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Friday, April 10, 2026, 3:08 pm

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पुण्यतिथि बनी जनसेवा का पर्व : बसंती देवी भूतड़ा की स्मृति में जन सेवा एवं स्वास्थ्य महोउत्सव”

दिलीप कुमार पुरोहित. पीपाड़ सिटी

आमतौर पर जन्मदिन, विवाह वर्षगाँठ या किसी प्रियजन की पुण्यतिथि के अवसर पर लोग अपने परिजनों और मित्रों को आमंत्रित कर केक कटिंग, दीप प्रज्वलन, भजन संध्या या सामूहिक भोजन का आयोजन करते हैं। यह परंपरा लंबे समय से हमारे सामाजिक जीवन का हिस्सा रही है। किन्तु राधेश्याम, महेश, मनीष और आशीष भूतड़ा ने अपनी माताजी स्वर्गीय बसंती देवी भूतड़ा की प्रथम पुण्यतिथि को एक नई और प्रेरणादायक दिशा दी। उन्होंने इस अवसर को केवल पारिवारिक आयोजन तक सीमित न रखते हुए इसे “जन सेवा एवं स्वास्थ्य महोत्सव” के रूप में मनाया।

इस महोत्सव के अंतर्गत शहर के लगभग 225 लोगों का निःशुल्क सम्पूर्ण स्वास्थ्य परीक्षण (Complete Body Check-up) कराया गया। इस जांच में हृदय, किडनी, लिवर तथा रक्त की जांच सहित कई आवश्यक स्वास्थ्य परीक्षण शामिल रहे, जिससे लोगों को अपने स्वास्थ्य की वास्तविक स्थिति के बारे में जानकारी मिल सकी।

इसके अतिरिक्त लगभग 200 जरूरतमंद लोगों के लिए सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के निःशुल्क कार्ड बनवाए गए, ताकि वे भविष्य में इन योजनाओं का लाभ प्राप्त कर सकें। स्वास्थ्य महोत्सव का एक महत्वपूर्ण भाग फिजियोथेरेपी शिविर भी रहा, जिसमें घुटनों, कंधों और मांसपेशियों के दर्द या खिंचाव से पीड़ित 150 से अधिक महिला और पुरुषों को विशेषज्ञों द्वारा उपचार और मार्गदर्शन प्रदान किया गया।

इस आयोजन से लाभान्वित हुए लोगों ने इस पहल की भरपूर सराहना की। वहीं जिन लोगों ने इसके बारे में सुना, उन्होंने भी इसे दूरदर्शी और समाज को नई दिशा देने वाला कदम बताया। इस अवसर पर उपस्थित बिलाड़ा विधायक श्री अर्जुनलाल गर्ग ने कहा कि यदि समाज का हर परिवार अपने उत्सवों और स्मृति दिवसों को केवल निजी आयोजन तक सीमित न रखकर उनमें गरीबों और जरूरतमंदों की सेवा को जोड़ दे, तो शहर और समाज की अनेक समस्याएँ स्वतः ही समाप्त हो सकती हैं। उन्होंने भूतड़ा परिवार की इस पहल को मानवता की सच्ची सेवा का उदाहरण बताया।

भूतडा परिवार के मुख्या ओर दीवंगत आत्मा के पति बालकिशन भूतडा ने इस विचार के लिए रामानंद काबरा को अपनी प्रेरणा बताया, ओर इस सम्पूर्ण आयोजन का दायित्व भी उसने उठा रखा था।उनोहने कहा की मुझे परमसंतोष है की मैंने एक सच्ची श्रद्धांजलि दिवंगत आत्मा को दी है। ओर मेरा विश्वास है की इससे वो अजर अमर आत्मा संतोष महसूस कर रही होंगी।यह पहल अब हर घर घर की घटना बन जायेगी। निस्संदेह, यह आयोजन केवल एक पुण्यतिथि का स्मरण भर नहीं था, बल्कि समाज को यह संदेश देने वाला प्रयास था कि सच्ची श्रद्धांजलि वही है, जो मानवता की सेवा में बदल जाए।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor