“भोलेनाथ और सावन” विषय पर 12 पंक्तियों की भावपूर्ण काव्य रचनाओं से गूंजा ऑनलाइन मंच, सभी प्रतिभागियों को मिला प्रशस्ति पत्र
राखी पुरोहित. जोधपुर
सावन माह की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक गरिमा को नई ऊर्जा प्रदान करने के उद्देश्य से अंतरराष्ट्रीय श्रेया क्लब द्वारा आयोजित ऑनलाइन “सावन प्रतियोगिता” का प्रथम सप्ताह अत्यंत उत्साह, श्रद्धा और साहित्यिक सौंदर्य के साथ संपन्न हुआ। प्रतियोगिता का पहला चरण “भोलेनाथ और सावन” विषय पर आधारित 12 पंक्तियों की भावपूर्ण काव्य रचना के लिए आयोजित किया गया, जिसमें देश के विभिन्न शहरों से जुड़ी महिला साहित्यकारों और रचनाकारों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। ऑनलाइन आयोजित इस प्रतियोगिता ने यह सिद्ध कर दिया कि डिजिटल माध्यम आज साहित्य, संस्कृति और अध्यात्म के प्रचार-प्रसार का प्रभावी मंच बन चुका है।
प्रतियोगिता के दौरान प्रतिभागियों ने भगवान शिव के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा, सावन मास की आध्यात्मिक महिमा, प्रकृति की हरियाली तथा भारतीय संस्कृति की भावनाओं को अपनी स्वरचित कविताओं में अत्यंत सुंदर ढंग से अभिव्यक्त किया। प्रत्येक रचना में शिवभक्ति, प्रकृति प्रेम और सावन की मधुर अनुभूतियों का अनूठा संगम देखने को मिला। प्रतिभागियों की रचनाओं ने न केवल साहित्यिक संवेदनाओं को अभिव्यक्ति दी, बल्कि पाठकों और श्रोताओं के मन में भी भक्ति और सकारात्मकता का संचार किया।
देशभर की साहित्यकारों ने लिया उत्साहपूर्वक भाग
प्रथम सप्ताह की इस ऑनलाइन प्रतियोगिता में अनेक प्रतिष्ठित एवं नवोदित महिला साहित्यकारों ने अपनी रचनात्मक प्रतिभा का परिचय दिया। प्रतियोगिता में चंदा, सुमन महरोत्रा, सपना, सुनीता सिंह, श्वेता इरानी, शिवली गोस्वामी, सुलक्षणा, संतोष तोषनीवाल, मीता लुनीवाल, राजलक्ष्मी श्रीवास्तव, शशिकला अवस्थी, वनदेवी, भावना, प्रतीक्षा, सुरभि, अर्चना श्रेया, आनंदी सिंह, डॉ. संजीदा खानम, रेखा श्रीवास्तव, राखी पुरोहित, संगीता कुंद्रा, शोभा रानी तिवारी, शिखा पांडेय, नेहा वैष्णव तथा ममता श्रीवास्तव सहित अनेक प्रतिभागियों ने अपनी स्वरचित काव्य रचनाएं प्रस्तुत कीं।
सभी प्रतिभागियों की प्रस्तुतियों में भगवान शिव के प्रति गहन आस्था, भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान और साहित्यिक अभिव्यक्ति की उत्कृष्ट झलक दिखाई दी। प्रतिभागियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से सावन मास की धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक विशेषताओं को अत्यंत भावपूर्ण शब्दों में व्यक्त किया।
ऑनलाइन मंच बना साहित्य और संस्कृति का सेतु
अंतरराष्ट्रीय श्रेया क्लब द्वारा पूरी प्रतियोगिता ऑनलाइन आयोजित की गई, जिससे विभिन्न राज्यों और शहरों की साहित्यकार एक ही मंच पर जुड़ सकीं। डिजिटल माध्यम के कारण प्रतिभागियों को अपने घर बैठे ही अपनी प्रतिभा प्रस्तुत करने का अवसर मिला। आयोजन की यह शैली विशेष रूप से उन साहित्यकारों के लिए प्रेरणादायी रही जो दूरी या अन्य कारणों से प्रत्यक्ष कार्यक्रमों में शामिल नहीं हो पातीं।
आयोजकों का मानना है कि ऑनलाइन प्रतियोगिताओं के माध्यम से साहित्य और संस्कृति का दायरा लगातार विस्तृत हो रहा है तथा नई प्रतिभाओं को भी अपनी पहचान बनाने का अवसर प्राप्त हो रहा है।
सभी प्रतिभागियों को प्रदान किए गए प्रशस्ति पत्र
प्रतियोगिता के सफल आयोजन के उपलक्ष्य में सभी प्रतिभागियों को उनके उत्साहवर्धन और रचनात्मक योगदान के लिए प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए। आयोजकों का उद्देश्य प्रतियोगिता में श्रेष्ठता की भावना के साथ-साथ सहभागिता और साहित्यिक सृजन को भी समान महत्व देना था। प्रशस्ति पत्र प्राप्त कर प्रतिभागियों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन उन्हें निरंतर लेखन और सृजन के लिए प्रेरित करते हैं।
पूरे सावन माह चलेंगी चार चरणों की प्रतियोगिताएं
अंतरराष्ट्रीय श्रेया क्लब ने पूरे सावन मास के लिए चार चरणों में विभिन्न प्रतियोगिताओं की श्रृंखला तैयार की है, ताकि साहित्य, संस्कृति, अध्यात्म और प्रकृति से जुड़े विविध विषयों पर प्रतिभागियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिल सके।
द्वितीय सप्ताह में “शिव-आराधना” विषय पर प्रतियोगिता आयोजित होगी, जिसमें प्रतिभागियों को शिवलिंग की पूजा-अर्चना करते हुए श्रद्धायुक्त छायाचित्र प्रस्तुत करना होगा।
तृतीय सप्ताह की प्रतियोगिता का विषय “हरियाली का प्रतीक” रखा गया है। इस चरण में प्रतिभागियों को हरित परिधान में सज्जित इसी वर्ष का नवीन छायाचित्र प्रस्तुत करना होगा, जिससे सावन की हरियाली और प्रकृति के प्रति प्रेम का संदेश प्रसारित किया जा सके।
चतुर्थ सप्ताह में दो अलग-अलग गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। पहली गतिविधि के अंतर्गत प्रतिभागियों को “सावन मास मुझे कैसा प्रतीत होता है” विषय पर गद्य विचार प्रस्तुत करने होंगे, जबकि दूसरी गतिविधि काव्यगोष्ठी के रूप में आयोजित होगी, जिसमें वर्षा ऋतु अथवा सावन पर आधारित स्वरचित काव्य रचना का वाचन किया जाएगा।
साहित्य, संस्कृति और अध्यात्म का सुंदर समन्वय
अंतरराष्ट्रीय श्रेया क्लब की यह पहल केवल एक प्रतियोगिता नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और साहित्य को जन-जन तक पहुंचाने का एक सकारात्मक अभियान बनती जा रही है। सावन जैसे पावन माह में भगवान शिव, प्रकृति और साहित्य को एक साथ जोड़ने का यह प्रयास प्रतिभागियों और साहित्य प्रेमियों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को भारतीय परंपराओं से जोड़ने के साथ-साथ रचनात्मक लेखन और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति को भी प्रोत्साहित करते हैं। डिजिटल युग में इस प्रकार की ऑनलाइन प्रतियोगिताएं भौगोलिक सीमाओं को समाप्त कर प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मंच प्रदान कर रही हैं।
अर्चना श्रेया ने जताया सभी का आभार
अंतरराष्ट्रीय श्रेया क्लब की ओर से अर्चना श्रेया ने प्रथम सप्ताह की प्रतियोगिता की सफलता पर सभी प्रतिभागियों, साहित्यकारों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रतियोगिता में देशभर से मिली उत्साहपूर्ण सहभागिता इस बात का प्रमाण है कि साहित्य, संस्कृति और अध्यात्म के प्रति लोगों की आस्था आज भी उतनी ही मजबूत है।
उन्होंने बताया कि सावन माह की शेष सभी प्रतियोगिताएं भी ऑनलाइन माध्यम से आयोजित की जाएंगी, ताकि अधिक से अधिक प्रतिभागी बिना किसी भौगोलिक बाधा के इसमें शामिल हो सकें। उन्होंने सभी साहित्यकारों, महिलाओं और संस्कृति प्रेमियों से आगामी प्रतियोगिताओं में भी पूरे उत्साह के साथ भाग लेने का आह्वान किया।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अंतरराष्ट्रीय श्रेया क्लब भविष्य में भी ऐसे रचनात्मक और सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से साहित्यिक चेतना, भारतीय संस्कारों और सामाजिक सहभागिता को निरंतर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का कार्य करता रहेगा।

