न्यूयार्क से ओम गौड़ और जोधपुर से डी.के. पुरोहित की विशेष रिपोर्ट
पांच साल पहले कोराना नाम के जिस वायरस ने दुनिया में मौत का तांडव फैलाया और आज भी उसका खतरा टला नहीं है, क्या वह चंद्रमा से आया था? इसका जवाब हां में हो सकता है और नहीं भी। मगर यह सवाल तब खड़ा होता है जब डीके पुरोहित के ब्लॉग वर्ल्ड स्ट्रीट में 26 नवंबर 2013 को एजेंसी के हवाले से हैदराब से एक समाचार प्रकाशित हुआ था। इससे पहले की बात आगे बढ़ाएं उस समाचार पर एक नजर डालते हैं। इस ब्लॉग का लिंक इस प्रकार है- diliprakhai.blogspot.com इस पर जाकर आप रिपोर्ट पढ़ सकते हैं। समाचार नीचे दिया जा रहा है जो ब्लॉग पर पब्लिश हुआ था-
चंद्रमा से आ सकता है पृथ्वी पर जानलेवा वायरस: रिपोर्ट
-साइंस की छात्रा नीमा चंडेला ने शोध पत्र के माध्यम से वैज्ञानिकों के लिए नई बहस खड़ी है। 1967 में किसी अखबार की फटी प्रति में इस बात का जिक्र है कि रूस के किसी वैज्ञानिक की चंद्रमा पर जानलेवा वायरस से मौत गई थी। अब भी यह वायरस सक्रिय हो सकता है और दुनिया भर के वैज्ञानिकों को चंद्रमा अभियान को लेकर चुनौती हो सकता है…
हैदराबाद. (एजेंसी)। साइंस की छात्रा नीमा चंडेला ने अपने एक शोध-पत्र के माध्यम से चेतावनी दी है कि पृथ्वी पर चंद्रमा से जानलेवा वायरस आ सकता है। पिछले पांच साल के शोध में चंडेला की स्टडी से ऐसा कहा जा रहा है। चंडेला के हाथ सन 1967 में किसी अखबार की फटी प्रति लगी है। इस प्रति में तत्कालीन वैज्ञानिक डी. मसीह ने दावा किया है कि चांद पर जानलेवा घातक वायरस सक्रिय है। वर्षों पहले रूस के किसी वैज्ञानिक की चंद्रमा पर संदिग्ध मौत हो गई थी। बताया जा रहा है कि इस वैज्ञानिक की वायरस से मौत हुई थी। इस वायरस के बारे में कोई पुख्ता जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन चंडेला ने आशंका जताई है कि चांद पर अगर ऐसा वायरस सक्रिय है तो वैज्ञानिकों को अपने चंद्रमां संबंधित अभियान रोक देने चाहिए।
आगे क्या किया जाए
नीमा चंडेला ने बताया कि उसने अपना शोध-पत्र अभी किसी वैज्ञानिक के साथ साझा नहीं किया है। इस शोध की रिपोर्ट पर अगर भरोसा किया जाए तो अमेरिका, रुस, भारत, जापान, चीन और अन्य देशों को अपने सभी अभियान रोक देने चाहिए। अगर असावधानी से यह वायरस धरती पर आ गया तो पृथ्वी पर विनाश लीला शुरू हो सकती है।
वायरस कितना घातक पुख्ता जानकारी नहीं
चंडेला ने बताया कि यह वायरस घातक हो सकता है, मगर कितना? स्वाइन फ्लू की तरह यह हवा में फैल सकता है और दुनिया भर को अपनी चपेट में ले सकता है। इसके लक्षण अभी वैज्ञानिकों को मालूम नहीं है। चंद्रमा अभियान तो वर्षों से चल रहा है कि मगर अभी तक किसी वैज्ञानिकों को इस प्रकार के वायरस की जानकारी नहीं मिली है।
सावधानी व शोध की जरुरत
चंडेला का कहना है कि वह साइंस की स्टूडेंट है। इस दिशा में निरंतर शोध से इस नतीजे पर पहुंची है कि वायरस का पृथ्वी पर आना संभव है। धरती पर यह कितना घातक व जानलेवा होगा, यह भविष्य के गर्त में है। उन्होंने बताया कि यह वायरस प्लैग से भी कई गुना खतरनाक हो सकता है। दुनिया भर के वैज्ञानिकों को अलर्ट रहना होगा। उन्होंने बताया कि इस तरह का वायरस हो भी सकता है और नहीं भी, मगर अंतरिक्ष के रहस्यों को अभी तक वैज्ञानिक पूरी तरह समझ नहीं पाए हैं। ऐसे में वैज्ञानिकों को अलर्ट रहना जरूरी है।
क्या कोरोना वायरस चीन की प्रयोगशाला से निकला? या चंद्रमा से धरती पर आया? सवाल आज भी कायम
देखा जाए तो कोरोना वायरस के बारे में दुनिया की यही राय है कि यह वायरस चीन की प्रयोगशाला से निकला। दुनिया का दावा है कि चीन ने ही यह कृत्रिम वायरस बनाया है। जिस कोरोना वायरस ने दुनिया भर में तबाही मचाई और मौत का तांडव किया और दुनिया की अर्थव्यवस्था तहस नहस हो गई, क्या वो वाकई चीन ने बनाया था या चंद्रमा से आया था? अब यह सवाल फिर से खड़े हो गए हैं। हालांकि बड़े जद्दोजहद के बाद दुनिया को मार्ग मिला है और दुनिया में शांति बहाल हुई है, मगर खतरा अभी टला नहीं है। क्योंकि राइजिंग भास्कर डॉट कॉम ने 2 जून 2023 को एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी। उस रिपोर्ट पर अगर गौर किया जाए तो दुनिया पर फिर से खतरा मंडरा रहा है। इससे पहले कि बात आगे बढ़ाएं हमारी 2 जून 2023 की रिपोर्ट पर भी एक नजर डालते हैं।
कोरोना से हजार गुना पॉवरफुल वायरस सूर्य में हो रहा है सक्रिय, अमेरिका सहित पूंजीवादी देशों को निशाना बनाने का टारगेट
राइजिंग भास्कर डॉट कॉम. बीजिंग
कांतिलाल कंगाल की विशेष रिपोर्ट
चीन के वैज्ञानिकों ने अमेरिका सहित विश्व की शक्तियों को सबक सिखाने के लिए कोरोना से हजार गुना ताकतवर कृत्रिम वायरस बनाया है जो सूर्य कि किरणों में काम करेगा। यह वायरस जब सूर्य उदय होता है तो उसके साथ सक्रिय होता है, मगर दोपहर 13 बजे के बाद यह पूरे परवान पर आ जाता है। काला रंग इसका दुश्मन है। यह वायरस 14 बजकर 13 मिनट तक अपना असर दिखाता है और फिर निढाल हो जाता है। इसका उपयोग चीन कब करेगा, अभी कहना जल्दबाजी होगा। इसका प्रयोग करके वह दुनिया में तबाही मचाना चाहता है।
चीन ने इस वायरस से बचने का तोड़ तो निकाल लिया है। घरों से बाहर निकले समय अब काले रंग के छाते का उपयोग आप करते हैं तो आप इस वायरस से पूरे तरीके से बच सकते हैं। अभी इसके बारे में पूरी जानकारी सामने नहीं आई पाई है। जिस तरह कोरोना से बचने के लिए पीपीटी किट पहने गए उसी तरह काले रंग के पीपीटी किट पहनकर भी इस वायरस से बचाव हो सकता है। यह वायरस कैसे हमला करता हे, इसका क्या तोड़ है? इसकी कोई दवा भी है या नहीं? कोई टीका या वैक्सीन भी है या नहीं, इसके बारे में अभी कोई जानकारी नहीं मिल पाई है। यह रिपोर्ट देने वाले कांतिकाल कंगाल के बारे में भी अब हमें कोई खबर नहीं है।
(इस खबर के बारे में पूरी पड़ताल की जा रही है। अभी हमारे वैज्ञानिक इसके बारे में जांच कर रहे हैं कि यह सच है या नहीं। अभी कोई आकलन नहीं लगा सकते।)
क्या चीन बेकसुर है? क्या वाकई चंद्रमा से वायरस आया था? क्या आगे दुनिया पर खतरा बरकरार है? सवाल उत्तर मांग रहे
क्या चीन बेकसुर है। क्या वाकई चीन ने कृत्रिम वायरस नहीं बनाया। अगर चीन ने कृत्रिम वायरस बनाया और दुनिया को बर्बादी की कगार पर पहुंचा दिया तो दुनिया के ताकतवर देशों ने चीन के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की? चीन पर आपराधिक मुकदमा क्यों नहीं हुआ? संयुक्त राष्ट्र संघ ने चीन के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की? पूरी दुनिया ने चीन का बहिष्कार क्यों नहीं किया? दरअसल राइजिंग भास्कर का आकलन है कि वायरस वाकई चीन की प्रयोगशाला से नहीं निकला था। यह वायरस चंद्रमा से ही आया था। और अब भी दुनिया पर खतरा मंडरा रहा है।
चांदीपुरा वायरस क्या कोरोना की तरह खतरनाक है? क्या आगे भी वायरस का खतरा दुनिया पर मंडरा रहा है?
इन दिनों चांदीपुरा वायरस कहर ढा रहा है। दर्जनों बच्चों की इस वायरस से मौत हो गई है। लेकिन सरकार गंभीर नहीं है। क्या यह वायरस कोराेना का बदला रूप है? अगर नहीं तो क्या आगे कोरोना से भी अधिक खतरनाक वायरस का खतरा मंडरा रहा है? डब्ल्यूएचओ का कहना है कि कोरोना वायरस अब सामान्य हो चुका है। लेकिन विशेषज्ञों का अब भी मानना है कि कोरोना वायरस नष्ट नहीं हुआ है। यह रूप बदलकर कई गुना ताकत के साथ फिर से हमला कर सकता है। ऐसे में चांदीपुरा वायरस को सरकार को और दुनिया को हल्के में नहीं लेना चाहिए। क्योंकि चांदीपुरा वायरस का अभी तक कोई इलाज नहीं है।
सावधान! दुनिया के देश बर्बादी से भी सबक नहीं ले रहे, वायरस दुबारा अटैक कर सकता है
सावधान, दुनिया के देश बर्बादी से भी सबक नहीं रहे हैं। वायरस दुबारा कभी भी अटैक कर सकता है। अब भी अगर अमेरिका सहित दुनिया के ताकतवर देश गंभीर नहीं हुए तो दुनिया फिर से पाषाण युग में जा सकती है। बर्बादी के मंजर आते जाएंगे और कोई कुछ नहीं कर पाएगा। हमारी सारी टेक्नोलॉजी और प्रगति भी मौत के बढ़ते कदमों को नहीं रोक पाएगी। इसलिए अभी से सावधानी बरतते हुए आने वाले खतरे को रोकने की जरूरत है।
