‘राजस्थान संपर्क’ के माध्यम से सरकार ने आमजन से मांगे सुझाव, नीति निर्माण में भागीदारी का आह्वान
दिलीप कुमार पुरोहित. जयपुर
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राजस्थान सरकार ने समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code-UCC) के मसौदे को अधिक व्यापक, व्यवहारिक और जनहितकारी बनाने के उद्देश्य से आम नागरिकों से सुझाव आमंत्रित किए हैं। राज्य सरकार के आधिकारिक ‘Rajasthan Sampark’ व्हाट्सएप बिजनेस अकाउंट के माध्यम से लोगों को संदेश भेजकर UCC पर अपनी राय देने की अपील की जा रही है। संदेश में नागरिकों से कहा गया है कि वे अपने बहुमूल्य सुझाव देकर नीति निर्माण की प्रक्रिया में भागीदार बनें। इसके लिए ucc.rajasthan.gov.in पोर्टल पर जाकर विस्तृत सुझाव देने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
सरकार का कहना है कि किसी भी बड़े सामाजिक और कानूनी सुधार को लागू करने से पहले समाज के सभी वर्गों की राय जानना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से यह जनसुझाव अभियान चलाया जा रहा है ताकि विभिन्न समुदायों, सामाजिक संगठनों, विधि विशेषज्ञों और आम नागरिकों के विचारों को ध्यान में रखते हुए संतुलित नीति तैयार की जा सके।
क्या है समान नागरिक संहिता (UCC)?
समान नागरिक संहिता का अर्थ है कि विवाह, तलाक, भरण-पोषण, गोद लेने, उत्तराधिकार और संपत्ति जैसे व्यक्तिगत नागरिक मामलों में सभी नागरिकों पर एक समान कानून लागू हो। वर्तमान में भारत में विभिन्न धर्मों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानून लागू हैं। UCC का उद्देश्य इन मामलों में समानता और एकरूपता लाना माना जाता है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 में राज्य के नीति-निर्देशक तत्वों के अंतर्गत समान नागरिक संहिता लागू करने का उल्लेख किया गया है। हालांकि यह न्यायालय द्वारा लागू कराए जाने योग्य प्रावधान नहीं है, बल्कि सरकारों के लिए एक नीति संबंधी दिशा-निर्देश है।
व्हाट्सएप संदेश में क्या कहा गया है?
राजस्थान संपर्क द्वारा भेजे गए संदेश में नागरिकों से कहा गया है—कृपया अपना बहुमूल्य सुझाव देकर नीति निर्माण में भागीदार बनें। विस्तृत सुझाव देने के लिए UCC पोर्टल पर जाएं। यह भी बताएं कि क्या आप राजस्थान में समान नागरिक संहिता लागू करने का समर्थन करते हैं। संदेश के साथ एक पोस्टर भी साझा किया गया है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की तस्वीरें हैं। पोस्टर में बताया गया है कि सुझाव निम्न विषयों पर दिए जा सकते हैं—
विवाह एवं विवाह पंजीकरण
विवाह-विच्छेद (तलाक)
भरण-पोषण
लिव-इन रिलेशनशिप
उत्तराधिकार एवं पैतृक संपत्ति
अन्य नागरिक विषय
किन विषयों पर मांगे जा रहे हैं सुझाव?
राजस्थान सरकार ने मुख्य रूप से इन विषयों पर सुझाव आमंत्रित किए हैं—
- विवाह एवं पंजीकरण
- तलाक की प्रक्रिया
- भरण-पोषण के नियम
- लिव-इन रिलेशनशिप
- उत्तराधिकार एवं संपत्ति अधिकार
- अन्य नागरिक कानून
जनसुझाव क्यों महत्वपूर्ण हैं?
सरकार का मानना है कि कानून सीधे लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं। ऐसे में यदि कानून बनाने से पहले समाज के विभिन्न वर्गों से सुझाव लिए जाएं तो वह अधिक प्रभावी और व्यावहारिक बन सकता है। विधि विशेषज्ञों के अनुसार जनभागीदारी से—कानून अधिक स्वीकार्य बनता है। व्यवहारिक समस्याओं की पहचान होती है।
विभिन्न समुदायों की चिंताओं को समझने का अवसर मिलता है। नीति निर्माण में पारदर्शिता बढ़ती है।
UCC पर देशभर में लंबे समय से चल रही है बहस
समान नागरिक संहिता भारत में कई दशकों से चर्चा का विषय रही है। समर्थकों का मानना है कि इससे सभी नागरिकों को समान अधिकार और समान कानूनी व्यवस्था मिलेगी। वहीं विरोध करने वाले पक्ष का कहना है कि धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता वाले देश में व्यक्तिगत कानूनों का संरक्षण भी महत्वपूर्ण है। उनका तर्क है कि किसी भी बदलाव से पहले व्यापक सामाजिक संवाद आवश्यक है। इसी कारण सरकारें समय-समय पर विशेषज्ञ समितियां बनाकर और जनसुझाव लेकर आगे बढ़ने की कोशिश करती रही हैं।
UCC के संभावित लाभ
सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक कानून। कानूनी प्रक्रियाओं में एकरूपता। महिलाओं एवं बच्चों के अधिकारों को मजबूत करने की संभावना। न्यायिक प्रक्रिया को सरल बनाने में मदद। विभिन्न कानूनों के बीच भ्रम कम हो सकता है।
प्रमुख चुनौतियां
- धार्मिक एवं सांस्कृतिक विविधता।
- अलग-अलग समुदायों की परंपराएं।
- व्यापक सामाजिक सहमति की आवश्यकता।
- संवेदनशील विषय होने के कारण विस्तृत संवाद जरूरी।
- कानूनी और प्रशासनिक तैयारी।
राजस्थान सरकार का उद्देश्य
राज्य सरकार का कहना है कि यह प्रक्रिया किसी पर विचार थोपने के बजाय नागरिकों की राय जानने के लिए शुरू की गई है। प्राप्त सुझावों का अध्ययन कर विशेषज्ञों के माध्यम से उनका विश्लेषण किया जाएगा। इसके बाद आवश्यकता अनुसार मसौदे में संशोधन या सुधार किए जा सकते हैं।
कैसे दे सकते हैं सुझाव?
सरकार ने सुझाव देने की प्रक्रिया को सरल बनाया है। नागरिक—आधिकारिक UCC पोर्टल पर जाकर अपनी राय दर्ज कर सकते हैं। निर्धारित विषयों पर लिखित सुझाव भेज सकते हैं। समर्थन या असहमति के साथ अपने तर्क भी प्रस्तुत कर सकते हैं। अपने अनुभव और व्यावहारिक समस्याओं का उल्लेख कर सकते हैं।
सुझाव देते समय किन बातों का रखें ध्यान?
- तथ्य आधारित सुझाव दें।
- भाषा शालीन और स्पष्ट रखें।
- व्यक्तिगत टिप्पणी से बचें।
- यदि किसी बदलाव का सुझाव दें तो उसका कारण भी लिखें।
- व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत करें।
विशेषज्ञों की राय
संवैधानिक विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी बड़े कानूनी सुधार के लिए सार्वजनिक संवाद आवश्यक होता है। जनसुझावों से सरकार को यह समझने में सहायता मिलती है कि आम नागरिक किन मुद्दों को अधिक महत्वपूर्ण मानते हैं। इससे कानून का मसौदा अधिक संतुलित बनाया जा सकता है।
महिलाओं, युवाओं और सामाजिक संगठनों की भूमिका
सरकार विशेष रूप से महिलाओं, युवाओं, अधिवक्ताओं, शिक्षाविदों, सामाजिक संगठनों तथा विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधियों से सुझाव देने की अपेक्षा कर रही है। इन वर्गों की भागीदारी से विभिन्न दृष्टिकोण सामने आएंगे, जिससे नीति अधिक व्यापक बन सकती है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म से बढ़ी भागीदारी
व्हाट्सएप, ऑनलाइन पोर्टल और डिजिटल माध्यमों के उपयोग से नागरिकों तक सूचना तेजी से पहुंच रही है। पहले जहां सुझाव देने के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे, वहीं अब लोग घर बैठे ऑनलाइन अपनी राय दर्ज कर सकते हैं। इससे अधिक लोगों की भागीदारी संभव हो रही है।
फैक्ट फाइल
- अभियान: समान नागरिक संहिता (UCC) पर जनसुझाव
- माध्यम: राजस्थान संपर्क (व्हाट्सएप बिजनेस अकाउंट)
- उद्देश्य: नागरिकों से सुझाव प्राप्त करना
- प्रमुख विषय: विवाह, तलाक, भरण-पोषण, लिव-इन, उत्तराधिकार, अन्य नागरिक विषय
- भागीदारी: ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से
लोकतांत्रिक भागीदारी को बढ़ावा देने का सरकार का प्रयास
राजस्थान सरकार द्वारा समान नागरिक संहिता पर आमजन से सुझाव मांगने की पहल लोकतांत्रिक भागीदारी को बढ़ावा देने का प्रयास है। इससे नागरिकों को नीति निर्माण में अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा। हालांकि UCC एक संवेदनशील और व्यापक विषय है, इसलिए अंतिम निर्णय से पहले प्राप्त सुझावों, विशेषज्ञों की राय और संवैधानिक प्रावधानों का संतुलित अध्ययन महत्वपूर्ण रहेगा। जनसहभागिता जितनी व्यापक होगी, उतना ही अधिक समावेशी और व्यवहारिक नीति निर्माण संभव हो सकेगा।

