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Monday, August 3, 2026, 2:04 am

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Lifestyle

ऑन द स्पॉट एफ.एम. :  ठहाका सिंह का इंटरव्यू

ऑन द स्पॉट एफ.एम. :  ठहाका सिंह का इंटरव्यू- के बी व्यास के साथ

आइडिया एंड क्यूरेटर : के.बी. व्यास, दुबई
वर्ड्स ऑफ इंटरव्यू : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
प्रजेंट : दिलीप कुमार पुरोहित. राइजिंग भास्कर

… ढम… ढम… टण… टण… “ऑन द स्पॉट एफ.एम. 102.4”… जहाँ सवाल भी हँसते हैं और जवाब तो पेट पकड़कर हँसाते हैं…

(स्टूडियो में तालियों की गड़गड़ाहट…)

के बी व्यास :
नमस्कार सा… राम-राम सा… खम्मा घणी सा!

आप सुन रहे हैं ऑन द स्पॉट एफ.एम. और आज हमारे स्टूडियो में आने वाले हैं वे महापुरुष जिनकी हँसी सुनकर डॉक्टर अपनी दवा भूल जाते हैं, योग गुरु अपना प्राणायाम और पड़ोसी अपनी लड़ाई।

(ब्रेकिंग न्यूज़ की धुन…)

ब्रेकिंग न्यूज़!

आज सुबह जोधपुर के घंटाघर पर अचानक कबूतरों का पूरा झुंड उड़ गया…

लोगों ने समझा भूकंप आया है…

मगर बाद में पता चला…

ठहाका सिंह ने बस “राम-राम सा!” कहा था!

(ढोल… नगाड़े… “पधारो म्हारे देस” की धुन…)

के बी व्यास:
जोधपुर की नीली गलियों से, मिर्ची बड़े और माखनिया लस्सी का स्वाद साथ लेकर…

ज़ोरदार तालियों से स्वागत कीजिए…

ठहाका सिंह सा!

ठहाका सिंह:
हा… हा… हा… हा… हा…

(लगभग तीस सेकंड तक लगातार ठहाका…)

साउंड इंजीनियर:
सर… माइक थोड़ा दूर कर लीजिए…

मीटर लाल हो गया है।

ठहाका सिंह:
मीटर लाल नहीं बेटा…

खुशी से गुलाबी हो गया है।

के बी व्यास:
सबसे पहला सवाल…

आपका नाम ठहाका सिंह कैसे पड़ा?

ठहाका सिंह:
असल नाम तो हँसमुखदान था।

एक दिन स्कूल में मास्टर जी ने पूछा…

“दो और दो कितने?”

हमने जवाब देने के बजाय ऐसा ठहाका लगाया कि मैं बस हँसता रहा फिर क्या था पूरी क्की पूरी क्लास हँसने लगी।

मास्टर जी बोले…

“आज से तू हँसमुखदान नहीं…

ठहाका सिंह है।”

(फोन की घंटी…)

हैलो… कौन बोल रहे हैं?

मैं जोधपुर के सरदारपुरा से बोल रहा हूँ।

ठहाका सिंह जी घर पर हैं क्या?

नहीं… स्टूडियो में हैं।

अच्छा…

तो फिर हमारे मोहल्ले में अभी जो हँसी गूँज रही है…

वो रिकॉर्डिंग होगी!

सुना है आप जहाँ बैठते हैं…

वहाँ लोग बिना कारण हँसने लगते हैं?

हाँ…

क्योंकि मैं पहले खुद हँसता हूँ…

फिर कारण ढूँढ़ता हूँ।

(विज्ञापन ब्रेक)

“यह कार्यक्रम प्रस्तुत कर रहा है—

‘ठहाका अगरबत्ती’

इतनी खुशबू कि पड़ोसी भी मुस्कुराकर नमस्ते करें।

और यदि फिर भी नाराज़ रहें…

तो एक डिब्बा मुफ़्त!”

के बी व्यास:
जोधपुर आपको सबसे अधिक किसलिए पसंद है?

ठहाका सिंह:
अरे सा…

मैं विदेशों में कई सारी कंट्री घूम के आ चुका हूँ…

ऊँची-ऊँची इमारतें देखीं…

चौड़ी-चौड़ी सड़कें देखीं…

बर्फ़ से ढके पहाड़ भी देखे…

समुद्र के किनारे भी घूम आया…

मगर…

जोधपुर की बात ही अलग है।

यहाँ की हवा में अपनापन है…

यहाँ की मिट्टी में खुशबू है…

यहाँ की बोली में मिठास है…

और लोगों के दिल में ऐसी गर्मजोशी है कि परदेश की सारी चमक भी उसके आगे फीकी पड़ जाए।

और फिर सा…

जोधपुर में दो चीज़ें बड़ी प्रसिद्ध हैं…

एक मिर्ची बड़ा…

दूसरा हमारा ठहाका।

(स्टूडियो में तालियों की गड़गड़ाहट…)

फ़र्क इतना है…

मिर्ची बड़ा खाने से आँखों में पानी आता है…

और हमारा ठहाका सुनकर आँखों में आँसू…… हँसी के।

के बी व्यास:
क्या कभी किसी ने कहा कि आप कम हँसा कीजिए?

ठहाका सिंह:
हाँ…

एक बार बैंक में।

मैं ठहाका लगा रहा था…

गार्ड दौड़ता हुआ आया…

उसे लगा…

मैं लोन माफ़ होने की खुशी मना रहा हूँ।

(रिकॉर्डिंग रुक जाती है…)

अरे…

क्या हुआ?

सर…

रिकॉर्डिंग बंद हो गई।

ठहाका सिंह : कोई बात नहीं…

मेरी हँसी तो पास वाले स्टूडियो में भी सुनाई देती है वहाँ से चला दो

(दूसरी कॉल…)

मैं उम्मेद भवन के पास से बोल रहा हूँ।

कृपया ठहाका सिंह जी से कहिए…

थोड़ा धीरे हँसें…

महल के मोर भी जवाब में नाचने लगते हैं।

के बी व्यास:
आप दुखी कब होते हैं?

ठहाका सिंह:
जब कोई कहता है…

“हँसना बंद करो…”

उस दिन मुझे लगता है…

किसी ने जोधपुर से सूरज ही निकाल दिया।

के बी व्यास:
अगर आपको जोधपुर का ब्रांड एम्बेसडर बना दिया जाए?

ठहाका सिंह:
तो सबसे पहले बोर्ड लगवाऊँगा—

“जोधपुर में प्रवेश करते ही मुस्कुराना अनिवार्य है।”

जो बिना मुस्कुराए पकड़ा जाएगा…

उसे दो मिर्ची बड़े और हमारी आधे घंटे की संगत दी जाएगी।

गारंटी है…

वापस ठहाके लगाता निकलेगा।

(ब्रेकिंग न्यूज़…)

अभी-अभी समाचार मिला है…

जोधपुर पर्यटन विभाग ने घोषणा की है…

मेहरानगढ़ किला देखने से पहले…

ठहाका सिंह को सुनना आवश्यक है…

ताकि फोटो में मुस्कान प्राकृतिक आए।”**

के बी व्यास:
श्रोताओं के लिए अंतिम संदेश?

ठहाका सिंह:

ज़िंदगी मिर्ची बड़े जैसी है।

कभी तीखी…

कभी गरम…

लेकिन ऊपर से मुस्कान की चटनी लगा दो…

तो हर कौर स्वादिष्ट हो जाता है।

और याद रखना…

ठहाका मुफ्त है…

दवा से भी सस्ता…

और असर सबसे ज़्यादा।

इतना कहकर ठहाका सिंह ने ऐसा अट्टहास लगाया कि स्टूडियो की खिड़कियाँ खनखनाने लगीं। बाहर चायवाले ने समझा कोई कॉमेडी शो शुरू हो गया है। सामने वाले स्टूडियो का समाचार वाचक अपनी खबर रोककर हँस पड़ा, और साउंड इंजीनियर ने हेडफ़ोन उतारकर दोनों हाथ जोड़ लिए—“सर, अगली बार दो माइक लेकर आइएगा!”

के बी व्यास:
ऑन द स्पॉट एफ.एम.…

सुनिए…

समझिए…

मुस्कराइए…

और जब मौका मिले,

दिल खोलकर ठहाका लगाइए…

क्योंकि…

हँसी पर अभी तक कोई जीएसटी नहीं लगा है!

कार्यक्रम समाप्त…

नमस्कार सा… खम्मा घणी… राम-राम सा

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor