पूर्व एमएलए मनीषा पंवार ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर महिलाओं को किया सम्मानित
दी संस्कृति फाउंडेशन की संस्थापक अनीता मेहता ने महिला दिवस की सार्थकता बताई
प्रसिद्ध हैंडीक्राफ्ट व्यवसायी हंसराज बाहेती ने महिलाओं को घर-परिवार की धुरी बताया
डीके पुरोहित. जोधपुर
जोधपुर की पूर्व विधायक मनीषा पंवार ने कहा कि महिलाएं अब अबला नहीं रहीं। वो आज हर क्षेत्र में अपनी श्रेष्ठता सिद्ध कर चुकी है। महिलाओं को कम नहीं आंकना चाहिए। महिलाएं जो ठान लेती हैं वो करके रहती हैं। वे शुक्रवार को गायत्री देवी ट्रस्ट और दी संस्कृति फाउंडेशन की ओर से चौपासनी हाउसिंग बोर्ड के पास लाल पुलिया स्थित प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र के ऑडिटोरियम में आयोजित समारोह में 51 महिलाओं के सम्मान समारोह में बतौर मुख्य अतिथि अपने विचार व्यक्त कर रही थीं। इस समारोह में उन महिलाओं को सम्मानित किया गया जिन्होंने अपने संघर्ष, अपने जज्बे और अपनी मेहनत के बल पर आसमां को छुआ और अपनी अनूठी दास्तान लिखीं। उनके इसी साहस का सम्मान किया गया।
मनीषा पंवार ने कहा कि महिलाएं आज अपनी मेहनत और लगन के बल पर आगे बढ़ती जा रही हैं। शायद ही कोई क्षेत्र ऐसा बचा होगा जिसमें महिलाओं की दस्तक नहीं हों। आज महिलाएं दुनिया में अपना परचम लहरा रही हैं। महिलाओं को अबला समझना हमारी भूल होगी। महिलाओं को अपनी श्रेष्ठता बनाए रखनी होगी और दुनिया का बदलने का भाव और जज्बा बनाए रखना होगा।
अनीता मेहता ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला
दी संस्कृति फाउंडेशन की अध्यक्ष, वी क्लब ऑफ इंडिया की सह सचिव अनीता मेहता ने कहा कि उनकी संस्था महिलाओं के जनकल्याण के लिए विभिन्न क्षेत्रों में सेवा का कार्य कर रही है और कई सदस्य उनसे जुड़े हैं। इस संस्था के माध्यम से महिला सशक्तिकरण की ओर एक नई मिसाल देने का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने आरंभ में एमएलए मनीषा पंवार का स्वागत सत्कार करते हुए 51 महिलाओं का सम्मान किया। उन्होंने कहा कि ये वे महिलाएं हैं जिन्होंने अपने अपने क्षेत्र में प्रतिभा का परिचय दिया है और सेवा कार्य किया है। इस वजह से उन्हें सम्मानित किया गया। अनीता मेहता ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाने का उद्देश्य बताया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए कहा कि समानता, अधिकार और वोट का अधिकार मानते हुए और लैंगिक असमानता के विरुद्ध अभियान चलाकर ही सबसे पहले अमेरिका में विश्व महिला दिवस मनाया गया। और बाद में यूरोप और भारत में भी इसकी लहर पहुंची और महिलाओं में लैंगिक समानता और वोट का अधिकार, समानता का अधिकार उन्हें दिया गया। सम्मान का अधिकार उन्हें दिया गया। क्योंकि पुरुष प्रधान समाज में महिलाओं की स्थिति दयनीय हो गई थी। जब 15 हजार महिलाओं ने रैली निकालकर सामूहिक रूप से प्रदर्शन किया और वेतन में असमानता होने के कारण इस तरह का कार्य किया। बाद में उन्हें मान्यता मिली और 1911 में उन्हें 8 मार्च को सबसे पहले अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया। और तब से हर साल 8 मार्च को विश्व महिला दिवस मनाया जाता है।
51 महिलाओं को किया सम्मानित
कार्यक्रम में अलग-अलग फील्ड में 51 महिलाओं को सम्मानित किया गया। इन महिलाओं ने साहित्य, कला, संस्कृति, फिल्म, सोशल मीडिया, चिकित्सा, शिक्षा, अभिनय, मॉडलिंग और विज्ञान के साथ समाजसेवा में अनुकरणीय सेवाएं दी और दोनों संस्थाओं की जूरी ने काफी विचार-विमर्श और मंथन के बाद इन 51 महिलाओं के नाम का चयन किया। कार्यक्रम में प्रसिद्ध हैंडीक्राफ्ट व्यवसायी हंसराज बाहेती, भाजपा के शहर जिलाध्यक्ष राजेंद्र पालीवाल, समाजसेवी सुरेंद्रराज मेहता भी बतौर अतिथि मौजूद थे। इन अतिथियों ने महिलाओं को नारी शक्ति सम्मान 2025 के तहत दुपट्टा, स्मृति चिह्न, सर्टिफिकेट प्रदान किए। इस मौके पर गायत्री देवी ट्रस्ट के 54 नए सदस्यों को समाज सेवा की शपथ दिलाई गई। कार्यक्रम के अंत में गायत्री देवी ट्रस्ट के संस्थापक चंद्रशेखर अरोड़ा ने आभार जताया।
नारी सशक्तिरण आज की सबसे बड़ी जरूरत : अरोड़ा
इस मौके पर गायत्री देवी ट्रस्ट के संस्थापक चंद्रशेखर अरोड़ा ने कहा कि नारी सशक्तिकरण आज की सबसे बड़ी जरूरत है। समाज में आज भी सही और जज्बे के साथ काम करने वाली सोशल संस्थाओं की जरूरत है। गायत्री देवी ट्रस्ट और दी संस्कृति फाउंडेशन की ओर से यह प्रयास किया गया कि महिलाओं को उनके प्रयासों के लिए सम्मानित किया जाए। हर साल यह आयोजन किया जाता है। हमारा उद्देश्य महिलाओं को आगे बढ़ाना है और उनके कार्यों को समाज के सामने लाना है ताकि दूसरी महिलाओं को भी प्रोत्साहन मिले।
महिलाएं अनंत ऊर्जा और क्षमता की परिचायक : अनीता मेहता
इस मौके पर दी संस्कृति फाउंडेशन की संस्थापक अनीता मेहता ने कहा कि महिलाएं अनंत ऊर्जा और क्षमता की परिचायक हैं। महिलाओं में भगवान ने सहने की क्षमता दी है। नारी जब अपने आप पर आ जाती है तो हर काम आसानी से कर लेती है। आज की नारी किसी भी दृृष्टि से कम नहीं हैं। समाज को नारी को उसका हक और सम्मान देना ही होगा। नारी इसकी अधिकारी भी है। नारी की अब उपेक्षा नहीं की जा सकती। आज इसी भावना से 51 महिलाओं को सम्मानित किया गया। हमारा प्रयास रहता है कि महिलाओं को उनके कार्यों के लिए समाज में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया जाए।
राइजिंग भास्कर की एडिटर इन चीफ राखी पुरोहित का भी हुआ सम्मान
कार्यक्रम में दोनों संस्थाओं की ओर से राइजिंग भास्कर की एडिटर इन चीफ राखी पुरोहित को भी सम्मानित किया गया। राखी पुरोहित की दर्जनों कहानियां रेडियो पर आ चुकी हैं और उनकी बाल कविताओं पर मशाल बुझे ना पुस्तक भी प्रकाशित हो चुकी है। वे श्री जागृति संस्थान की कोषाध्यक्ष के रूप में समाजसेवा में कार्यरत हैं। उन्हें महादेवी वर्मा साहित्य सम्मान के साथ-साथ विभिन्न साहित्यिक ग्रुपों द्वारा दर्जनों सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। राखी पुरोहित ने अपने सम्मान के लिए अनीता मेहता और चंद्रशेखर अरोड़ा का आभार जताया।
