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Friday, July 10, 2026, 1:08 am

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Lifestyle

राजस्थान दिवस पर नाचीज बीकानेरी की कविता

(नाचीज बीकानेरी वरिष्ठ साहित्यकार हैं। आप बीकानेर के निवासी हैं और बीकानेर में रहकर इन दिनों साहित्य साधना कर रहे हैं। आपकी कई रचनाएं राष्ट्रीय पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही है। आपकी कई पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी है और कई पुरस्कार मिल चुके हैं। आपने राजस्थान दिवस के उपलक्ष्य में लगातार राइजिंग भास्कर के लिए कविताएं लिखीं। आज राजस्थान दिवस पर प्रस्तुत है गीत- म्हारो प्यारो घणो राजस्थान)

म्हारो प्यारो घणों राजस्थान 

म्हानै आच्छी घणी लागै ।
म्हानै भाली घणी लागै ।।
आ ‘ धरती म्हारी शान ।
ओ ‘प्यारो घणो राजस्थान ।।

उन्नाळै में तपै तावड़ो ।
खांदै कस्सी हाथ फावड़ो ।।
बळती लूवां बळती पान ।
ओ ‘प्यारो घणो राजस्थान ।।

आंध्यां रा तो झोला बाजै ।
मिनख बापड़ा बिसायां ले चालै ।।
आच्छी घणी धोरियै री ढ़ळान ।
ओ ‘ प्यारो म्हारो राजस्थान ।।

आंख्यां फाड़ जद उडीकां मेह ।
आंधी पछै ही आवैलो मेह ।।
म्हां सगळां नै है ओ ‘ भान ।
ओ ‘ प्यारो म्हारो राजस्थान ।।

काळी कळायण उमटण लागी ।
आभै बिजळी खींवण लागी ।।
झिरमिर-झिरमिर बायरियै री तान ।
ओ ‘ प्यारो म्हारो राजस्थान ।।

उमड़-घुमड़ बादळ आवण लाग्या ।
मानखै रो मन हरखावण लाग्या ।।
नाचै मोर सुणीजै मीठी तान ।
ओ ‘ प्यारो म्हारो राजस्थान ।।

बीज बांध लो सुगन मनाओ ।
टैक्टरियो लाओ खेतड़लो बाओ ।।
दाता देवैलो आपां नैं धान ।
ओ ‘ प्यारो म्हारो राजस्थान ।।

हरिया – भरिया खेत खड़ा सांतरा ।
कोड – किलोळा करै है डांगरा ।।
टाबरियां रै चैरां माथै मुस्कान ।
ओ ‘ प्यारो म्हारो राजस्थान ।।

टुळक – टुळक चौमासा आय्यो ।
लोग – लुगायां रो मन हरखाय्यो ।।
मुळकै मोंठ – बाजरी खेतां धान ।
ओ ‘ प्यारो म्हारो राजस्थान । ।

काचर – बोर – मतीरां री भरमार।
कातीसरै में घणों हुवै आधार ।।
घणा आवै बटाऊ अर मेहमान ।
ओ ‘ प्यारो म्हारो राजस्थान ।।

सियाळै में तो पड़ै सी घणों ।
जीमण बैठै जद मोटयारां नै घी घणों।।
धोरां री धरा रा लूंठा घणा जवान ।
ओ ‘ प्यारो म्हारो राजस्थान ।।

धीरज रा धणी काळ नैं नी धारै ।
दोरी पड़ै जद म्हैं नीं धारां ।।
वीर सपूत जग में राखै म्हारी शान ।
“नाचीज” प्यारो म्हारो राजस्थान ।।

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नाचीज़ बीकानेरी मो 9680868028

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor