पंकज जांगिड़. जोधपुर
धार्मिक व सामाजिक सेवा कार्यो के प्रति सेवाभावी, गौसेवक, पशु-पक्षी-पर्यावरण प्रेमी घनश्याम जांगिड़ (सिलक) की स्मृति में महंत श्रीधरगिरी महाराज के सान्निध्य मे रातानाडा, पुरानी लोको रोड स्थित लड्ढ़ा काॅलोनी गली नंबर 3 में भजन गंगा प्रवाह का आयोजन हुआ।
कार्यक्रम संयोजक तुलसीराम-विशाल सिलक ने बताया कि भजन गंगा प्रवाह के दौरान गायक चंद्रसिंहमामा, शिवराज जांगिड़, विजय लौहार व नीरु देवी ने भजनों की गंगा प्रवाहित कर सभी को भावविभोर कर दिया। आयोजन में मांगीलाल, अमरचंद, बंशीलाल, शंकरलाल, हेमराज, अमृतलाल, राजेश, निर्मल, पीयुष, ललित, महेश, अनिश आदि ने श्रीधर गिरी महाराज, सुशील गिरी, श्रवण पंचारिया व कलाकारों का स्वागत-सत्कार किया। इस मौके क्षेत्रीय पूर्व पार्षद गणपत सिंह चौहान सहित अनेक गणमान्य नागरिक, श्रोतागण व मातृशक्ति उपस्थित रहे।
इस दौरान महाराज ने उपस्थित श्रोताओं को आशीर्वचन देते हुए उन्होंने नशामुक्ति, शाकाहार, ब्रह्मचर्य का पालन करने और व्यभिचार से दूर रहने की भी प्रेरणा दी। महाराज ने जोर देकर कहा कि संयमित और नैतिक जीवन शैली अपनाकर ही आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त की जा सकती है। महाराज ने शाकाहार, गौसेवा और वृक्षारोपण को मानव जीवन का आधार बताया।
उन्होंने लोगों से इन मूल्यों को अपनाने का आह्वान किया। महाराज ने अपने संबोधन में कहा कि जीवों की हत्या एक महापाप है। उन्होंने गाय को ‘माँ’ का दर्जा दिए जाने और गाय के दूध, घी, गोबर और गोमूत्र के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने लोगों से गायों की सेवा और उनके संरक्षण का आग्रह करते हुए कहा कि जब देश में गौहत्या पूरी तरह बंद हो जाएगी, तभी सतयुग का आगमन होगा। उन्होंने लोगों से स्वयं को सतयुग के योग्य बनाने और समाज को भी इस दिशा में प्रेरित करने का आह्वान किया। वृक्षारोपण अभियान का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है, उनकी सार-संभाल ही वृक्षारोपण का वास्तविक उद्देश्य पूरा होगा। सत्संग के समापन पर महाराज ने उपस्थित श्रोताओं से करुणा, सेवा, नैतिक जीवन और प्रकृति संरक्षण के मूल्यों को अपनाकर समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का आह्वान किया।



