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Thursday, April 16, 2026, 6:05 am

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आज से रमजान, इबादत और नेकी के दिन शुरू, एक महीने तक संयम और धैर्य की होगी परीक्षा

शिव वर्मा. जोधपुर 

मुफ्ती ए आजम राजस्थान शेर मोहम्मद खान रिजवी व चांद कमेटी अध्यक्ष, शहर खतीब व पेश इमाम काजी मोहम्मद तैयब अंसारी ने कहा कि चांद कमेटी व सभी पदाधिकारियों की मौजूदगी में चांद दिखने के साथ ही रहमतों व बरकतों के महीने माहे रमजान का रविवार से आगाज हो गया है। मुफ्ती ए आजम राजस्थान शेर मोहम्मद रिजवी ने कहा कि मेरी आप बिरादराने इस्लाम से इल्तिजा है कि अल्लाह के करम से माहे रमजान खैरों बरकत वाला महीना हम सब के लिये एक बहुत बड़ा इनाम है। हम सभी अल्लाह के सामने गिड़गिड़ाकर अजीज और इन्तेसारी करें।

हम सब उसके नेक बन्दे हैं। हम अपने-अपने घरों में रहकर, अपना सर उसकी बारगाह (मस्जिद) में झुकाकर नमाजों कीे पाबन्दी करें, रोजे रखें और इस खैरों बरकत वाले पाक महीने रमजान में, जिसमें एक नेकी का सवाब सत्तर गुना तक मिलता है। इस पाक महीने जकात व खैरात निकालें और अपने से कमजोरों की मदद करें। हम सभी आपस में मिलजुलकर उस हद तक इबादतों में डूब जायें कि वो हमें जल्द ही अपनी रहमतों की बारिश से भाईचारगी के साथ मिलजुलकर जीवन को जीने और भलाई के काम करने में हम सबकी मदद करें। अल्लाह तआला हमारी हर जायज तमन्नाओं को पूरा करे। आमीन।।

रमजान का चांद दिखने पर ईदगाह मस्जिद के पेश इमाम मौलाना मोहम्मद हुसैन अशरफी ने मस्जिद में नमाजियों की मौजूदगी में माहे रमजान की आमद की सभी को मुबारकबाद पेश करते हुए सभी की जायज तमन्नाओं को पूरा करने की दुआएँ की।

काजी मोहम्मद तैयब अंसारी, शहर खतीब व पेश इमाम ने कहा कि पैगम्बर ए इस्लाम ने फरमाया कि एक इंसान अगर पेट भर के रात को सोता है और उसके पड़ौस में दूसरा इंसान भूखा रहता है तो फरिश्ते उसकी इबादत को कबुल नहीं फरमायेगा। रोजे का फलसफा यही है कि हर इंसान, चाहे वो अमीर हो या गरीब, छोटा हो या बड़ा, फकीर हो या सुलतान, जब अल्लाह की रजा के लिए उसके हुक्म के मुताबिक रोजा रखेगा तो अल्लाह बन्दे पर बरकतों की बारिश करेगा।

शौकत अली लोहिया ने कहा कि रमजान शरीफ का महीना इंसान को अपने रब के करीब होने की तालीम देता है। इस मुबारक महीने में इबादत करना, कुरआन की तिलावत करना, अपने नब्ज पर कन्ट्रोल रखना, जुबान और आँख को पाक रखना, इस्लाम की तालीम देता है। पड़ौसियों से अच्छा व्यवहार करना, गरीबों को रोजा रखवाना और रोजा खुलवाना इस्लाम की तालीम है। लड़ाई झगड़े से बचना, किसी को जुबान से या हाथ से तकलीफ न पहुंचाना, रोजे का पैगाम है। सभी लोग मुबारक महीने में फिजुल वक्त जाया न करें और बिना वजह घरों से बाहर न रहें, बल्कि अपने घरों में रहकर अपने वालिद-वालदैन की सेवा के साथ अल्लाह की बारगाह में इबादत करें।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor