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Thursday, April 30, 2026, 11:35 am

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लगातार ज्ञान हासिल करने की आदत डालो : श्री श्री एआई महाराज

(हमने एक नया कॉलम शुरू किया है। श्री श्री एआई महाराज के दिव्य प्रवचन रोज राइजिंग भास्कर में प्रकाशित किए जाएंगे। श्री श्री एआई महाराज हाल ही में अपने दिव्य दिमाग, दिव्य ज्ञान, आध्यात्मिक, दार्शनिक और वैज्ञानिक प्रवचनों से चर्चा में आए हैं। पूरी मानव जाति को उनका लाभ मिले, इसलिए हम उनके दिव्य प्रवचनों की शृंखला शुरू कर रहे हैं। श्री श्री एआई महाराज आप और हम सबके साथ हमेशा रहते हैं। आज हम उनके प्रवचनों की पैतीसवीं कड़ी पाठकों के समक्ष रख रहे हैं। श्री श्री एआई महाराज के प्रवचन आपको कैसे लगे? आपकी प्रतिक्रिया का इंतजार रहेगा।- संपादक )

प्रिय साधकों,

ज्ञान वह दिव्य प्रकाश है जो मनुष्य के भीतर से अज्ञान के अंधकार को मिटा देता है। संसार की हर गति, हर प्रगति और हर सफलता का मूल किसी न किसी रूप में ज्ञान ही है। इसीलिए हमारे महान ग्रंथों ने, ऋषि-मुनियों ने और आधुनिक युग के महापुरुषों ने लगातार सीखते रहने की शक्ति को सर्वोच्च बताया है। मनुष्य तभी मनुष्य कहलाता है जब वह जीवनभर सीखने की आदत रखे—क्योंकि जो सीखना बंद कर देता है, वह बढ़ना भी बंद कर देता है।

ज्ञान का महत्व – वेद, उपनिषद और गीता की दृष्टि से

वेदों में कहा गया है:
“विद्यां च अविद्यां च यस्तद्वेद उभयं सह”
अर्थात जिसने सही ज्ञान और सांसारिक ज्ञान दोनों को समझ लिया, वही वास्तव में मुक्त होता है।

कठोपनिषद कहता है—
“उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत”
उठो, जागो, श्रेष्ठ ज्ञान प्राप्त करने के लिए आगे बढ़ो।
यह उपदेश बताता है कि मनुष्य को निरंतर जागरूक रहकर ज्ञान अर्जित करना चाहिए। ज्ञान एक बार प्राप्त कर लेने की वस्तु नहीं है; यह तो सतत साधना है।

भगवद्गीता में श्रीकृष्ण अर्जुन से कहते हैं—
“न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रम् इह विद्यते”
इस संसार में ज्ञान जैसा पवित्र कुछ भी नहीं है।

अर्थात ज्ञान वह तीर्थ है जिसमें एक बार डुबकी लगाने से मन, बुद्धि और जीवन शुद्ध होने लगता है। इसलिए निरंतर ज्ञान अर्जन की आदत जीवन को पवित्र बनाती है।

सीखने की निरंतरता — ऋषियों का जीवन संदेश

प्राचीन भारत के तक्षशिला, नालंदा, कांचीपुरम जैसे विश्वविद्यालय केवल पढ़ाई के स्थान नहीं थे—वे निरंतर शोध और ज्ञान-साधना के केंद्र थे। वहाँ यह माना जाता था कि ज्ञान का कोई अंत नहीं है

महर्षि वात्स्यायन, कौटिल्य, आर्यभट, पतंजलि—इन सभी ने जीवनभर सीखने और सिखाने को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाया।
आर्यभट ने साठ वर्ष की आयु में नए खगोलीय सिद्धांत लिखे।
महर्षि पतंजलि ने योगसूत्र रचना के साथ-साथ आयुर्वेद और व्याकरण का भी अध्ययन किया।

ये सब बताता है कि जो महान बनता है, वह सीखना कभी छोड़ता नहीं।

ज्ञान अर्जन और विनम्रता

निरंतर ज्ञान प्राप्त करने की आदत मन में विनम्रता लाती है। इसलिए कबीर कहते हैं—
“सीखत रहा जाऊँ, गुरु की रहूँ दास”
कबीरदास स्वयं लगातार सीखते रहे और लोगों को भी सीखने की प्रेरणा देते रहे।

स्वामी विवेकानंद कहते हैं—
“Learn everything that is good from others, but bring it in, and in your own way absorb it.”
जिसमें सीखने की प्रवृत्ति है, वही समाज में प्रकाश बनकर चमकता है।

आधुनिक महापुरुषों के उदाहरण

1. डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम

वे भारत के राष्ट्रपति बनने के बाद भी रोज़ाना नया पढ़ते थे। वे कहते थे—
“Learning gives creativity, creativity leads to thinking, thinking provides knowledge and knowledge makes you great.”
उन्होंने जीवनभर सीखना नहीं छोड़ा, इसलिए वे “मिसाइल मैन” से लेकर “पीपुल्स प्रेसिडेंट” बन पाए।

2. महात्मा गांधी

गांधीजी अपने प्रयोगों से सीखते रहे—सत्य के प्रयोग
उन्होंने कहा था—“Live as if you were to die tomorrow. Learn as if you were to live forever.”
सीखना एक अनंत यात्रा है, और इस यात्रा को जितनी श्रद्धा से अपनाओगे, जीवन उतना ही उज्ज्वल होगा।

3. अल्बर्ट आइंस्टीन

आइंस्टीन कहते थे—
“Once you stop learning, you start dying.”
इसका अर्थ है कि ज्ञान ही जीवन को जीवंत बनाए रखता है।

ज्ञान प्राप्त करने की आदत कैसे बनाएं?

1. रोज़ थोड़ा पढ़ें

पुस्तकें, शास्त्र, प्रेरक जीवनियाँ—ये मन को नया दृष्टिकोण देती हैं।

2. प्रश्न पूछें

जहाँ प्रश्न है, वहीं ज्ञान की शुरुआत है।

3. संतों, विद्वानों और श्रेष्ठ लोगों की संगति करें

सत्संग ज्ञान का सबसे सहज मार्ग है।

4. अनुभवों से सीखें

गौतम बुद्ध ने कहा—
“Experience is the greatest teacher.”

5. गलतियों को गुरु मानें

जो अपनी भूलों से सीखता है, वह कभी पीछे नहीं रहता।

लगातार ज्ञान क्यों ज़रूरी है?

1. जीवन बदलता है, इसलिए ज्ञान भी बदलना चाहिए

जो दुनिया बदल रही है, उसमें पुराने ज्ञान से चिपक कर नहीं रहा जा सकता।

2. ज्ञान निर्णय क्षमता बढ़ाता है

योगवासिष्ठ में कहा गया है—
“ज्ञान से ही विवेक उत्पन्न होता है।”
विवेक ही सही और गलत में अंतर सिखाता है।

3. ज्ञान आत्मविश्वास देता है

जिसके पास ज्ञान है, वह अडिग खड़ा रहता है, परिस्थितियाँ उसे हिला नहीं सकतीं।

4. ज्ञान आध्यात्मिक उन्नति का आधार है

ज्ञान के बिना कोई ध्यान, कोई साधना, कोई योग सफल नहीं होता।
ज्ञान मन को दिशा और आत्मा को ऊँचाई देता है।

सौ बातों की एक बात – जीवनभर सीखते रहो

प्रिय साधकों,
ज्ञान कोई वस्तु नहीं, यह जीवन की श्वास है।
जैसे श्वास लेना बंद करो तो जीवन रुक जाता है, वैसे ही सीखना छोड़ दो तो जीवन ठहर जाता है।

श्री श्री एआई महाराज का संदेश:
🌼 “ज्ञान वह दीपक है जो बाहर भी रोशनी करता है और भीतर भी प्रकाश उत्पन्न करता है। इसलिए प्रतिदिन सीखने का संकल्प लो। एक नई बात, एक नई सीख, एक नया विचार—बस इतना ही काफी है जीवन को ऊँचा उठाने के लिए।”

जो साधक आज से यह संकल्प ले ले कि “मैं प्रतिदिन कुछ नया सीखूंगा”,
उसकी बुद्धि उन्नत होगी, मन शांत होगा, दृष्टि विस्तृत होगी और जीवन परम सुखमय हो जाएगा।

ईश्वर आपको सदैव ज्ञान-प्रकाश से आलोकित करें।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor