राइजिंग भास्कर के ग्रुप एडिटर दिलीप कुमार पुरोहित का मुख्य न्यायाधीश को पत्र—कहा विवाद का निपटारा होने तक जैसलमेर कलेक्टर प्रतापसिंह नाथावत का तुरंत हो ट्रांसफर, डीएम की सभी शक्तियां छीन ली जाए।
लोकतंत्र में निरंकुश प्रशासन का कोई स्थान नहीं, 22 साल से जिस जमीन पर वैध रेस्टोरेंट चल रहा हो उसे अवैध रूप से तीन दिन में कैसे ध्वस्त कर सकते हैं? पुलिस प्रशासन की मिलीभगत भी सामने आई। सबकुछ ठाकरशाही से हुआ। पत्रकारों ने कहा- उनके साथी के साथ न्याय नहीं हुआ तो आंदोलन तेज होगा।
दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर
9783414079 diliprakhai@gmail.com
जैसलमेर में पिछले 22 वर्षों से संचालित एक प्रतिष्ठित रेस्टोरेंट को लेकर खड़ा हुआ विवाद अब न्यायपालिका के दरवाजे तक पहुंच गया है। पर्यटन व्यवसायी एवं पत्रकार उपेन्द्रसिंह राठौड़ के रेस्टोरेंट को कथित रूप से अवैध तरीके से तोड़े जाने के मामले में प्रशासन पर गंभीर आरोप लगे हैं। इस पूरे प्रकरण को लेकर राइजिंग भास्कर के ग्रुप एडिटर दिलीप कुमार पुरोहित ने राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को एक कड़े शब्दों में पत्र लिखकर न केवल न्याय की मांग की है, बल्कि जैसलमेर कलेक्टर प्रताप सिंह नाथावत के खिलाफ सख्त कार्रवाई की अपील भी की है। इस पत्र में लगभग डेढ़ करोड़ रुपये के नुकसान की भरपाई कलेक्टर की निजी संपत्ति से कराने और मामले के निस्तारण तक उनके तत्काल तबादले की मांग प्रमुख रूप से उठाई गई है।
22 वर्षों से संचालित रेस्टोरेंट, क्रूरता और तानाशाही से तोड़ दिया-कलेक्टर साहब इतना ही शौक है न्याय करने का तो सूली डूंगर को अतिक्रमण से मुक्त क्यों नहीं करवाते…? (खबर के अंत में प्रस्तुत है सूलीडूंगर की रिपोर्ट)
पत्र के अनुसार, उपेन्द्रसिंह राठौड़ पिछले तीन दशकों से जैसलमेर में पर्यटन व्यवसाय से जुड़े हुए हैं और हाल के वर्षों में पत्रकारिता में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। वर्ष 2004 में तत्कालीन जिला कलेक्टर द्वारा उन्हें प्रशासनिक अधिकारियों के क्लब “DESERT” के समीप 100×80 वर्गफीट का भूखंड लिखित अनुमति के साथ ₹5,000 प्रतिमाह किराये पर रेस्टोरेंट संचालन हेतु आवंटित किया गया था। इस भूखंड पर “स्वाद रेस्टोरेंट” नाम से स्थापित प्रतिष्ठान का निर्माण, विद्युत, जल और अन्य सभी व्यवस्थाएं पूरी तरह राठौड़ द्वारा स्वयं के व्यय से की गईं।
नियमित भुगतान के बावजूद कार्रवाई पर सवाल
पत्र में उल्लेख किया गया है कि पिछले 22 वर्षों से किराया, बिजली, पानी एवं अन्य सभी देय राशि का नियमित भुगतान किया जाता रहा। जनवरी 2025 से किराया बढ़कर ₹45,000 प्रतिमाह हो गया था और दिसंबर 2025 तक की राशि भी जमा कर दी गई थी। यहां तक कि कोविड-19 महामारी के दौरान, जब पूरा देश राहत की स्थिति में था और रेस्टोरेंट लगभग डेढ़ वर्ष तक बंद रहा, तब भी किराया माफ नहीं किया गया, बल्कि वर्तमान कलेक्टर प्रताप सिंह नाथावत द्वारा वह राशि भी वसूल की गई।
मौखिक आदेश और दबाव: आरोपों की गंभीरता
नवंबर 2025 में कथित रूप से कलेक्टर नाथावत द्वारा बिना किसी लिखित आदेश के केवल मौखिक निर्देश दिया गया कि तीन दिन में रेस्टोरेंट खाली कर दिया जाए, अन्यथा गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। उपेन्द्रसिंह राठौड़ का कहना है कि उन्होंने इस आदेश के बाद प्रशासनिक स्तर पर संवाद स्थापित करने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें कोई राहत नहीं मिली। अंततः उन्होंने न्यायालय की शरण ली और स्थगन आदेश प्राप्त किया।
स्थगन आदेश के बावजूद कार्रवाई: लोकतांत्रिक मूल्यों पर सवाल
पत्र में आरोप लगाया गया है कि न्यायालय से स्थगन आदेश मिलने के बावजूद 23 दिसंबर 2025 को, जब जैसलमेर में पर्यटन अपने चरम पर था, प्रशासन द्वारा एकतरफा कार्रवाई की गई। इस कार्रवाई में जिला रसद, आबकारी, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा और विद्युत विभाग को शामिल किया गया। रेस्टोरेंट से कमर्शियल गैस सिलेंडर जब्त कर लिए गए, किचन सील कर दिया गया और लाइसेंस नवीनीकरण भी रोक दिया गया। इतना ही नहीं, पुलिस प्रशासन पर दबाव बनाकर रेस्टोरेंट के बाहर खड़े पर्यटकों के वाहनों के चालान तक काटे गए, जिससे वहां आने वाले पर्यटक भी हतोत्साहित हुए।
पत्रकार होने की वजह से निशाना बनाए जाने का आरोप
उपेन्द्रसिंह राठौड़ ने यह भी आरोप लगाया है कि वे “द पुलिस पोस्ट” समाचार पत्र के प्रधान संपादक हैं और इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष भी हैं। उनका कहना है कि वे लगातार जनहित के मुद्दों पर लिखते रहे हैं और कलेक्टर के खिलाफ भी खबरें प्रकाशित करते रहे हैं। इसी कारण उन्हें व्यक्तिगत रूप से निशाना बनाया गया।
राइजिंग भास्कर का हस्तक्षेप: न्याय की मांग
इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए दिलीप कुमार पुरोहित ने मुख्य न्यायाधीश को लिखे पत्र में इसे “लोकतंत्र में प्रशासनिक तानाशाही का उदाहरण” बताया है। पत्र में कहा गया है कि यदि एक पत्रकार और व्यवसायी, जो वर्षों से नियमों का पालन कर रहा है, उसे इस प्रकार प्रताड़ित किया जाता है, तो यह पूरे समाज के लिए खतरनाक संकेत है।
डेढ़ करोड़ के नुकसान का दावा
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि इस कार्रवाई के चलते रेस्टोरेंट को लगभग डेढ़ करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ है। इसमें संरचना, उपकरण, व्यवसायिक हानि और प्रतिष्ठा को हुए नुकसान को शामिल किया गया है। राइजिंग भास्कर ने मांग की है कि इस नुकसान की भरपाई कलेक्टर प्रताप सिंह नाथावत की निजी संपत्ति से करवाई जाए, ताकि भविष्य में कोई भी अधिकारी अपनी शक्तियों का दुरुपयोग न कर सके।
तत्काल ट्रांसफर की मांग
पत्र में यह भी मांग की गई है कि जब तक इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक कलेक्टर नाथावत को जैसलमेर से तत्काल प्रभाव से हटा दिया जाए। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जांच प्रक्रिया निष्पक्ष और बिना किसी दबाव के पूरी हो सके।
लोकतंत्र बनाम प्रशासनिक तानाशाही
यह मामला केवल एक रेस्टोरेंट या एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का है। जब प्रशासनिक अधिकारी अपने अधिकारों का दुरुपयोग करते हैं और न्यायालय के आदेशों की भी अनदेखी करते हैं, तो यह पूरे सिस्टम पर प्रश्नचिह्न लगाता है।
पर्यटन उद्योग पर भी असर
जैसलमेर जैसे शहर, जो पूरी तरह पर्यटन पर निर्भर हैं, वहां इस प्रकार की घटनाएं न केवल स्थानीय व्यवसायियों को नुकसान पहुंचाती हैं, बल्कि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों में भी गलत संदेश देती हैं।
न्यायपालिका से उम्मीद,
इस पूरे मामले में अब सबकी निगाहें राजस्थान हाईकोर्ट पर टिकी हुई हैं। क्या न्यायपालिका इस मामले में सख्त रुख अपनाएगी? क्या प्रशासनिक तानाशाही पर लगाम लगेगी? राइजिंग भास्कर के ग्रुप एडिटर दिलीप कुमार पुरोहित द्वारा उठाई गई यह आवाज न केवल एक व्यक्ति के लिए न्याय की मांग है, बल्कि यह पूरे लोकतंत्र की रक्षा का सवाल भी है।
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