीदवार हो रहे निराश

(वरिष्ठ सहायक की वरिष्ठता सूची)
(अभ्यर्थियों को आवंटित रोल नंबर)
(रवि जांगिड़ का नाम पदोन्नति आदेश में नहीं है।)
डीके पुरोहित. जोधपुर
पदोन्नति में कैरिफॉर्वड नियम योग्यताओं की हत्या कर रहा है। ताजा मामला जोधपुर के रवि जांगिड़ से जुड़ा है। रवि राजस्थान राज्य कृषि विपणन बोर्ड में 10 जनवरी 2014 में अनुकंपा नियुक्ति से कनिष्ठ सहायक पद पर नियुक्त हुए थे। 10 जनवरी 2018 में रवि यूडीसी बने। इसी कड़ी में 4 दिसंबर 2024 में विभागीय पदोन्नति परीक्षा हुई। इसमें कुल 25 उम्मीदवारों में से रवि टॉप में दूसरे नंबर पर रहे। उन्हें प्रथम पेपर में 86% और दूसरे पेपर में 60.50% अंक मिले। विभागीय कार्यालय आदेश के अनुसार 2024-25 में कुल रिक्तियों के विरुद्ध 6 पद खाली थे। लेकिन पदोन्नति में विभाग ने 2022-23 के स्वीकृत 6 पदों को भी शामिल कर लिया। बस यहीं से रवि के भाग्य की लकीरें केवल सरकारी क्रूर नियमों की भेंट चढ़ गई। सब कुछ ठीक था। परीक्षा में टॉप किया। उम्मीदें भी कायम थी। परिवार भी खुश था। मिठायां बांटी गई। पार्टी की तैयारी थी। मगर कॅरिफॉवर्ड नियम ने ऐसी चोट की कि खुशियां निराशा में बदल गई। एक क्रूर नियम के हथियार ने योग्यता की बली ले ली।

राजस्थान में पदोन्नति में आरक्षण के नियम 

-पदोन्नति में अनुसूचित जाति (एससी) को 16% और अनुसूचित जनजाति (एसटी) को 12% आरक्षण का प्रावधान है।
-पदोन्नति में आरक्षण को नियमित आरक्षण पर निर्धारित 50% की सीमा से ज़्यादा करने की अनुमति है।
-राज्य को पिछले सालों से खाली पदों को आगे बढ़ाने की अनुमति है। इसे कैरी फ़ॉरवर्ड नियम के नाम से जाना जाता है।
-पदोन्नति में आरक्षण को यथावत रखा गया है।
-एससी/एसटी वर्ग को 11 सितंबर, 2011 की अधिसूचना के तहत आरक्षण मिलता रहेगा।
-पदोन्नति में आरक्षण पर लगी रोक को राज्य सरकार ने वापस ले लिया है।
-पदोन्नति में आरक्षण पर रोक लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के केरल के बीके पवित्रा के निर्णय को आधार माना गया था।
-दिव्यांगजन के लिए भी आरक्षण का प्रावधान है। हर विभाग में दिव्यांगजन आरक्षण की अनुपालना के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाता है।

ये है मामला 

रवि जांगिड़ के कुल 73 प्रतिशत अंक रहे। नियमानुसार वह विभागीय पदोन्नति में योग्य थे। मगर उनके स्थान पर रविप्रकाश बैरवा (अनुसूचित जाति एससी) को पदोन्नति मिल गई। इसके पीछे कारण यह बताया जा रहा है कि 2022-23 एसटी-एससी का एक भी चयनित उम्मीदवार नहीं मिल पाया था। इसलिए कैरिफॉर्वर्ड नियम के अनुसार 2022-23 की स्वीकृत 12 पोस्टों में से बची हुई 6 पोस्टों को कैरिफॉर्वर्ड किया। इस वजह से 2 एसटी के और 1 एससी का चयन हो गया। एसटी के जो 2 चयनित हुए वे रवि से सीनियर थे उनका चयन सही हुआ। जबकि 1 एससी का चयन हुआ। जो कि रवि से जूनियर था। रविप्रकाश बैरवा का चयन 2018-19 की रिक्तियों के विरुद्ध वरिष्ठ सहायक बना था। जबकि रवि जांगिड़ 2017-18 की रिक्तियों के विरुद्ध ही वरिष्ठ सहायक बन चुका था। रवि जांगिड़ रविप्रकाश बैरवा से एक साल सीनियर होने के बावजूद पदोन्नति आरक्षण के क्रूर नियमों की वजह से प्रमोशन से वंचित रह गया? इस प्रकार रवि के साथ अन्याय हुआ। ऐसे कई रवि जांगिड़ अन्याय के शिकार हो रहे हैं। ऐसे कई मामले राजस्थान में सामने आ चुके हैं। गौरतलब है कि रविप्रकाश बैरवा के अंक भी रवि जांगिड़ से कम थे। यानी 64 प्रतिशत थे। बस कैरिफॉर्वर्ड नियम ऐसी गली है जो युवाओं और प्रतिभाओं के साथ चोट कर रही है। रवि जांगिड़ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को चाहिए कि इस नियम को खत्म करें।
Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor