दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर
चेटीचंड के मौके पर सिंधी समाज में मुंडन संस्कार की भी परंपरा अपनाई जाती है। कला फाउंडेशन की 85 वर्षीय वयोवृद्ध माता श्रीमती कलावंती देवनानी ने अपने पढ़पौत्र राघव के मुंडन समारोह के दौरान जानकारी दी कि सदियों से चेटीचंड में पर्व के दौरान प्रातःकालीन वेला में डेढ़ दो माह पूर्व जन्मे बच्चे या बच्ची का मुंडन संस्कार धार्मिक विधि विधान के साथ किया जाता है।
रंगकर्मी हरीश देवनानी ने बताया कि मुंडन संस्कार के दौरान लोक गीत, नृत्य, छेज, साखियों और पल्लव की विधि अपनाते हुए मेट् , गुलाब जल और सुत का प्रयोग प्रयोग करते हुए बच्चे को शुद्ध जल में माता पिता द्वारा नहलाया जाता है। प्रसाद के वितरण के साथ साथ खुशियां मनाई जाती हैं।
इस मौके पर मुंबई के साहित्यकार भावन पारवानी, जयपुर से अशोक देवनानी इस आयोजन के साक्षी बने। नई पीढी को इस प्रकार से आयोजन से सुखद अनुभूति होती है और पारंपरिक प्रथा को जानने का मौका मिलता है। इस मौके पर विभिन्न वाद्य यंत्रों का प्रयोग भी किया जाता है। इस अवसर पर सीए अमित परवानी ने मोरचंग बजाते हुए कार्यक्रम में जान डाल दी। इस मौके पर संध्या मोदी, रीना कमलेश, शालू थदानी, प्रेम मोदी, अंजली देवनानी, माधुरी, रश्मि, काव्या, जीवांश, राघव देवनानी सहित कई पारिवारिक लोग उपस्थित थे। ऐसे आयोजन आज चेटीचंड के अवसर पर कई घरों में हुए हैं।









